क्या तेलंगाना सरकार पोलावरम विस्तार का विरोध करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में मजबूत दलीलें पेश कर पाएगी?
सारांश
Key Takeaways
- तेलंगाना सरकार का पोलावरम विस्तार पर सख्त रुख है।
- सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश करने की तैयारी जारी है।
- आंध्र प्रदेश द्वारा जल अधिकारों का उल्लंघन संभव है।
- कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ली जा रही है।
- परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
हैदराबाद, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गोदावरी नदी के पानी में तेलंगाना के उचित हिस्से पर किसी भी समझौते को ठुकराते हुए, राज्य सरकार आंध्र प्रदेश द्वारा प्रस्तावित पोलावरम प्रोजेक्ट के विस्तार का विरोध करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में मजबूत दलीलें प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने रविवार को गोदावरी नदी पर आंध्र प्रदेश द्वारा प्रस्तावित पोलावरम-नल्लामाला सागर प्रोजेक्ट को रोकने के लिए सीनियर कानूनी विशेषज्ञों के साथ चर्चा की।
राज्य सरकार ने हाल ही में इस प्रोजेक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार द्वारा दायर रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है।
मुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री ने मुंबई में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी से मुलाकात की। उन्होंने कानूनी विशेषज्ञों को राज्य की ओर से प्रभावी और मजबूत दलीलें पेश करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सभी आवश्यक दस्तावेज और सबूत तैयार रखने के लिए सतर्क किया गया है।
तेलंगाना सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर करके आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा अनिवार्य कानूनी मंजूरी के बिना पोलावरम को बानाकाचरला या नल्लामाला सागर से जोड़ने के लिए किए जा रहे विस्तार कार्यों को रोकने की मांग की है।
याचिका में कई कानूनी और प्रक्रियात्मक चिंताओं का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से पोलावरम प्रोजेक्ट अथॉरिटी को इन कार्यों को तुरंत रोकने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पोलावरम प्रोजेक्ट को मूल रूप से स्वीकृत डिज़ाइन के अनुसार ही लागू किया जाना चाहिए और किसी भी विस्तार कार्य का करना कानूनी रूप से गलत है।
याचिका में तेलंगाना की आपत्तियों को ध्यान में रखे बिना केंद्र सरकार द्वारा नल्लामाला सागर प्रोजेक्ट की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट की जांच पर भी आपत्ति जताई गई है। राज्य ने इस संबंध में केंद्रीय जल आयोग, जल शक्ति मंत्रालय और गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की है।
इसमें आगे बताया गया है कि आंध्र प्रदेश सरकार केंद्रीय जल आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रही है और इन कार्यों को तुरंत रोकने की मांग की गई है।
याचिका में पर्यावरण मंजूरी देने से इनकार करने और यह सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि आंध्र प्रदेश द्वारा प्रस्तावित विस्तार परियोजनाओं के लिए केंद्र द्वारा कोई वित्तीय सहायता न दी जाए।