क्या यूपी में सेमीकंडक्टर निवेश को मिला मेगा प्रोत्साहन?
सारांश
Key Takeaways
- सेमीकंडक्टर नीति के तहत 3,000 करोड़ रुपए या उससे अधिक के निवेश पर प्रोत्साहन।
- प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसरों का सृजन।
- निवेशकों को ब्याज सब्सिडी और कर्मचारी लागत प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं।
- उत्तर प्रदेश को सेमीकंडक्टर उद्योग का केंद्र बनाने की दिशा में कदम।
- नए बस स्टेशन और अस्पताल जैसे अन्य विकासात्मक परियोजनाएं।
लखनऊ, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के औद्योगिक विकास से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है। राज्य सरकार द्वारा जनवरी 2024 में प्रस्तुत की गई सेमीकंडक्टर नीति के तहत, 3,000 करोड़ रुपए या उससे अधिक के निवेश पर विशेष प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया है।
प्रदेश सरकार में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कुल 14 प्रस्तावों में से 13 को स्वीकृति दी गई। सुरेश खन्ना ने बैठक के बाद कहा कि अमेरिका, यूरोप, जापान और ताइवान जैसे देशों में सेमीकंडक्टर निर्माण बड़े पैमाने पर हो रहा है। इसी क्रम में भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश को इस उभरते उद्योग का केंद्र बनाने के लिए योगी सरकार ने केस-टू-केस आधार पर प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है।
इस नीति के तहत सेमीकंडक्टर कंपनियों को ब्याज सब्सिडी, कर्मचारी लागत प्रतिपूर्ति, 10 वर्षों के लिए नेट एसजीएसटी में छूट, यूपी के निवासियों के लिए 100 प्रतिशत ईपीएफ प्रतिपूर्ति (अधिकतम 2,000 रुपए प्रतिमाह), जल मूल्य में छूट और 10 वर्षों तक प्रति यूनिट 2 रुपए बिजली बिल में छूट प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस नीति का मुख्य लक्ष्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसरों का सृजन करना है। कैबिनेट बैठक में टनकपुर रोड पर एक नवीनतम बस स्टेशन की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है। यह बस स्टेशन राजस्व विभाग की 1.317 हेक्टेयर (लगभग 7,000 वर्गमीटर) भूमि पर बनेगा, जिसे राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को 30 वर्षों की लीज पर देने का निर्णय लिया है, जिसे 90 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा। नए बस स्टेशन के निर्माण से उत्तराखंड और नेपाल जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि बस स्टेशन का निर्माण कार्य दो वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, कैबिनेट ने वाराणसी में 500 शैय्या वाला मल्टी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाने को भी मंजूरी दी है। यह अस्पताल 315 करोड़ 48 लाख रुपए की लागत से बनेगा और इसका निर्माण चार वर्षों में पूरा होगा। इस परियोजना में 60 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी, जिससे पूर्वांचल के मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
कैबिनेट ने खेल विभाग में क्षेत्रीय अधिकारी के रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया में संशोधन को भी मंजूरी दी। विभाग में कुल 18 पद स्वीकृत हैं। अब दो-तिहाई (12 पद) पदोन्नति से और एक-तिहाई (6 पद) अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों से भरे जाएंगे। इससे अनुभवी अधिकारियों और उत्कृष्ट खिलाड़ियों दोनों को अवसर मिलेगा।
कैबिनेट ने 37वीं वाहिनी पीएसी, कानपुर के पुराने आवासीय भवनों को ध्वस्त करने की अनुमति भी दी है। ध्वस्तीकरण के बाद वहां टाइप-वन स्पेशल के 108 नए आवास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही, नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, गांधीनगर, गुजरात के वाराणसी में ऑफ-कैंपस की स्थापना के लिए 50 एकड़ भूमि मुक्त में उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। यह भूमि तहसील राजा तालाब, जनपद वाराणसी में स्थित है, जिसे विश्वविद्यालय को 99 वर्षों की लीज पर दी जाएगी। इस कैंपस के खुलने से फॉरेंसिक साइंस, साइबर क्राइम और आपराधिक जांच के क्षेत्र में प्रदेश को बड़ी शैक्षणिक और तकनीकी मजबूती मिलेगी।