क्या सुखजिंदर सिंह रंधावा जोधपुर पहुंचे और कर्नल सोनाराम चौधरी की शोक सभा में होंगे शामिल?

सारांश
Key Takeaways
- सुखजिंदर सिंह रंधावा ने प्रदेश सरकार पर तीखे आरोप लगाए।
- कर्नल सोनाराम चौधरी की शोक सभा में शामिल होने जा रहे हैं।
- रंधावा ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए।
- मतदाता लिस्ट में नाम कम करने का आरोप लगाया।
- राजस्थान में ड्रग्स और माफिया के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की।
जोधपुर, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के प्रमुख नेता और राजस्थान के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मंगलवार को जोधपुर का दौरा किया। इसके बाद वे बाड़मेर के लिए प्रस्थान करेंगे, जहाँ वे कर्नल सोनाराम चौधरी के निधन पर आयोजित शोक सभा में हिस्सा लेंगे।
जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने प्रदेश सरकार पर तीखे आरोप लगाए। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस में वापसी करने वाले नेताओं से टिकट के लिए दावेदारी न करने की अपील की। उन्होंने अशोक गहलोत, सचिन पायलट और अन्य नेताओं से एकजुटता का प्रदर्शन करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि आजकल लोग अपने नाम को वोटर लिस्ट में खोजने में लगे हुए हैं। पहले सरकारें मतदाताओं को वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए जागरूक करती थीं, लेकिन अब वे वोटरों की संख्या घटा रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में एक करोड़ वोट बढ़ाए गए, जबकि बिहार में 70 फीसद वोट काट दिए गए हैं। यह लोकतंत्र को खत्म करने और देश को तानाशाही की ओर ले जाने का प्रयास है, जो कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेस ने हमेशा आज़ादी और जनता के हित में काम किया है। चुनाव में सरकार का गठन वोट से होना चाहिए, लेकिन भाजपा यह तय करती है कि किसे वोट दिया जाए। इसे वोट चोरी कहा जा सकता है और पिछली सरकार भी इसी तरीके से बनी।
उन्होंने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह अब स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था नहीं रह गई है। यह किसी एक पार्टी के साथ मिलकर काम कर रही है। आजादी के बाद पहली बार ऐसा चुनाव आयोग है जो मृतकों के वोट बनाने और जिंदा लोगों के वोट काटने की बात कर रहा है।
रंधावा ने अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष से अनुरोध किया कि उन्हें अभी से वोटर लिस्ट की जांच कर लेनी चाहिए, अन्यथा चुनाव के समय ये लिस्ट गायब हो जाएंगी, जैसा कि बिहार और महाराष्ट्र में हुआ।
उपराष्ट्रपति चुनाव के संदर्भ में, रंधावा ने कहा कि इंडिया गठबंधन का उम्मीदवार पहले उनके खिलाफ निर्णय दे चुका है, फिर भी उन्होंने विरोध नहीं किया। 2जी जैसे घोटालों में उनकी सरकार को निशाना बनाया गया, लेकिन सभी बरी हो गए। अब भाजपा को भी ऐसा सहना चाहिए।
उन्होंने जाट नेता जगदीप धनखड़ पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उनका उपराष्ट्रपति पद के लिए चयन क्यों हुआ और वे कहाँ हैं? उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया, तो उनकी स्थिति की जानकारी क्यों नहीं दी जा रही?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर हमला करते हुए रंधावा ने उन्हें 'पर्ची सरकार' कहा और आरोप लगाया कि उनका कोई स्पष्ट दृष्टिकोण नहीं है और वे केवल दिल्ली से आने वाली पर्चियों के अनुसार चलते हैं। राजस्थान एक बॉर्डर राज्य है और यहाँ भी पंजाब की तरह खतरा है। ड्रग्स और माफिया की समस्या दोनों जगह बढ़ रही है। मुख्यमंत्री को इस पर कड़ा रुख अपनाना चाहिए और इन मुद्दों का समाधान करना चाहिए।