क्या दिसंबर 2025 में उत्तर प्रदेश के राजस्व में 1,074 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है?: वित्त मंत्री सुरेश खन्ना
सारांश
Key Takeaways
- दिसंबर 2025 में राजस्व में 1,074 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई।
- मुख्य मदों में जीएसटी, आबकारी और स्टांप शामिल हैं।
- राज्य सरकार की नीतियों से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है।
- विपक्ष विकास के आंकड़ों को नजरअंदाज कर रहा है।
- यह वृद्धि विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाएगी।
लखनऊ, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सोमवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य के राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि का खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दिसंबर में महत्वपूर्ण कर-करेत्तर मदों से कुल 18,679.38 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह राशि 17,605.32 करोड़ रुपए थी। इस प्रकार, दिसंबर 2025 में 1,074.06 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है, जो लगभग 6.1 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
वित्त मंत्री ने विभिन्न महत्वपूर्ण मदों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। इनमें दिसंबर 2025 में जीएसटी से 6,563.04 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जबकि दिसंबर 2024 में यह राशि 6,342.68 करोड़ रुपए थी।
वैट के अंतर्गत दिसंबर 2025 में 3,086.83 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जबकि पिछले वर्ष इसी माह में 3,105.91 करोड़ रुपए थे। यहाँ वैट में हल्की कमी देखी गई।
आबकारी में सबसे अधिक वृद्धि हुई, जहां दिसंबर 2025 में 4,682.84 करोड़ रुपए का संग्रह हुआ, जो पिछले वर्ष की 4,141.75 करोड़ रुपए की राशि की तुलना में 541.09 करोड़ रुपए की उल्लेखनीय वृद्धि है।
स्टांप एवं पंजीकरण क्षेत्र में दिसंबर 2025 में 2,995.59 करोड़ रुपए का संग्रह हुआ, पिछले वर्ष यह 2,784.96 करोड़ रुपए था। यहाँ 210.63 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई।
परिवहन मद में दिसंबर 2025 में 909.57 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जबकि पूर्व वर्ष में यह 805.84 करोड़ रुपए थे। इस मद में 103.73 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी देखी गई।
भू-तत्व एवं खनिकर्म में भी वृद्धि हुई, जहां दिसंबर 2025 में 441.51 करोड़ रुपए का संग्रह हुआ, जबकि दिसंबर 2024 में यह राशि 424.18 करोड़ रुपए थी।
सुरेश खन्ना ने कहा कि यह वृद्धि राज्य सरकार की कुशल नीतियों, पारदर्शी प्रशासन, डिजिटलीकरण और निवेशकों के प्रति अनुकूल माहौल का परिणाम है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, जिनमें ई-गवर्नेंस, जीएसटी सुधार और अवैध खनन पर रोक प्रमुख हैं।
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि यह वृद्धि राज्य की विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए एक मजबूत वित्तीय आधार प्रदान करेगी। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल विकास के आंकड़ों को नजरअंदाज कर केवल राजनीति कर रहे हैं, जबकि जनता सरकार की कार्यप्रणाली से संतुष्ट है।