ट्रंप ने यूरोपीय अशांति के लिए इमिग्रेशन को ठहराया जिम्मेदार, फ्रांस इटली को सीमाएँ कसने की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 अक्टूबर 2026 को यूरोप के कई हिस्सों में फैली अशांति के लिए प्रवासन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया और फ्रांस तथा इटली को चेतावनी दी कि यदि उन्होंने सीमा नियंत्रण नहीं कसा तो सामाजिक अस्थिरता और गहरी होगी। हालाँकि, फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि हाल की हिंसा की जड़ें आर्थिक असंतोष और कट्टरपंथी तत्वों में हैं, न कि प्रवासन में।
ट्रंप का बयान और मैक्रों को दी गई 'चेतावनी'
कंसास में एक चुनावी रैली के लिए रवाना होने से पहले ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को कई बार चेतावनी दी थी। ट्रंप के अनुसार, "मैंने इमैनुएल से कहा था कि आपको अपनी सीमाएँ बंद कर देनी चाहिए।" उन्होंने दावा किया कि यूरोपीय सरकारें बड़े पैमाने पर प्रवासन स्वीकार कर अब उसके परिणाम भुगत रही हैं।
सोमवार को सोशल मीडिया पर एक अलग पोस्ट में ट्रंप ने फ्रांस से अपनी सीमाएँ बंद करने की अपील दोहराई और आरोप लगाया कि फ्रांस की आव्रजन नीतियों ने मौजूदा उथल पुथल को बढ़ावा दिया है। उन्होंने इटली का भी उल्लेख करते हुए दोनों देशों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को इमिग्रेशन से जोड़ा।
फ्रांस में अशांति की असली पृष्ठभूमि
फ्रांस में पिछले कई हफ्तों से स्कूलों की बिगड़ती स्थिति, बढ़ती महंगाई और घटती क्रय क्षमता को लेकर प्रदर्शन जारी हैं। शुरुआत में ये आंदोलन छात्रों और शिक्षा संगठनों तक सीमित थे, लेकिन बाद में ट्रेड यूनियन और अन्य समूह भी इनमें शामिल हो गए।
सप्ताहांत में कई शहरों में हिंसा भड़क उठी — वाहनों में आगजनी, दुकानों और सार्वजनिक इमारतों पर हमले हुए। ऐतिहासिक शहर लिमोज के टाउन हॉल को रिपोर्ट के अनुसार नकाबपोश समूहों ने गंभीर नुकसान पहुँचाया। फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, सप्ताहांत में अशांति के दौरान 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।
फ्रांस सरकार की प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति मैक्रों ने हिंसक घटनाओं की कड़ी निंदा की और कहा कि हिंसा करने वालों तथा अपनी वास्तविक समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों में स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने भी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ क्षेत्रों में सीमित प्रतिबंध लगाए ताकि दंगों और लूटपाट पर काबू पाया जा सके।
गौरतलब है कि फ्रांस सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं माना है कि इन प्रदर्शनों के पीछे आव्रजन जिम्मेदार था या कि प्रवासी हिंसा के मुख्य सूत्रधार थे। फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, हिंसा को भड़काने में कट्टरपंथी समूहों की भूमिका अधिक थी।
अमेरिकी घरेलू राजनीति का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले इमिग्रेशन अमेरिका की राजनीति का एक केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि यूरोपीय देशों ने बड़ी संख्या में प्रवासियों को स्वीकार किया, लेकिन इससे राष्ट्रीय पहचान, सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक एकता पर पड़ने वाले प्रभावों की अनदेखी की।
आलोचकों का कहना है कि ट्रंप यूरोप की जटिल सामाजिक आर्थिक समस्याओं को इमिग्रेशन के एकल लेंस से देखकर अपने घरेलू चुनावी आख्यान को मजबूत कर रहे हैं। ट्रंप की सरकार लगातार अपनी कड़ी इमिग्रेशन नीतियों को यूरोपीय मॉडल के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
आगे क्या होगा
फ्रांस में प्रदर्शनों की गति और सरकार की प्रतिक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय नज़रें टिकी हुई हैं। मैक्रों सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह आर्थिक असंतोष को संबोधित करते हुए सार्वजनिक व्यवस्था भी बनाए रखे। ट्रंप की टिप्पणियाँ यूरोप अमेरिका संबंधों में एक नई खींचतान जोड़ सकती हैं, खासकर तब जब दोनों पक्षों के नीति निर्माता इमिग्रेशन के कारणों और परिणामों पर खुलकर असहमत हों।