बागलकोट हिंसा पर बी. श्रीरामुलु का अमित शाह को पत्र, कर्नाटक की कानून व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

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बागलकोट हिंसा पर बी. श्रीरामुलु का अमित शाह को पत्र, कर्नाटक की कानून व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

सारांश

बागलकोट में हालिया हिंसा के बाद, पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु ने अमित शाह को पत्र लिखकर कर्नाटक की कानून-व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने एनआईए जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है।

Key Takeaways

  • बी. श्रीरामुलु ने एनआईए जांच की मांग की।
  • कर्नाटक की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
  • हिंदू युवाओं पर हमले की घटनाओं में वृद्धि।
  • संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती।
  • राज्य में इवेंट-रूट मैनेजमेंट की आवश्यकता।

बागलकोट, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु ने हाल में हुई बागलकोट हिंसा के संदर्भ में एनआईए जांच की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा है, जिसमें कर्नाटक की कानून-व्यवस्था की समीक्षा करने का अनुरोध किया गया है।

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक जुलूसों और संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास बार-बार झगड़े हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, हाल की घटनाओं के संदर्भ में, हिंदू संगठनों से जुड़े युवाओं और कार्यकर्ताओं पर हमलों की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

उन्होंने पत्र में लिखा, "यह निवेदन किसी भी जांच को पूर्वाग्रहित करने के उद्देश्य से नहीं है। इसका लक्ष्य उन पैटर्न को उजागर करना है जिन्हें रोका जा सकता है, और राज्यों को आंतरिक गड़बड़ी से बचाने के लिए केंद्र के संवैधानिक कर्तव्यों के तहत मानक रोकथाम, जांच की निगरानी और प्रॉसिक्यूशन ट्रैकिंग का अनुरोध करना है।"

बागलकोट की घटना का जिक्र करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा, "20 फरवरी को बागलकोट के पुराने शहर में छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती शोभायात्रा के दौरान, जब यात्रा एक क्षेत्र से गुजर रही थी, तब पथराव की खबर आई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की और गिरफ्तारियां कीं। जिला प्रशासन ने पुराने बागलकोट में 28 फरवरी तक निषेधाज्ञा बढ़ा दी और चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती की। यह घटना इस बात का संकेत देती है कि इवेंट-रूट मैनेजमेंट, पहले से रोक लगाने और इंटेलिजेंस के आधार पर तनाव कम करने के लिए एक मानकीकरण की आवश्यकता है।"

उन्होंने हिंदू संगठनों से जुड़े युवाओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने और 'क्रॉस केस' की शिकायतों पर चिंता जताई। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया, "तनाव की घटनाओं के साथ-साथ विशेष रूप से हिंदू संगठनों और पीड़ितों के परिवारों के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि हिंदू संगठनों से जुड़े युवाओं को शारीरिक हमलों का निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें क्रॉस केस का सामना करना पड़ रहा है, भले ही वे पीड़ित होने का दावा करते हों।"

बी. श्रीरामुलु ने उदाहरण के तौर पर सितंबर 2024 में मांड्या में हुई हिंसा, मंगलुरु में सुहास शेट्टी की हत्या और कोप्पल में एक हिंदू युवक पर हमले की घटनाओं का जिक्र किया।

उन्होंने अनुरोध किया कि कर्नाटक गृह विभाग और डीजीपी के साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिव्यू मीटिंग बुलाई जाए, ताकि बार-बार होने वाली घटनाओं वाले जिलों, खुफिया तंत्र की विफलताओं और दंगा व लक्षित हत्या मामलों में अभियोजन का मूल्यांकन किया जा सके।

एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर परामर्श जारी किया जाए, जिसमें जुलूस अनुमति, मार्ग निर्धारण, समय-सीमा, और संवेदनशील स्थलों के निकट 'नो-गो' बफर क्षेत्र, संयुक्त शांति समिति की बैठक कार्यवाही और आयोजकों से लिखित आश्वासन के साथ-साथ प्रिवेंटिव सिक्योरिटी मैपिंग और समय-समय पर रिव्यू हो।

Point of View

पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु ने कर्नाटक की कानून व्यवस्था की कमजोरियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। यह मुद्दा न केवल राज्य की शांति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समुदायों के बीच विश्वास को पुनः स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

बागलकोट हिंसा के पीछे का कारण क्या है?
बागलकोट हिंसा का मुख्य कारण सार्वजनिक जुलूसों के दौरान तनाव और झगड़े की घटनाएं हैं।
बी. श्रीरामुलु ने अमित शाह को पत्र में क्या लिखा?
उन्होंने कर्नाटक की कानून-व्यवस्था की समीक्षा और एनआईए जांच की मांग की है।
कर्नाटक में कानून-व्यवस्था की स्थिति क्या है?
कर्नाटक की कानून-व्यवस्था में कई संवेदनशील मुद्दे हैं, जिनकी समीक्षा की आवश्यकता है।
अमित शाह का इस मामले पर क्या कहना है?
अभी तक अमित शाह का इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
हिंसा के बाद क्या कदम उठाए गए हैं?
जिला प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू की है और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती की है।
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