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क्या बालेशाह पीर दरगाह विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने खुश खंडेलवाल की याचिका स्वीकार की?

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क्या बालेशाह पीर दरगाह विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने खुश खंडेलवाल की याचिका स्वीकार की?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तन की अवैध बालेशाह पीर दरगाह के खिलाफ खुश खंडेलवाल की याचिका को स्वीकार किया। क्या यह विवाद धार्मिक समुदायों के बीच तनाव को बढ़ाएगा? जानिए इस मामले की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने खुश खंडेलवाल की याचिका को स्वीकार किया।
उत्तन गांव में दो दरगाहें एक ही बाबा के नाम पर हैं।
आगामी सुनवाई 5 जनवरी 2026 को होगी।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका लंबित है।
धार्मिक सहिष्णुता पर यह विवाद गहरा प्रभाव डाल सकता है।

नई दिल्ली, 18 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के उत्तन गांव में अवैध बालेशाह पीर दरगाह के खिलाफ एडवोकेट खुश खंडेलवाल द्वारा दायर हस्तक्षेप अर्जी को सुप्रीम कोर्ट ने दरगाह की याचिका के साथ जोड़कर सुनवाई करने का आदेश दिया है।

हिंदू टास्क फोर्स के संस्थापक एडवोकेट खुश खंडेलवाल ने उत्तन की अवैध बालेशाह पीर दरगाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई 16 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विपुल पंचोली की पीठ के समक्ष हुई।

सुनवाई के दौरान खुश खंडेलवाल के वकील अमृत जोशी और प्रतीक कोठारी ने अदालत को बताया कि दरगाह ट्रस्ट ने जानबूझकर अपनी याचिका में खुश खंडेलवाल को प्रतिवादी नहीं बनाया, जबकि खुश खंडेलवाल ने दरगाह के अवैध निर्माण के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी, जो अब भी लंबित है।

वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि इस मामले में बालेशाह पीर दरगाह ट्रस्ट हाईकोर्ट में प्रतिवादी है और मामला अंतिम सुनवाई के चरण में है। ये सभी बातें दरगाह ट्रस्ट ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से छुपाईं, जिसके कारण उसे आसानी से सुप्रीम कोर्ट से स्थगन आदेश मिल गया।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए स्थगन आदेश के कारण खुश खंडेलवाल की हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका प्रभावित हो रही है। खुश खंडेलवाल ने अपनी हस्तक्षेप अर्जी में सुप्रीम कोर्ट को एक और तथ्य बताया कि मीरा-भायंदर क्षेत्र में बालेशाह पीर बाबा के नाम पर दो अलग-अलग जगहों पर दरगाह बनाई गई है।

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि इन दो दरगाहों में से एक उत्तन डोंगरी में है और दूसरी भायंदर पश्चिम के कोलीवाड़ा क्षेत्र में स्थित है। यह जानकारी अदालत के सामने रखे जाने के बाद सवाल उठाया गया कि एक ही बाबा की दो अलग-अलग जगह कब्र कैसे हो सकती है। इस मामले की अगली संभावित सुनवाई 5 जनवरी 2026 को हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महत्वपूर्ण है कि हम धार्मिक विवादों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखें। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि न्याय व्यवस्था सभी पक्षों की चिंताओं को गंभीरता से लेती है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बालेशाह पीर दरगाह विवाद क्या है?
यह विवाद उत्तन गांव की अवैध बालेशाह पीर दरगाह के निर्माण से संबंधित है, जिसके खिलाफ एडवोकेट खुश खंडेलवाल ने याचिका दायर की है।
सुप्रीम कोर्ट ने किसकी याचिका स्वीकार की?
सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट खुश खंडेलवाल की हस्तक्षेप याचिका को स्वीकार किया है।
क्या दरगाह के खिलाफ कोई अन्य कानूनी कार्रवाई हो रही है?
हाँ, हाईकोर्ट में भी इस मामले में जनहित याचिका लंबित है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली संभावित सुनवाई 5 जनवरी 2026 को हो सकती है।
इस विवाद का धार्मिक प्रभाव क्या है?
यह विवाद धार्मिक सहिष्णुता को चुनौती दे सकता है और समुदायों के बीच तनाव बढ़ा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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