क्या ट्रंप ने दावोस में यूरोप की दिशा पर चिंता जताई?
सारांश
Key Takeaways
- ट्रंप ने यूरोप की नीतियों पर चिंता जताई।
- उन्होंने अमेरिका के आर्थिक चमत्कार की प्रशंसा की।
- यूरोप को अमेरिका की तरह आर्थिक सुधार की जरूरत है।
- बिना रोक-टोक के प्रवासन पर उनके विचार नकारात्मक रहे।
- टैरिफ नीति के जरिए अमेरिका ने घाटा कम किया है।
दावोस, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में अपने प्रयासों की सराहना करते हुए बंटे हुए यूरोप पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत सधे अंदाज में की। बोले, "यहां दूसरी बार इतने सारे दोस्तों और कुछ दुश्मनों के बीच आकर अच्छा लग रहा है।"
ट्रंप ने कहा कि यूरोप की इमिग्रेशन नीति और आर्थिक नीतियों के परिणाम विनाशकारी रहे हैं, जबकि इसके विपरीत अमेरिका में ‘आर्थिक चमत्कार’ देखने को मिल रहा है।
उन्होंने कहा, “मुझे यूरोप से प्यार है और मैं चाहता हूं कि यूरोप तरक्की करे, लेकिन वह सही दिशा में नहीं जा रहा है। लगातार बढ़ता सरकारी खर्च, अनियंत्रित प्रवासन और अंतहीन विदेशी आयात इसके लिए जिम्मेदार हैं।"
ट्रंप ने कहा कि यूरोप को आर्थिक मामलों में अमेरिका के समान बनना चाहिए और वही करना चाहिए जो अमेरिका कर रहा है।
इसके साथ ही ट्रंप ने बिना रोक-टोक के बड़े पैमाने पर माइग्रेशन और यूरोप के ग्रीन एनर्जी फोकस पर हमला किया। उन्होंने दावा किया कि यूरोप में कुछ जगहें "सच में पहचानने लायक नहीं रही हैं।"
उन्होंने कहा कि दोस्त अलग-अलग जगहों से वापस आते हैं और नकारात्मक तरीके से कहते हैं कि 'मैं इसे पहचान नहीं पा रहा हूं।' ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वह चाहते हैं कि यूरोप अच्छा करे, लेकिन उनका दावा है कि यूरोप सही दिशा में नहीं जा रहा है।
अमेरिका की आर्थिक स्थिति की तारीफ करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि देश ने महंगाई को नियंत्रित किया है और बड़ी आर्थिक कामयाबी हासिल की है। उन्होंने दावा किया कि उनके नेतृत्व में यूएस की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।
ट्रंप ने कहा कि उनकी टैरिफ नीति के कारण अमेरिका अपने घाटे को काफी हद तक कम करने में सफल रहा है। उन्होंने जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ किए गए समझौतों का जिक्र किया। कहा, "ये समझौते आर्थिक विकास को बढ़ाते हैं और शेयर बाजारों में तेजी लाते हैं। न सिर्फ अमेरिका में, बल्कि लगभग हर उस देश में जो हमारे साथ समझौता करने आता है।"