क्या विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक में महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए और शीतकालीन सत्र पर आपत्ति जताई?

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क्या विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक में महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए और शीतकालीन सत्र पर आपत्ति जताई?

सारांश

सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें दिल्ली में हुए ब्लास्ट से लेकर बेरोजगारी, महंगाई, और संघवाद शामिल हैं। क्या सरकार इन मुद्दों पर ध्यान देगी?

Key Takeaways

  • सर्वदलीय बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की गई।
  • विपक्ष ने बेरोजगारी और महंगाई पर चिंता जताई।
  • सरकार को संसद के सत्र को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी है।

नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। संसद के शीतकालीन सत्र से पहले नई दिल्ली में रविवार को सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विपक्षी नेताओं ने वोटर सूची में संशोधन, हाल ही में दिल्ली में हुए ब्लास्ट, बेरोजगारी, महंगाई, संघवाद, और राज्यों में कानून व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया।

सरकार ने दोनों सदनों में सुचारू रूप से कार्यवाही चलाने के लिए यह सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। सोमवार को संसद का शीतकालीन सत्र आरंभ होने से पहले यह बैठक हुई।

सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि विपक्ष उन आवश्यक मुद्दों पर एकमत है, जिन पर सत्र के दौरान चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, “हमने कई मुद्दों को उठाया है, जिनमें एसआईआर, दिल्ली ब्लास्ट, प्रदूषण, संघवाद और अन्य चिंताएं शामिल हैं। विपक्षी दल इस बात पर सहमत हैं कि इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। संसद का संचालन पूरी तरह से सरकार की जिम्मेदारी है, और यदि इसमें रुकावट आती है, तो यह उनकी जिम्मेदारी है। पावर का मतलब यह नहीं है कि आप सबको रौंद देंगे। हमें लगता है कि सरकार को जवाब देना चाहिए और विपक्ष का सम्मान किया जाना चाहिए।”

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के कहने पर अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे बीजेडी नेता सस्मित पात्रा ने कहा कि उनकी पार्टी ओडिशा के मुद्दों को उठाएगी।

उन्होंने कहा, “महंगाई और बेरोजगारी हमारे लिए बड़ी चिंताएं हैं। ओडिशा को स्पेशल कैटेगरी स्टेट का दर्जा मिलना चाहिए। ओडिशा में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। हाल ही में हुए नुआपाड़ा उपचुनावों में हमने चुनावी गड़बड़ियां देखीं।”

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर संसद सत्र को छोटा करने और इसे शुरू करने में देरी करके संसद के नियमों को कमजोर करने का आरोप लगाया।

सर्वदलीय बैठक के बाद, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, "शीतकालीन सत्र आज मात्र 19 दिन का है, जिनमें से केवल 15 दिन चर्चा हो पाएंगे। यह शायद अब तक का सबसे छोटा शीतकालीन सत्र होगा। शीतकालीन सत्र की शुरुआत भी देरी से हुई है। ऐसा लगता है कि सरकार खुद संसद को डिरेल करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि हमने सुरक्षा के मुद्दे उठाए हैं, जिसमें सबसे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा आती है। दिल्ली में जो ब्लास्ट हुआ, वह हमारी कानूनी और गृह विभाग की विफलताओं का एक बड़ा प्रमाण है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा करना चाहती है। दूसरी बात लोकतंत्र की सुरक्षा पर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि हमारी तीसरी मांग स्वास्थ्य से संबंधित सुरक्षा थी, क्योंकि देश के हर कोने में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। चौथा मुद्दा हमारी आर्थिक सुरक्षा का था। पांचवां मुद्दा जो हमने उठाया, वह प्राकृतिक सुरक्षा था। जिस तरह से बाढ़, भूस्खलन और तूफान आ रहे हैं, उसकी कोई तैयारी नहीं है। हमने अपनी विदेश नीति का मुद्दा भी उठाया, जिसे हम देख रहे हैं कि भारत दूसरे देशों के अनुसार अपनी विदेश नीति बना रहा है।

Point of View

बल्कि यह दर्शाती है कि विपक्ष एकजुटता के साथ महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी आवाज उठाने के लिए तत्पर है। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इन चिंताओं को गंभीरता से ले और संसद के कार्यों को सुचारू बनाए।
NationPress
30/11/2025

Frequently Asked Questions

सर्वदलीय बैठक कब हुई?
सर्वदलीय बैठक 30 नवंबर को नई दिल्ली में हुई।
विपक्ष ने किन मुद्दों पर चर्चा की?
विपक्ष ने दिल्ली ब्लास्ट, बेरोजगारी, महंगाई और संघवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
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