क्या 'लव जिहाद' और धर्मांतरण कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली?

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क्या 'लव जिहाद' और धर्मांतरण कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली?

सारांश

क्या 'लव जिहाद' और धर्मांतरण कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टल गई है? इस विषय पर विभिन्न राज्यों के कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाएं अभी भी लंबित हैं। जानें सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम क्या होगा?

मुख्य बातें

'लव जिहाद' और धर्मांतरण कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली।
जावेद मलिक ने इन कानूनों के समर्थन में याचिका दायर की।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से तीन हफ्तों में जवाब देने को कहा।
कानूनों के खिलाफ याचिकाएं भी लंबित हैं।
कानून का संभावित गलत इस्तेमाल समाज में तनाव पैदा कर सकता है।

नई दिल्ली, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित कई राज्यों में 'लव जिहाद' और अनैतिक धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून लागू हो चुके हैं। इन कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाएं अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

इस बीच, अखिल भारतीय पसमांदा मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जावेद मलिक ने इन कानूनों के पक्ष में याचिका प्रस्तुत की है। उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई फिलहाल टल गई है।

सुप्रीम कोर्ट अब 28 जनवरी को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वे जनवरी के तीसरे हफ्ते में इस मामले की फाइनल सुनवाई के लिए इसे सूचीबद्ध करेंगे। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा है कि वे तीन हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करें। जावेद मलिक की याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने आश्वासन दिया है कि इसे बाकी याचिकाओं के साथ ही सुना जाएगा।

जावेद मलिक ने अपनी याचिका में यह स्पष्ट किया है कि वह इन राज्यों द्वारा बनाए गए कानूनों का समर्थन करते हैं और चाहते हैं कि उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जाए, जो इन कानूनों को चुनौती दे रही हैं। उनका कहना है कि ये कानून समाज में शांति बनाए रखने और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए आवश्यक हैं।

वहीं, इन राज्यों द्वारा बनाए गए कानूनों के खिलाफ याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये कानून अंतर-धार्मिक जोड़ों को परेशान करने और व्यक्तिगत निर्णयों में हस्तक्षेप करने का कारण बन गए हैं। उनका आरोप है कि इन कानूनों की आड़ में कोई भी व्यक्ति बिना वजह धर्मांतरण के आरोप में फंस सकता है। ऐसे मामलों में अक्सर लोगों की निजी जिंदगी में हस्तक्षेप किया जाता है और सामाजिक तनाव भी बढ़ता है।

इन याचिकाओं को जमीयत उलेमा-ए-हिंद और सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस जैसे संगठनों ने भी दाखिल किया है। उनका कहना है कि कानून का गलत इस्तेमाल होने की संभावना है और इससे धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही निर्णय देगा। जावेद मलिक की याचिका और बाकी याचिकाओं की सुनवाई के बीच कोर्ट यह तय करेगा कि कानून संविधान के दायरे में है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुझे लगता है कि इस मुद्दे पर अदालत का निर्णय व्यापक सामाजिक प्रभाव डाल सकता है। हमें सभी पक्षों की सुनवाई करनी चाहिए ताकि एक संतुलित निर्णय लिया जा सके।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लव जिहाद कानून क्या है?
लव जिहाद कानून का उद्देश्य जबरन धर्मांतरण को रोकना है।
क्या सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई फिर से होगी?
हाँ, सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी को अगली सुनवाई निर्धारित की है।
क्या जावेद मलिक की याचिका का क्या महत्व है?
जावेद मलिक की याचिका इन कानूनों का समर्थन करती है और इसे अन्य याचिकाओं के साथ सुना जाएगा।
ये कानून समाज में कैसे प्रभावित कर सकते हैं?
इन कानूनों को लेकर कुछ का मानना है कि इससे अंतर-धार्मिक जोड़ों को परेशानी हो सकती है।
क्या कानून का गलत इस्तेमाल हो सकता है?
हाँ, कई संगठनों का कहना है कि कानून का गलत इस्तेमाल होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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