ई20 नीति पर केजरीवाल का हमला: 'कुछ साल पेट्रोल-डीजल गाड़ी न खरीदें', ई50 की तैयारी का लगाया आरोप
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 6 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति पर तीखा हमला बोला और आम वाहन खरीदारों को चेतावनी दी कि वे फिलहाल कुछ वर्षों तक पेट्रोल या डीजल की नई गाड़ियाँ खरीदने से बचें। केजरीवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि सरकार पेट्रोल में 50 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने की तैयारी कर रही है और 'माहौल शांत होने का इंतजार' कर रही है।
केजरीवाल का आरोप: क्या कहा एक्स पोस्ट में
केजरीवाल ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'केंद्र सरकार का क्या प्लान है? पता चल रहा है कि पेट्रोल में 50 प्रतिशत से ज्यादा की मिलावट करेंगे। अभी बस माहौल शांत होने का इंतजार कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले सरकार ने ई0 और ई10 के लिए बनी पुरानी गाड़ियों में जबरदस्ती ई20 पेट्रोल डलवाकर उन्हें खराब किया। उनका कहना था कि आज जो लोग नई ई20-अनुकूल गाड़ी खरीद रहे हैं, कल उनके साथ भी यही होगा जब सरकार ई50 लागू करेगी।
पंजाब में पुराने वाहन बाज़ार पर असर
केजरीवाल ने द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट को भी रीपोस्ट किया, जिसके अनुसार पंजाब में ई20 पेट्रोल लागू होने के बाद पुरानी पेट्रोल गाड़ियों का बाज़ार करीब ₹1,000 करोड़ तक सिकुड़ गया है। रिपोर्ट में डीलरों के हवाले से बताया गया कि खरीदार अब डीजल गाड़ियों और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर रुख कर रहे हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि इथेनॉल नीति की अनिश्चितता बाज़ार की धारणा को प्रभावित कर रही है।
ई20 नीति क्या है और विशेषज्ञ क्या कहते हैं
ई20 का अर्थ है 20 प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल। केंद्र सरकार का तर्क है कि इससे वाहनों का कार्बन उत्सर्जन घटेगा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ई20 के उपयोग से गाड़ी की माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि पुरानी गाड़ियाँ — जो ई20 के लिए डिज़ाइन नहीं की गई थीं — इस मिश्रण के साथ दीर्घकालिक रूप से कितनी सुरक्षित रहेंगी।
सरकार की स्थिति और आगे की राह
उल्लेखनीय है कि ई50 या डीजल में इथेनॉल मिश्रण को लेकर केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। केजरीवाल के बयान को इस संदर्भ में उनका कथित आरोप माना जाना चाहिए। फिर भी, इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इथेनॉल नीति को लेकर बहस तेज हो गई है और वाहन खरीदारों में असमंजस की स्थिति बन गई है। आने वाले समय में सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।