अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में एबीवीपी की कार्रवाई की मांग: अमित शाह को पत्र लिखा
सारांश
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बेंगलुरु, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में हुई तोड़फोड़ के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसए), उससे जुड़ी स्पार्क संस्था और अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। एबीवीपी का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
एबीवीपी के बेंगलुरु महानगर इकाई के सचिव अभिनंदन मिर्जी ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक परिसर, जो उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण के केंद्र होने चाहिए, वहां राष्ट्रविरोधी विचारधाराओं को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
एबीवीपी ने यह भी आरोप लगाया कि स्पार्क के तत्वावधान में आयोजित कुछ कार्यक्रमों में भारतीय सैनिकों को नकारात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया। कश्मीर को भारत से अलग करने से जुड़े नारे लगाए गए और सैन्य अभियानों की आलोचना की गई। यह आरोप लगाया गया कि ऐसी गतिविधियां चरमपंथी विचारधाराओं को बढ़ावा देती हैं और युवाओं को राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध भड़काने का प्रयास करती हैं।
एबीवीपी ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए विश्वविद्यालय परिसर में एआईएसए और उसके संबद्ध संगठन स्पार्क के संचालन पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी गतिविधियों में शामिल छात्रों और आयोजकों के खिलाफ जांच करने और उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया।
छात्र संगठन ने यह भी मांग की कि यदि अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है, तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाए।
उन्होंने कहा, "शैक्षणिक संस्थानों को अकादमिक उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।" अधिकारियों से अनुरोध किया गया कि वे सुनिश्चित करें कि परिसर ऐसी गतिविधियों का केंद्र न बनें जो राष्ट्रीय अखंडता को कमजोर कर सकें।
मंगलवार की शाम को सरजापुर स्थित अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में एबीवीपी के सदस्यों द्वारा एक छात्र समूह पर जम्मू-कश्मीर से संबंधित 'राष्ट्र-विरोधी' सेमिनार आयोजित करने का प्रयास करने का आरोप लगाने के बाद विरोध प्रदर्शन हुआ।
हालांकि, विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उसने इस प्रकार के किसी कार्यक्रम को अधिकृत नहीं किया था। उल्लेखनीय है कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं का एक समूह जबरदस्ती गेट खोलकर परिसर में घुस गया और विश्वविद्यालय के गेट के बाहर और परिसर के अंदर नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया।
एबीवीपी कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह विवाद कथित तौर पर स्पार्क नामक छात्र संगठन द्वारा २३ फरवरी १९९१ की कुनान पोशपोरा घटना की बरसी पर आयोजित एक कार्यक्रम से उपजा है।
एबीवीपी ने दावा किया कि प्रस्तावित सेमिनार भारतीय सेना के प्रति अपमानजनक था और अलगाववादी विचारधाराओं को बढ़ावा देता था। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग दिखाया गया।
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में हुए विवाद के संबंध में एबीवीपी सदस्यों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि सरकार शैक्षणिक कार्यक्रमों को बाधित करने या कानून को अपने हाथ में लेने के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं करेगी।
पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा विधायक सी.एन. अश्वथ नारायण ने कहा कि अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय एक प्रतिष्ठित संस्थान है, जिसने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और देश के शिक्षा क्षेत्र के विकास में इसकी भूमिका सराहनीय है। हालांकि, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) द्वारा प्रायोजित स्पार्क जैसे संगठनों को विश्वविद्यालयों में संचालित करने से रोकना चाहिए और भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।