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ई-20 ईंधन पर केजरीवाल के आरोप निराधार, इंजीनियरिंग डिग्री के बावजूद तथ्य नहीं: सुधांशु त्रिवेदी

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ई-20 ईंधन पर केजरीवाल के आरोप निराधार, इंजीनियरिंग डिग्री के बावजूद तथ्य नहीं: सुधांशु त्रिवेदी

सारांश

BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने केजरीवाल के ई-20 विरोध मार्च को 'नाटकबाजी' करार दिया और कहा कि मैकेनिकल इंजीनियर होने के बावजूद उन्होंने न कोई रिसर्च पेश की, न ऑटोमोबाइल डेटा। BJP सांसद तरुण चुघ ने दावा किया कि ई-20 नीति से ₹1.75 लाख करोड़ सीधे किसानों तक पहुँच रहे हैं।

मुख्य बातें

BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 4 अगस्त को अरविंद केजरीवाल के ई-20 ईंधन विरोध मार्च को बेबुनियाद और निराधार बताया।
त्रिवेदी ने कहा कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि के बावजूद केजरीवाल ने कोई तकनीकी तथ्य या ऑटोमोबाइल डेटा प्रस्तुत नहीं किया।
BJP सांसद तरुण चुघ ने दावा किया कि ई-20 नीति से लगभग ₹1.75 लाख करोड़ सीधे भारतीय किसानों के खातों में जा रहे हैं।
चुघ ने केजरीवाल के इस दावे को खारिज किया कि पिछले चार साल से वाहन खराब हो रहे हैं — ई-20 लागू होने की प्रक्रिया चार महीने से भी कम पहले शुरू हुई।
दुनियाभर के कई देशों में ई-15 जैसे इथेनॉल मिश्रित ईंधन पहले से उपयोग में हैं, जिसे BJP ने अपने तर्क का आधार बनाया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने मंगलवार, 4 अगस्त को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा ई-20 ईंधन के विरुद्ध निकाले गए विरोध मार्च को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री बिना किसी ठोस तथ्य या शोध के जनता में भ्रम फैला रहे हैं। त्रिवेदी के अनुसार, मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि रखने वाले केजरीवाल से अपेक्षा थी कि वे तकनीकी तथ्य प्रस्तुत करते, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया।

त्रिवेदी के आरोप: नाटकबाजी और बेबुनियाद दावे

त्रिवेदी ने कहा, 'दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अपनी नाकाम राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का बोझ उठाए कुछ समर्थकों के साथ दिखे। वे हमेशा की तरह नाटकबाजी और गैर-जिम्मेदाराना हरकतें करते हुए बेबुनियाद और निराधार आरोप लगा रहे थे।' उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल खुद को IIT स्नातक बताते हैं, लेकिन अक्सर बिना तथ्य पेश किए बात करते हैं।

त्रिवेदी ने पूर्व की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि केजरीवाल ने वैक्सीन चर्चा के दौरान सुझाव दिया था कि फॉर्मूले सभी को बाँट दिए जाएँ — जो उनके अनुसार तकनीकी समझ की कमी को दर्शाता है।

ई-20 पर तकनीकी तर्क और केजरीवाल की आलोचना

त्रिवेदी ने कहा, 'मुझे उम्मीद थी कि केजरीवाल तकनीकी पहलुओं और संभावित असर के बारे में बताएंगे। हालांकि उन्होंने न तो कोई रिसर्च की है और न ही ऑटोमोबाइल कंपनियों से कोई डेटा पेश किया है। इसके बजाय वे बेवजह विवाद खड़ा कर रहे हैं।' उनका कहना था कि केजरीवाल को ऐसी गलत जानकारी फैलाने से बचना चाहिए।

त्रिवेदी ने यह भी रेखांकित किया कि दुनियाभर के कई देशों में ई-15 जैसे इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग पहले से हो रहा है और भारत में भी इस दिशा में क्रमिक प्रगति हुई है। उन्होंने केजरीवाल के इस दावे को 'अजीब' बताया कि पिछले चार साल से वाहन खराब हो रहे हैं, जबकि ई-20 को लागू करने की प्रक्रिया चार महीने से भी कम समय पहले शुरू हुई थी।

