क्या यूजीसी की वजह से एक जाति के लोग दूसरी के खिलाफ खड़े होंगे? स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान
सारांश
Key Takeaways
- यूजीसी के नए नियमों को लेकर साधु-संतों का विरोध जारी है।
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे हिंदू धर्म के लिए खतरा बताया।
- सरकार से मांग की गई है कि ये नियम तुरंत वापस लिए जाएं।
प्रयागराज, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। यूजीसी के नए नियमों पर उठे विवाद का अंत होता नजर नहीं आ रहा है। नेताओं के बाद अब साधु-संतों ने भी इस पर आपत्ति जताई है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में साधु-संतों ने इस नियम को वापस लेने की गुहार लगाई है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "किसी भी जाति को जन्म से अन्यायपूर्ण नहीं माना जा सकता। हर जाति में अच्छे और बुरे लोग होते हैं। कोई व्यक्ति अन्याय कर सकता है, लेकिन कोई भी जाति पूरी तरह से न्यायप्रिय या अन्यायपूर्ण नहीं होती। यूजीसी पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह एक जाति को दूसरी जाति के खिलाफ खड़ा कर रहा है। इस गलत निर्णय से हिंदू धर्म को गंभीर नुकसान हो सकता है। इसलिए इस कानून को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।"
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा, "आप सबको पता है कि यूजीसी क्या है। यह एक जाति को दूसरी जाति से लड़वाने की योजना है, जिससे हिंदू समाज का विनाश हो जाए। यह किस प्रकार का शासन है? ऐसा कानून क्यों लाया गया है? एक जाति को दूसरी के खिलाफ भड़काने के पीछे क्या तर्क है?"
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, "उनके दिल में कितना दुख है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने इतना बड़ा निर्णय लिया। उनका इस्तीफा इतिहास में दर्ज होगा और यह दिखाएगा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सनातन धर्म को मानने वालों के प्रति किस प्रकार का व्यवहार किया है।"
यूजीसी उच्च शिक्षा विनियम विवाद पर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राष्ट्र प्रेस से कहा, "हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा है, जिसमें नए यूजीसी रेगुलेशन को वापस लेने की अपील की है। हमने कहा है कि या तो नए नियम वापस लिए जाएं या मुझे इच्छामृत्यु की इजाजत दी जाए। नए रेगुलेशन के कारण जनरल कैटेगरी की 35 प्रतिशत लड़कियों को शोषण की स्थिति में धकेला जा सकता है।"
उन्होंने कहा कि यूजीसी के कारण देश में अपराध बढ़ सकता है और लोग इसका गलत फायदा उठा सकते हैं, इसलिए सरकार को इसे जल्दी वापस लेना चाहिए, ताकि जनरल कैटेगरी के बच्चे सही तरीके से शिक्षा प्राप्त कर सकें।