यूपी के तीन मंत्रियों का सपा पर हमला: '2027 में जनता देगी जवाब, डबल इंजन सरकार बदल रही तस्वीर'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के तीन मंत्रियों — रजनी तिवारी, दयाशंकर सिंह और दानिश आजाद अंसारी — ने 17 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता सपा को करारा जवाब देगी। मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'डबल इंजन सरकार' की उपलब्धियों का हवाला देते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश विकास, कानून-व्यवस्था और किसान कल्याण के मोर्चे पर पहले से कहीं बेहतर स्थिति में है।
मंत्री रजनी तिवारी का बयान
यूपी सरकार में मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि डबल इंजन सरकार प्रदेश में बेहतरीन काम कर रही है और कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले से काफी सुधरी है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देश को तरक्की की राह पर आगे बढ़ा रही हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की भाजपा पर की गई टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए तिवारी ने कहा कि अखिलेश को अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए, भाजपा की चिंता उन्हें नहीं करनी।
दयाशंकर सिंह का कांग्रेस और सपा पर निशाना
मंत्री दयाशंकर सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे विदेश यात्राओं के दौरान ऐसे बयान देते हैं जिनसे देश की गरिमा को ठेस पहुँचती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश के भीतर और बाहर से भारत को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं, और विदेशी नागरिक भी कथित तौर पर विरोध-प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं। सिंह ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के ज़रिये किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है।
दानिश आजाद अंसारी का सपा पर आरोप
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने सपा पर 'राजनीतिक हताशा का शिकार' होने का आरोप लगाया। उन्होंने रक्षा मंत्री और लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह के सपा पर दिए गए बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि सपा प्रदेश को अराजकता की ओर ले जाना चाहती है। अंसारी ने कहा कि 2017 के बाद योगी सरकार ने यूपी की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी — जहाँ पहले माफिया राज और गुंडागर्दी की चर्चा होती थी, वहाँ अब विकास और कानून-व्यवस्था की बात होती है।
2027 चुनाव की पृष्ठभूमि
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अब डेढ़ साल से भी कम दूरी पर हैं और दोनों प्रमुख दल — भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (सपा) — जन-आधार मज़बूत करने की कोशिश में हैं। गौरतलब है कि 2022 में BJP ने 403 में से 255 सीटें जीती थीं, जबकि सपा ने 111 सीटें हासिल कर मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाई थी। इस बार सपा की ओर से पिछले महीनों में किसान मुद्दे, बेरोज़गारी और कानून-व्यवस्था पर लगातार हमले किए जा रहे हैं, जिसके जवाब में BJP मंत्रियों की यह आक्रामक प्रेस वार्ता एक सुनियोजित रणनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखी जा रही है।
आगे क्या
2027 के चुनाव नज़दीक आते-आते यूपी में BJP और सपा के बीच यह राजनीतिक वाकयुद्ध और तेज़ होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसान भुगतान, बेरोज़गारी और कानून-व्यवस्था ही इस चुनाव की धुरी बनेंगे। दोनों दल अपने-अपने आख्यान को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने की तैयारी में जुटे हैं।