ई-20 ईंधन विवाद: पंजाब स्पीकर कुलतार सिंह संधवां का केंद्र पर हमला, आप ने वापसी की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने 4 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ में ई-20 इथेनॉल-ब्लेंडेड ईंधन नीति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि यह नीति देश को नुकसान पहुँचा रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र से इस फैसले को तत्काल वापस लेने की माँग की है।
संधवां का केंद्र पर सीधा वार
स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि ई-20 का मुद्दा हर नागरिक की जेब से जुड़ा है। उनके अनुसार, 'यह नीति बेहद चालाकी से अमेरिका को फायदा पहुँचाने के लिए बनाई गई है — न ग्राहकों को, न किसानों को, न पर्यावरण को और न देश को इससे कोई लाभ है।' संधवां ने सवाल उठाया कि यदि सरकार इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल देना चाहती है, तो इसे केवल उन्हीं लोगों को दिया जाए जो इसे स्वेच्छा से लेना चाहते हैं — हर किसी पर इसे थोपना उचित नहीं है।
पंजाब सरकार का विधानसभा में प्रस्ताव
AAP नेता और मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि पंजाब सरकार ने केंद्र की ई-20 नीति के विरोध में विधानसभा में एक औपचारिक प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने कहा कि यह नीति जबरन लागू की जा रही है, जिससे हजारों वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं और ईंधन की माइलेज भी घट रही है। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि यह कदम अमेरिकी हितों के प्रभाव में उठाया जा रहा है।
केजरीवाल का राष्ट्रीय अभियान, 7 लाख लोगों की भागीदारी
गौरतलब है कि AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में ई-20 ईंधन के विरोध में एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया था, जिसके तहत एक राष्ट्रीय टाउन हॉल आयोजित किया गया। मंत्री अरोड़ा के अनुसार, इस टाउन हॉल में लगभग 7 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। पंजाब में उठे इस विरोध को उसी अभियान की क्षेत्रीय अनुगूँज के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस पर AAP का पलटवार
AAP नेता बलतेज पन्नू ने इस मौके पर कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ऐसे लोगों को अपने मंचों पर बुलाकर नारे लगवा रही है जो कथित तौर पर 'चिट्टा' (हेरोइन) से जुड़े मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं। पन्नू ने कहा कि पंजाब में कांग्रेस के पास जनता के सामने रखने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है और पार्टी जमीनी स्तर पर लगभग समाप्त हो चुकी है।
आगे क्या होगा
AAP की माँग है कि केंद्र सरकार ई-20 नीति को अनिवार्य रूप से लागू करने का फैसला वापस ले और इसे वैकल्पिक बनाए। पंजाब विधानसभा का यह प्रस्ताव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह केंद्र-राज्य संबंधों में ईंधन नीति को लेकर एक नई बहस की शुरुआत कर सकता है।