क्या तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने छह साइबर जालसाजों को गिरफ्तार किया?

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क्या तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने छह साइबर जालसाजों को गिरफ्तार किया?

सारांश

तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो ने केरल और बेंगलुरु में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस घटना ने देशभर में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई है। जानिए कैसे ये जालसाज लोगों को ठगने में सफल हुए।

Key Takeaways

  • साइबर धोखाधड़ी
  • व्यक्तिगत जानकारी
  • साइबर सुरक्षा एजेंसियों

हैदराबाद, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (टीजीसीएसबी) ने केरल और बेंगलुरु में चलाए गए एक अभियान के दौरान 16 करोड़ रुपए से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के तीन मामलों में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

टीजीसीएसबी की निदेशक शिखा गोयल ने मंगलवार को बताया कि टीजीसीएसबी ने साइबर अपराधों की चल रही जांच के तहत और इसमें शामिल आरोपियों को पकड़ने के लिए एक समन्वित अभियान चलाया।

दो टीमें केरल और एक टीम बेंगलुरु भेजी गईं। उन्होंने सफलतापूर्वक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से तीन केरल और तीन बेंगलुरु में गिरफ्तार किए गए।

तीन मामलों में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पांच खाताधारक और एक एजेंट शामिल हैं, जिनसे पीड़ितों को कुल मिलाकर 16.18 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ था।

9 दिसंबर 2024 को एक बुजुर्ग महिला से शिकायत मिली कि खुद को टीआरएआई, सीबीआई, आरबीआई और अन्य राष्ट्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताने वाले एक गिरोह ने उन्हें ठग लिया है। पीड़िता को एक कॉल आया, जिसमें झूठा दावा किया गया कि उनका आधार से जुड़ा फोन नंबर आपराधिक गतिविधियों में शामिल है।

कॉल को उन लोगों को ट्रांसफर कर दिया गया जिन्होंने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया और उन्हें और उनकी बेटियों को स्काइप पर जुड़ने, 24 घंटे निगरानी में रहने और सख्त निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया, यह कहते हुए कि उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया गया है।

धोखेबाजों ने सीबीआई और आरबीआई के लोगो वाले फर्जी दस्तावेज भेजे और दावा किया कि उनके बैंक खातों के सत्यापन की आवश्यकता है। लगातार दबाव में आकर, उन्होंने 14 नवंबर से 3 दिसंबर 2024 के बीच आरटीजीएस के माध्यम से बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। उन्हें 5,66,51,100 रुपए का नुकसान हुआ।

इस मामले में टीजीसीएसबी ने केरल निवासी 30 वर्षीय रेंजू पथक्कू रेजी को गिरफ्तार किया। रेंजू ने साइबर धोखाधड़ी से मिली धनराशि को प्राप्त करने के लिए अपने दोस्त को कंपनी का चालू बैंक खाता और उससे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। बाद में, उसके दोस्त ने ये विवरण मुख्य जालसाजों को दे दिए, जिनके बारे में आरोप है कि वे अन्य देशों से काम कर रहे हैं।

2 जनवरी, 2026 को डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हुए एक वरिष्ठ नागरिक से शिकायत प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि 27 अक्टूबर, 2025 को उन्हें व्हाट्सएप पर एक कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को ब्लू डार्ट कस्टमर केयर का प्रतिनिधि बताया और आरोप लगाया कि उनके नाम से जुड़े एक पार्सल में अवैध सामान है। उन्होंने बताया कि एक अन्य कॉलर ने खुद को बॉम्बे पुलिस अधिकारी बताते हुए उन पर गंभीर अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया और उन्हें मामले को गोपनीय रखने का निर्देश दिया, साथ ही उनसे वित्तीय विवरण साझा करने के लिए दबाव डाला।

उन पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव डाला गया। उन्हें कुल 7,12,80,000 रुपए का नुकसान हुआ। अधिक पैसे की मांग करने वाले एक पत्र ने उन्हें संदेह में डाल दिया, जिसके चलते उन्होंने एनआरसी के पास शिकायत दर्ज कराई।

इस मामले में, केरल निवासी अरुण श्रीनिवास (41) और सनल वी मेनन (48) को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कमीशन के बदले साइबर जालसाजों को अपने बैंक खाते की जानकारी दी थी।

जबकि एक अन्य मामले में तीन और जालसाजों को गिरफ्तार किया गया।

Point of View

तो हमें सतर्क रहना चाहिए। यह आवश्यक है कि हम अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखें और ऐसे मामलों की सूचना तुरंत संबंधित प्राधिकृत संस्थाओं को दें।
NationPress
06/02/2026

Frequently Asked Questions

तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो क्या है?
तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (टीजीसीएसबी) राज्य में साइबर अपराधों की जांच और रोकथाम के लिए जिम्मेदार एक सरकारी एजेंसी है।
साइबर धोखाधड़ी के मामलों में क्या करें?
यदि आप साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सुरक्षा एजेंसी से संपर्क करें।
क्या मुझे अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करनी चाहिए?
नहीं, आपको अपनी व्यक्तिगत जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
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