25 जुलाई 2026
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मायावती का सपा पर हमला: 'कांशीराम जयंती का पीडीए दिवस महज राजनीतिक ड्रामा'

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मायावती का सपा पर हमला: 'कांशीराम जयंती का पीडीए दिवस महज राजनीतिक ड्रामा'

सारांश

लखनऊ में कांशीराम जयंती पर सपा द्वारा 'पीडीए दिवस' मनाने की घोषणा से सियासी हलचल तेज हो गई है। मायावती ने इसे राजनीतिक नाटक करार देते हुए सपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुख्य बातें

मायावती ने सपा की नीयत पर सवाल उठाए हैं।
'पीडीए दिवस' को राजनीतिक नाटक माना गया है।
कांशीराम के नाम पर हुए बदलाओं पर चिंता जताई गई है।
सपा और भाजपा के बीच संबंधों पर भी सवाल उठाए गए हैं।

लखनऊ, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा बीएसपी संस्थापक कांशीराम की जयंती पर ‘पीडीए दिवस’ मनाने का ऐलान करते ही राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सपा पर तीखा आरोप लगाते हुए उसे दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग और बहुजन समाज के खिलाफ करार दिया है।

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "बीएसपी के संस्थापक कांशीराम की जयंती पर ‘पीडीए दिवस’ मनाने का निर्णय केवल राजनीतिक नाटक है।" उन्होंने इसे उपेक्षित वर्गों के वोटों को हासिल करने के लिए एक दिखावा बताया।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से बीएसपी और बहुजन महापुरुषों के सम्मान के खिलाफ रहा है। सपा का अतीत दलितों और कमजोर वर्गों के साथ अन्याय और अत्याचार से भरा हुआ है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह सब किया जा रहा है। पहले सपा ने इन वर्गों को याद भी नहीं किया था।

उन्होंने 1993 के सपा-बसपा गठबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी दलितों पर अत्याचार रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। मायावती ने 2 जून 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय उनके ऊपर जानलेवा हमला हुआ, जो इतिहास में दर्ज है। उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे।

बसपा प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि कांशीराम के नाम पर बने जिलों और संस्थानों के नाम सपा सरकार ने बदल दिए हैं। कांशीराम नगर, संत रविदास नगर और लखनऊ में स्थापित उर्दू-फारसी-अरबी विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों के नाम बदले गए हैं, जो बहुजन समाज के सम्मान के खिलाफ है। सहारनपुर में कांशीराम के नाम पर बने अस्पताल का नाम भी बदलने का आरोप लगाया गया है।

मायावती ने सपा पर मुस्लिम विरोधी रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया और कहा कि सपा सरकारों के दौरान हुए दंगों से भारी जानमाल का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि सपा और भाजपा एक-दूसरे की राजनीति को बढ़ावा देती रही हैं, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ा है।

मायावती ने अपील की कि सपा को यह बताना चाहिए कि कांशीराम के निधन पर राजकीय शोक क्यों नहीं घोषित किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांशीराम जयंती पर 'पीडीए दिवस' मनाने का निर्णय किसने लिया?
यह निर्णय समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा लिया गया है।
मायावती ने सपा पर क्या आरोप लगाए?
मायावती ने सपा को दलित और बहुजन समाज विरोधी करार दिया है।
क्या सपा ने कांशीराम के नाम पर संस्थानों के नाम बदले हैं?
मायावती के अनुसार, सपा ने कांशीराम के नाम पर बने कई संस्थानों के नाम बदल दिए हैं।
कांशीराम के निधन पर राजकीय शोक क्यों नहीं घोषित किया गया?
मायावती ने सपा से इसी सवाल का जवाब मांगा है।
क्या सपा और भाजपा के बीच कोई संबंध है?
मायावती का आरोप है कि सपा और भाजपा एक-दूसरे की राजनीति को बढ़ावा देती रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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