क्या उत्तरकाशी में पुलिस अधीक्षक ने मंगसीर बग्वाल उत्सव के दौरान 'बेटी बग्वाल' का उद्घाटन किया?

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क्या उत्तरकाशी में पुलिस अधीक्षक ने मंगसीर बग्वाल उत्सव के दौरान 'बेटी बग्वाल' का उद्घाटन किया?

सारांश

उत्तरकाशी में मंगसीर बग्वाल उत्सव के तहत 'बेटी बग्वाल' का उद्घाटन हुआ, जिसमें पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने सांस्कृतिक महत्व को उजागर किया। यह कार्यक्रम उत्तराखंड की प्राचीन परंपराओं का प्रतीक है और महिलाओं की भागीदारी ने इसे और भी प्रेरणादायक बनाया।

मुख्य बातें

मंगसीर बग्वाल उत्सव उत्तराखंड की संस्कृति का प्रतीक है।
बेटी बग्वाल कार्यक्रम ने महिलाओं को सशक्त किया।
पारंपरिक कला और लोककथाएँ प्रस्तुत की गईं।
सांस्कृतिक उत्सव ने सामाजिक एकता को बढ़ावा दिया।
स्थानीय हस्तशिल्प और उत्पादों का प्रदर्शन किया गया।

उत्तरकाशी, २२ नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने शनिवार को शहर के रामलील मैदान में आयोजित मंगसीर बग्वाल उत्सव में 'बेटी बग्वाल' का औपचारिक प्रारंभ किया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्रा और उपजिलाधिकारी भटवाड़ी शालिनी नेगी भी उपस्थित रहीं।

उत्तरकाशी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने पारंपरिक मंगसीर बग्वाल उत्सव में भाग लिया और 'बेटी बग्वाल' कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस दौरान अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्रा और उपजिलाधिकारी भटवाड़ी शालिनी नेगी भी मौजूद थीं।

पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने जनसमूह को संबोधित करते हुए मंगसीर बग्वाल उत्सव के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह उत्सव उत्तराखंड की प्राचीन परंपराओं, लोककथाओं और सामुदायिक जीवन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि भेला, तांदी और रांसो जैसी पारंपरिक कलाओं का जीवंत प्रदर्शन देवभूमि की गहरी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है और सभी के लिए गौरव की बात है।

पुलिस अधीक्षक ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों, बर्तनों, स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्पों को प्रदर्शित करने वाले विभिन्न स्टॉलों का भी अवलोकन किया और सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति को बधाई दी। सभी को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक उत्सव सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं और समुदायों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने में मदद करते हैं।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मंगसीर बग्वाल पर्व उत्तराखंड की ऐतिहासिक एवं पौराणिक गाथाओं की धरोहर है। देवभूमि के गौरवपूर्ण इतिहास के इस लोकपर्व में भेलो, तांदी, रांसो आदि पारंपरिक संस्कृति की अद्भुत छटाएं देखने को मिलती हैं।

'बेटी बग्वाल' के उद्घाटन के अवसर पर, पुलिस अधीक्षक ने कार्यक्रम के तहत आयोजित खेलकूद और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली बालिकाओं और महिलाओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि उनकी उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इस उत्सव को और भी प्रेरणादायक बना दिया है।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और छात्राओं ने गढ़ फैशन के माध्यम से सशक्त संस्कृति और परंपरा की मंच पर छटा बिखेरी। इसके साथ ही विभिन्न लोक कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेटी बग्वाल क्या है?
बेटी बग्वाल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है जो उत्तराखंड की परंपराओं और महिलाओं के योगदान को मान्यता देता है।
मंगसीर बग्वाल उत्सव का महत्व क्या है?
यह उत्सव उत्तराखंड की प्राचीन परंपराओं और लोककथाओं का प्रतीक है, जो सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है।
राष्ट्र प्रेस
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