13 अक्टूबर 2026
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तिरुपति विश्व स्तरीय आध्यात्मिक केंद्र बनेगा: चंद्रबाबू नायडू ने ₹3,222 करोड़ की परियोजनाओं का किया शुभारंभ

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तिरुपति विश्व स्तरीय आध्यात्मिक केंद्र बनेगा: चंद्रबाबू नायडू ने ₹3,222 करोड़ की परियोजनाओं का किया शुभारंभ

सारांश

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति को विश्व स्तरीय आध्यात्मिक केंद्र बनाने की दिशा में ₹3,222 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ किया। अलीपिरी में ₹2,750 करोड़ की एकीकृत तीर्थ बस्ती से प्रतिदिन 15,000 श्रद्धालुओं को आवास और 6,000 को निःशुल्क भोजन मिलेगा — यह धार्मिक पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था से जोड़ने का सुनियोजित दाँव है।

मुख्य बातें

CM चंद्रबाबू नायडू ने 12 अक्टूबर 2026 को ₹3,222 करोड़ की तिरुपति विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन और आधारशिला रखी।
₹2,750 करोड़ की एकीकृत तीर्थ बस्ती अलीपिरी में विकसित होगी, जिसमें 2,700 कमरे और प्रतिदिन 15,000 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था होगी।
₹160 करोड़ के अन्नप्रसाद केंद्र में एक साथ 6,000 श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन मिलेगा।
₹311 करोड़ की लागत से 4,500 वाहनों की क्षमता वाला बहुस्तरीय पार्किंग परिसर बनेगा।
₹242 करोड़ की लागत से 20 किलोमीटर की नौ सड़कें विकसित होंगी, जिससे NH 140 और NH 71 के बीच संपर्क सुधरेगा।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि तिरुपति को एक विश्व स्तरीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत उन्होंने अमरावती स्थित सचिवालय से तिरुपति शहरी विकास प्राधिकरण (TUDA) और तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की कुल ₹3,222 करोड़ की विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन और आधारशिला रखी।

एकीकृत तीर्थ बस्ती: ₹2,750 करोड़ की बड़ी परियोजना

इस पहल का सबसे बड़ा घटक ₹2,750 करोड़ की अनुमानित लागत से बनने वाली एकीकृत तीर्थ बस्ती है, जो तिरुपति के अलीपिरी में एसवी जूलॉजिकल पार्क रोड के निकट विकसित की जाएगी। यह परियोजना भारत और विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई है।

इस बस्ती में आवास, अन्नदान (निःशुल्क भोजन), विश्राम सुविधाएँ, परिवहन, पार्किंग, चिकित्सा सेवाएँ और डिजिटल सूचना केंद्र — सभी एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब तिरुमाला में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के कारण आधारभूत संरचना पर भारी दबाव बना रहता है।

आवास, भोजन और परिवहन: मुख्य घटनाक्रम

₹1,332 करोड़ की लागत से चार ब्लॉकों में आवास सुविधाएँ विकसित की जाएंगी। प्रत्येक ब्लॉक में दस मंजिलें होंगी और कुल मिलाकर 2,700 कमरे बनाए जाएंगे, जिनमें प्रतिदिन लगभग 15,000 श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा रहेगी। इस परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य तिरुमाला के शिखर पर आवास के बढ़ते दबाव को कम करना है।

मुख्यमंत्री नायडू ने अन्नदान को सेवा का सबसे पवित्र रूप बताते हुए कहा कि भूखे श्रद्धालुओं को भोजन कराना और थके हुए तीर्थयात्रियों को आश्रय देना सर्वशक्तिमान की सेवा के समतुल्य है। ₹160 करोड़ की लागत से निर्मित अन्नप्रसाद केंद्र में एक समय में 6,000 श्रद्धालुओं को भोजन कराने की क्षमता होगी।

पार्किंग की समस्या के समाधान के लिए ₹311 करोड़ की लागत से 4,500 वाहनों की क्षमता वाला एक बहुस्तरीय पार्किंग परिसर बनाया जाएगा। इसके साथ ही ₹90 करोड़ की लागत से 30 बसों वाला एकीकृत परिवहन टर्मिनल भी स्थापित किया जाएगा।

