UP चुनाव 2027: BJP मंत्रियों का सपा पर हमला — घोषणापत्र से पहले रिपोर्ट कार्ड दो
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सियासी तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीन वरिष्ठ मंत्रियों — जयवीर सिंह, दानिश आज़ाद अंसारी और दया शंकर सिंह — ने 21 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर एक साथ निशाना साधते हुए माँग की कि सपा घोषणापत्र जारी करने से पहले 2012-2017 के अपने शासनकाल का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखे। यह हमला तब आया है जब सपा-कांग्रेस गठबंधन सीट-बँटवारे और घोषणापत्र को अंतिम रूप देने में जुटा है।
जयवीर सिंह का दावा — तीसरी बार बड़े बहुमत का लक्ष्य
लखनऊ में मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा चुनावी मोड में रहती है, इसलिए तैयारियाँ पूरी हैं। उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों और 11 तारीख को होने वाले स्नातक व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों के बाद पार्टी का पूरा ध्यान विधानसभा चुनाव पर केंद्रित करने की बात कही।
सिंह ने दावा किया, 'हमारा लक्ष्य 2022 के मुकाबले और भी बड़े बहुमत के साथ तीसरी बार सरकार बनाना है। दोनों पक्षों को पता है कि हालात भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष में अनिश्चितता बनी हुई है और कोई ठोस विकल्प सामने नहीं है।
दानिश आज़ाद अंसारी — सपा के शासनकाल में 700 से अधिक दंगों का आरोप
मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने सपा के घोषणापत्र की तैयारी पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 2012-2017 के सपा शासनकाल में उत्तर प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि विकास के नाम पर क्या हुआ। उनके अनुसार सपा का रिपोर्ट कार्ड 'दंगे, भ्रष्टाचार, लूट-पाट, अपराध और युवाओं के सपनों को कुचले जाने की कहानी' बताएगा।
अंसारी ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में सत्ता में आने से लेकर सत्ता से बाहर होने तक 700 से अधिक दंगे हुए, जिनका सबसे अधिक नुकसान समाज के गरीब वर्गों को उठाना पड़ा। गौरतलब है कि ये आरोप सपा की ओर से अभी खंडित नहीं किए गए हैं।
उन्होंने कांग्रेस और सपा पर देश की एकता और अखंडता पर हमला करने का भी आरोप लगाया और कहा कि 2027 के चुनावों में जनता इसका जवाब देगी।
दया शंकर सिंह — कांग्रेस का UP में सफाया, सपा पर भय-आतंक का आरोप
बलिया में परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह ने सपा के घोषणापत्र पर कहा कि पार्टी पहले अपने कार्यकर्ताओं को लोगों को डराने-सताने से रोके। उन्होंने सपा शासन को 'भय, आतंक और अपराधियों के बोलबाले' का दौर बताया।
कांग्रेस की 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में एक तरह से 'सफाया' होती जा रही है और वह केवल दो सीटों पर सिमटकर रह गई है।
आम जनता और चुनावी समीकरण पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब सपा-कांग्रेस गठबंधन सीट-बँटवारे के अंतिम चरण में है और दोनों दल मिलकर BJP को चुनौती देने की कोशिश में हैं। BJP के इस आक्रामक प्रचार अभियान का उद्देश्य स्पष्ट रूप से विपक्ष की गठबंधन-कथा को कमज़ोर करना और 2022 की जीत के आधार पर जनता का भरोसा बनाए रखना है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, UP जैसे बड़े राज्य में सत्ता-विरोधी लहर और विपक्षी एकता दोनों चुनावी परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। 2027 के चुनाव से पहले दोनों पक्षों की रणनीति और तीखी होने की संभावना है।