BJP सांसद तरुण चुघ का तंज: किसानों के हित पर सवाल

BJP सांसद तरुण चुघ ने भी केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। चुघ ने कहा, 'मैं अरविंद केजरीवाल से कहना चाहता हूँ कि वे जो चश्मा पहने हुए हैं, उसे उतार दें।' उन्होंने दावा किया कि ई-20 नीति के तहत भारत के किसानों से एक-एक बूँद इथेनॉल खरीदा जा रहा है और केजरीवाल किसानों की आमदनी पर असत्य बयान दे रहे हैं।

चुघ ने कहा कि ई-20 को एक दिन में लागू नहीं किया गया — इथेनॉल का उपयोग दशकों की क्रमिक प्रक्रिया का परिणाम है और यह अब 20 प्रतिशत मिश्रण तक पहुँचा है। उनके अनुसार, इस नीति से लगभग ₹1.75 लाख करोड़ सीधे भारतीय किसानों के खातों में जा रहे हैं, जिससे किसानों, बाज़ार और देश की अर्थव्यवस्था को लाभ हो रहा है।

राजनीतिक संदर्भ: AAP की रणनीति पर सवाल

BJP नेताओं का आरोप है कि केजरीवाल अपने 'लड़खड़ाते राजनीतिक एजेंडे' को पुनर्जीवित करने के लिए अलग-अलग मुद्दे तलाश रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब AAP दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि केजरीवाल का यह विरोध मार्च ऐसे समय में हुआ जब केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति को ऊर्जा सुरक्षा और किसान आय दोनों के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि AAP को विरोध से पहले तकनीकी और आर्थिक तथ्य सामने रखने चाहिए थे।

आगे क्या

फिलहाल AAP की ओर से BJP के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ई-20 ईंधन नीति पर यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, खासकर जब इथेनॉल मिश्रण से जुड़े तकनीकी और आर्थिक आँकड़े जनता के बीच आएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

नीति के संभावित दुष्प्रभावों की समीक्षा का विकल्प नहीं है। पुराने वाहनों पर उच्च इथेनॉल मिश्रण के तकनीकी असर को लेकर उपभोक्ता संगठनों और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों की चिंताएँ सार्वजनिक दायरे में हैं — जिन्हें BJP ने संबोधित नहीं किया। ₹1.75 लाख करोड़ के किसान लाभ का दावा सत्यापन की माँग करता है: यह राशि किन राज्यों के, किन फसलों के किसानों तक कैसे पहुँची, इसका पारदर्शी डेटा अब तक सामने नहीं आया है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई-20 ईंधन क्या है और भारत में इसे कब लागू किया गया?
ई-20 वह ईंधन है जिसमें पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। भारत में इसे लागू करने की प्रक्रिया चार महीने से भी कम समय पहले शुरू हुई, हालाँकि इथेनॉल मिश्रण की नीति दशकों पुरानी है और धीरे-धीरे इस स्तर तक पहुँची है।
सुधांशु त्रिवेदी ने केजरीवाल पर क्या आरोप लगाए?
BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि केजरीवाल ई-20 ईंधन के खिलाफ बिना किसी शोध, तकनीकी तथ्य या ऑटोमोबाइल डेटा के विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि होने के बावजूद केजरीवाल तकनीकी तर्क देने में विफल रहे।
तरुण चुघ ने किसानों के संदर्भ में क्या दावा किया?
BJP सांसद तरुण चुघ ने दावा किया कि ई-20 नीति के तहत लगभग ₹1.75 लाख करोड़ सीधे भारतीय किसानों के खातों में जा रहे हैं। उन्होंने केजरीवाल पर किसानों की आमदनी के बारे में गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।
क्या दूसरे देशों में भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग होता है?
हाँ, BJP सांसदों के अनुसार दुनियाभर के कई देशों में ई-15 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग पहले से हो रहा है। इसे उन्होंने भारत की ई-20 नीति की वैधता के समर्थन में तर्क के रूप में प्रस्तुत किया।
केजरीवाल के ई-20 विरोध का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
BJP नेताओं का कहना है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद AAP अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए नए मुद्दे तलाश रही है। केजरीवाल के ई-20 विरोध मार्च को BJP ने इसी रणनीति का हिस्सा बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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