ई20 पेट्रोल पर तेलंगाना कांग्रेस का केंद्र पर हमला: 'वापस लो नीति, तुरंत घटाओ ईंधन की कीमतें'
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना कांग्रेस ने 18 अगस्त 2026 को हैदराबाद में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए ई20 इथेनॉल पेट्रोल नीति को तत्काल वापस लेने और पेट्रोल की कीमतों में फ़ौरी कटौती की माँग की। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि ई20 से ई10 पर वापसी स्वयं सरकार की विफलता का प्रमाण है और इस पूरी नीति से आम जनता को कोई फायदा नहीं हुआ।
मुख्य आरोप और नेताओं के बयान
तेलंगाना कांग्रेस नेता जहीर ललानी ने कहा कि ई-20 से ई-10 पर वापस आना ही केंद्र सरकार की 'बहुत बड़ी विफलता का संकेत' है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से झूठे वादे किए गए। ललानी ने कहा, 'ई-20 से ई-10 पर आना ही सरकार की बहुत बड़ी विफलता का संकेत है। वे इसे खुलकर स्वीकार नहीं कर रहे हैं लेकिन नितिन गडकरी के निजी फायदे के लिए उन्होंने जनता को गुमराह किया कि ई-20 लोगों को 15–20 रुपये प्रति लीटर मिलेगा और जनता को फायदा होगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।'
ललानी ने कीमतों की असमानता पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, 'जब कच्चे तेल की कीमत 115 रुपये थी, तब भी ई-20 पेट्रोल की कीमत बढ़ा दी गई। तेलंगाना में यह 115 रुपये है जबकि कुछ अन्य राज्यों में 103 से 105 रुपये के बीच है।' उन्होंने केंद्र से माफी माँगने और पेट्रोल की कीमतें घटाने की माँग की, यह कहते हुए कि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें कम होने के बाद भी उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिली।
पूर्व सांसद की चिंता: पानी और किसानों पर असर
पूर्व कांग्रेस सांसद मधु याक्षी गौड़ ने ई20 पेट्रोल को नागरिकों के लिए 'गंभीर समस्या' करार दिया। उन्होंने कहा, 'भारत के नागरिकों से ई20 इथेनॉल पेट्रोल का इस्तेमाल करने के लिए कहना बिना सोचे-समझे किया गया काम है और यह चिंता का गंभीर विषय है।' गौड़ ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि सरकार और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के परिवार के सदस्य इथेनॉल उत्पादन में शामिल हैं — हालाँकि इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
गौड़ ने पर्यावरणीय और कृषि पक्ष पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार इथेनॉल आधारित ईंधन के उत्पादन में 'बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है', जो किसानों और जल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
ई20 नीति का संदर्भ
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (ई20) को ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता घटाने के उद्देश्य से चरणबद्ध रूप से लागू किया था। यह नीति 2025 तक पूर्ण ई20 मिश्रण के लक्ष्य के साथ शुरू की गई थी। आलोचकों का कहना है कि पुराने वाहन इंजनों पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है और माइलेज में गिरावट आती है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ी कटौती नहीं हुई है, जिससे विपक्षी दलों को केंद्र पर हमले का मौका मिल रहा है।
आगे क्या
तेलंगाना कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को संसद और सड़क — दोनों स्तरों पर उठाएगी। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईंधन मूल्य निर्धारण और इथेनॉल मिश्रण नीति पर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।