ट्रंप का बयान: 'फ्रांस जल रहा है, नफरत भरे दिलों वाले लोग जिम्मेदार'; वेंस ने प्रवासी नीतियों पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को फ्रांस में हुई व्यापक हिंसा और प्रदर्शनों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए 'दूसरे देशों से आए और दिलों में नफरत भरे लोगों' को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा: 'फ्रांस जल रहा है! बिल्कुल अलग दुनिया से आए लोग जिनके दिलों में नफरत भरी है उनकी वजह से कभी महान रहा देश पूरी तरह बर्बाद हो गया है।' यह बयान ऐसे समय आया है जब फ्रांस के कई प्रमुख शहरों में शनिवार को हिंसक झड़पें हुईं और देशभर में करीब 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
ट्रंप की अपील और चेतावनी
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में फ्रांस सरकार को सीधी सलाह देते हुए लिखा, 'इससे पहले की बहुत देर हो जाए, अपनी सीमाएं बंद करें और इसका नियंत्रण अपने हाथों में लें!' यह बयान अमेरिकी प्रशासन की आव्रजन-विरोधी नीतियों के व्यापक रुख के अनुरूप है। गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन पहले भी यूरोपीय देशों की प्रवासी नीतियों की आलोचना करता रहा है।
उपराष्ट्रपति वेंस का एक्स पर बयान
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए 'पश्चिमी उदारवादी नीतियों' पर निशाना साधा। वेंस ने कहा, 'पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर फ्रांस और दूसरे देशों में 'तीसरी दुनिया' को अपने यहां जगह दी। इन नीतियों के संभावित परिणामों को लेकर पहले भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन संबंधित नेताओं ने उन पर ध्यान नहीं दिया।' वेंस ने फ्रांस को एक 'खूबसूरत देश' और वहां के लोगों को 'अद्भुत' बताते हुए उम्मीद जताई कि देश अपने ऐतिहासिक स्थलों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगा।
वेंस ने इस मुद्दे को अमेरिकी राजनीति से भी जोड़ा। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से फ्रांस की घटनाओं पर ध्यान देने की अपील करते हुए आरोप लगाया कि 'अमेरिकी कांग्रेस के डेमोक्रेटिक सांसद भी अपने देश को इसी दिशा में ले जाना चाहते हैं।'
फ्रांस में हिंसा का मुख्य घटनाक्रम
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को फ्रांस के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। हिंसक गुटों ने सरकारी इमारतों को निशाना बनाया, दुकानों में लूटपाट की और पुलिस वाहनों पर हमले किए। लिमोज शहर के 143 साल पुराने ऐतिहासिक सिटी हॉल को आग के हवाले कर दिया गया। मार्सेई में प्रदर्शनकारियों ने सिटी हॉल में घुसकर इमारत पर नारे लिख दिए, जबकि लियोन में पर्यटन कार्यालय को भी आग लगा दी गई।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, अकेले पेरिस में 855 लोगों को गिरफ्तार किया गया और देशभर में कुल गिरफ्तारियों की संख्या करीब 1,800 रही। अधिकारियों ने बताया कि पेरिस में प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की हृदयाघात से मौत हो गई। देशभर में करीब 5 लाख लोगों ने इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया, जिनमें अधिकांश शांतिपूर्ण रहे।
प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि
इन प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले महीने कामकाजी वर्ग के इलाकों में स्कूलों की खराब स्थिति और शिक्षकों की कमी के खिलाफ छात्र आंदोलन से हुई थी। धीरे-धीरे यह आंदोलन महंगाई, असमानता, सार्वजनिक खर्च में कटौती और सरकारी सेवाओं की गिरती गुणवत्ता के खिलाफ व्यापक विरोध में तब्दील हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप के कई देश आर्थिक दबाव और सामाजिक असंतोष के दौर से गुजर रहे हैं।
आगे क्या
फ्रांस सरकार ने अभी तक ट्रंप और वेंस के बयानों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी नेताओं के इस हस्तक्षेप से यूरोप-अमेरिका संबंधों पर असर पड़ सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फ्रांस की सरकार इन प्रदर्शनों की मूल माँगों — शिक्षा, महंगाई और असमानता — का समाधान किस प्रकार करती है।