क्या यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में ईडी ने कार्रवाई की?
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
- मुख्य आरोपी राजीव नयन मिश्रा है।
- यह मामला धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत चल रहा है।
नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023 के पेपर लीक मामले में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ईडी ने 14 जनवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के अंतर्गत 18 आरोपियों के खिलाफ एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट प्रस्तुत की।
इस मामले का मुख्य आरोपी और साजिशकर्ता राजीव नयन मिश्रा है। यह शिकायत लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत (पीएमएलए कोर्ट) में दायर की गई है।
ईडी ने इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर आरंभ की थी। यह एफआईआर 6 मार्च 2024 को मेरठ के कंकरखेड़ा थाने में दर्ज की गई थी। जांच के दौरान इस मामले से संबंधित कई अन्य एफआईआर भी सामने आई हैं, जिन्हें जांच में शामिल किया गया।
एफआईआर में आरोप है कि आरोपियों ने साजिश के माध्यम से उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023 और उत्तर प्रदेश समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा 2023 के प्रश्न पत्रों को लीक किया। लीक किए गए प्रश्न पत्र और उनके उत्तर उम्मीदवारों को पैसे के बदले प्रदान किए गए। उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र और उत्तर रटवाए गए। यह परीक्षाएं फरवरी 2024 में आयोजित हुई थीं।
जांच में यह भी सामने आया है कि यूपी आरओ/ एआरओ परीक्षा 2023 के पेपर लीक से प्राप्त धन का उपयोग यूपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा के पेपर लीक में किया गया था।
ईडी ने जांच के दौरान 1.02 करोड़ रुपए की संपत्ति को अपराध से अर्जित संपत्ति (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के रूप में चिन्हित किया है। इस संपत्ति को 6 अगस्त 2024 को अस्थायी रूप से जब्त किया गया था, जिसे बाद में नई दिल्ली स्थित पीएमएलए की निर्णायक प्राधिकरण ने मंजूरी दी।
इसके अलावा, जांच के दौरान रवि अत्री और सुभाष प्रकाश नाम के दो आरोपियों को 18 नवंबर 2024 को ईडी की हिरासत में लिया गया था। इससे पहले 10 जनवरी 2025 को सात आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की गई थी, जिस पर अदालत ने संज्ञान लिया है। यह मामला वर्तमान में अदालत में विचाराधीन है।