उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा की सफलता: हादसों में 7.43 प्रतिशत की कमी और ‘जीरो फैटेलिटी’ अभियान से 450 से अधिक जिंदगियां बचीं
सारांश
Key Takeaways
- ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ योजना के तहत सड़क दुर्घटनाओं में 7.43 प्रतिशत की कमी।
- 450 से अधिक जिंदगियों का सुरक्षित होना।
- 487 थानों में 573 ‘क्रिटिकल कॉरिडोर’ टीमें गठित।
- 56 प्रशासनिक इकाइयां ग्रीन जोन में पहुँच चुकी हैं।
- आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर निगरानी बढ़ाई गई।
लखनऊ, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्णा ने जानकारी दी है कि सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए शुरू की गई ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ (जेएफडी) योजना के फलस्वरूप सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। इस पहल की वजह से प्रदेश में हादसों, मृतकों और घायलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।
पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीजीपी राजीव कृष्णा ने बताया कि वर्ष 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में 7.43 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि इसी अवधि में मृतकों की संख्या में 11.55 प्रतिशत और घायलों में 8.05 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुधार ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ योजना के माध्यम से ही संभव हुआ है, जिसे जनवरी 2026 से प्रदेश के सभी 7 पुलिस कमिश्नरेट और 68 जिलों के 487 दुर्घटना संभावित थानों में लागू किया गया है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की 88 प्रशासनिक इकाइयों में से 56 इकाइयां (63.6 प्रतिशत) दुर्घटनाओं के लिहाज से ग्रीन जोन में पहुँच चुकी हैं, जबकि 66 इकाइयां (75 प्रतिशत) मृतकों की संख्या में कमी के साथ ग्रीन जोन में शामिल हो गई हैं।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 487 थानों में 573 ‘क्रिटिकल कॉरिडोर’ टीमें गठित की गईं, जिन्हें स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर और डेसीबल मीटर जैसे आधुनिक उपकरण प्रदान किए गए हैं। इन टीमों ने संवेदनशील मार्गों पर निगरानी बढ़ाकर हादसों पर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डीजीपी ने आगे बताया कि वर्ष 2026 की पहली तिमाही में इस अभियान के द्वारा 450 से अधिक लोगों की जान बचाई गई है, जो कि प्रतिदिन औसतन लगभग पांच जिंदगियों को सुरक्षित करने के बराबर है। इसके साथ ही, रोजाना होने वाले हादसों में भी 5-6 की कमी देखी गई है। प्रदेश के 18 परिक्षेत्रों में से 13 और 8 जोन में से 6 जोन में दुर्घटनाओं और मृतकों की संख्या में कमी इस अभियान की सफलता को दर्शाती है।
उन्होंने बताया कि तीन या उससे अधिक मौतों वाली दुर्घटनाओं को ‘स्पेशल रिपोर्ट’ श्रेणी में रखा गया है, ताकि उनकी गहन जांच की जा सके और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। डीजीपी ने एक अन्य सवाल का उत्तर देते हुए कहा कि हाल के संवेदनशील मामलों में जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और हर पहलू की गहन पड़ताल की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।