सड़क अवसंरचना: 20 किलोमीटर नेटवर्क का विकास

मास्टर प्लान के तहत तिरुपति की बढ़ती जनसंख्या और वाहन आवाजाही को ध्यान में रखते हुए ₹242 करोड़ की अनुमानित लागत से नौ सड़कों का विकास किया जाएगा। इस परियोजना में कुल लगभग 20 किलोमीटर की सड़कें शामिल हैं — 16.50 किलोमीटर का निर्माण ₹127 करोड़ से और TTD द्वारा 3.60 किलोमीटर का निर्माण ₹115 करोड़ की लागत से किया जाएगा।

गौरतलब है कि इन सड़कों से राष्ट्रीय राजमार्ग 140 और 71 के बीच संपर्क मजबूत होगा और तिरुचनूर स्थित पद्मावती अम्मावरी मंदिर के दर्शनार्थियों के लिए परिवहन व्यवस्था बेहतर बनेगी।

आम जनता और तीर्थयात्रियों पर असर

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम देश के सबसे अधिक देखे जाने वाले धार्मिक स्थलों में से एक है, जहाँ प्रतिदिन औसतन 50,000 से अधिक श्रद्धालु आते हैं। वर्तमान में तीर्थयात्रियों को दर्शन कतारों, आवास की कमी और पार्किंग की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। प्रस्तावित बुनियादी ढाँचा इन तीनों मोर्चों पर राहत देने का वादा करता है।

यह पहल आंध्र प्रदेश की नायडू सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत धार्मिक पर्यटन को राज्य के आर्थिक विकास के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित करने की कोशिश है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद तिरुपति का कायाकल्प एक वैश्विक आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

222 करोड़ का यह निवेश धार्मिक पर्यटन को संरचित अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन असली प्रश्न क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता का है। आंध्र प्रदेश में बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के अतीत में समयसीमा से चूकने के कई उदाहरण हैं। तिरुमाला में प्रतिदिन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह निवेश ज़रूरी भी है, लेकिन पर्यावरणीय और यातायात प्रबंधन पर दीर्घकालिक रणनीति अभी स्पष्ट नहीं है। बिना पारदर्शी समयसीमा और जवाबदेही ढाँचे के, ये घोषणाएँ अगले चुनाव तक 'कार्य प्रगति पर है' बोर्ड तक सिमट सकती हैं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरुपति को विश्व स्तरीय आध्यात्मिक केंद्र बनाने की योजना क्या है?
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 12 अक्टूबर 2026 को ₹3,222 करोड़ की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया, जिनमें TUDA और TTD की विभिन्न योजनाएँ शामिल हैं। इसका लक्ष्य तिरुपति को आवास, भोजन, परिवहन और डिजिटल सुविधाओं से लैस एक वैश्विक तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करना है।
एकीकृत तीर्थ बस्ती तिरुपति में कहाँ और कैसे बनेगी?
एकीकृत तीर्थ बस्ती तिरुपति के अलीपिरी में एसवी जूलॉजिकल पार्क रोड के निकट ₹2,750 करोड़ की लागत से विकसित की जाएगी। इसमें 2,700 कमरों वाले चार ब्लॉक होंगे, जिनमें प्रतिदिन लगभग 15,000 श्रद्धालु ठहर सकेंगे।
तिरुपति तीर्थ बस्ती में श्रद्धालुओं को कौन-कौन सी सुविधाएँ मिलेंगी?
इस बस्ती में आवास, निःशुल्क भोजन (अन्नदान), विश्राम, परिवहन, पार्किंग, चिकित्सा सेवाएँ और डिजिटल सूचना केंद्र एक ही परिसर में उपलब्ध होंगे। ₹160 करोड़ के अन्नप्रसाद केंद्र में एक साथ 6,000 श्रद्धालुओं को भोजन कराया जा सकेगा।
तिरुपति में सड़क विकास की योजना क्या है?
मास्टर प्लान के तहत ₹242 करोड़ की लागत से 9 सड़कों और लगभग 20 किलोमीटर के नेटवर्क का निर्माण होगा। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग 140 और 71 के बीच संपर्क बेहतर होगा और तिरुचनूर स्थित पद्मावती अम्मावरी मंदिर तक पहुँचना आसान होगा।
तिरुपति के इस विकास से किसे सबसे अधिक फायदा होगा?
इस विकास का सीधा लाभ भारत और विदेश से तिरुमाला और तिरुपति आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों को मिलेगा। इससे तिरुमाला शिखर पर आवास का दबाव कम होगा और तिरुपति शहर में ही श्रद्धालुओं को बेहतर और किफायती सुविधाएँ मिलेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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