आईआईआईटी भागलपुर दीक्षांत समारोह: विनोद तावड़े ने कहा — तकनीक को राष्ट्र सेवा से जोड़े नई पीढ़ी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े ने 26 सितंबर 2026 को आईआईआईटी भागलपुर के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए स्नातक छात्रों से आह्वान किया कि वे प्रौद्योगिकी, नवाचार और ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज प्रदान की गई डिग्रियाँ शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि एक नई बौद्धिक और व्यावसायिक यात्रा का प्रस्थान बिंदु हैं।
विरासत और आधुनिकता का संगम
तावड़े ने भागलपुर की ज्ञान-परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों पूर्व विक्रमशिला ज्ञान-सृजन और प्रसार का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र था। उनके अनुसार, आईआईआईटी भागलपुर आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के युग में उसी विरासत को नए आयाम दे रहा है।
उन्होंने कहा कि बिहार जैसे क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ की चुनौतियाँ महज पाठ्यपुस्तकीय अभ्यास नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याएँ हैं। उन्होंने कृषि में AI-आधारित कीट व रोग पहचान, सौर ऊर्जा-चालित कोल्ड स्टोरेज और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रों में संस्थान के चल रहे कार्यों का उदाहरण देते हुए शिक्षा और समाज के बीच की खाई पाटने की ज़रूरत पर बल दिया।
AI और अंतःविषयक दृष्टिकोण पर जोर
तावड़े ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने सूचना, अनुसंधान और डेटा विश्लेषण की गति को असाधारण रूप से बढ़ा दिया है। ऐसे में शिक्षा का वास्तविक मूल्य सूचना-संग्रह में नहीं, बल्कि उसे समझने, संदर्भित करने और सार्थक निष्कर्ष निकालने की क्षमता में है।
उन्होंने कहा कि भविष्य के महत्वपूर्ण नवाचार विषयों के संगम से उभरेंगे — जैसे AI और स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर और भू-राजनीति, जलवायु और प्रौद्योगिकी, तथा कृषि और डेटा। इसलिए छात्रों को अपने तकनीकी क्षेत्र में गहन विशेषज्ञता के साथ-साथ एक व्यापक और अंतःविषयक दृष्टिकोण भी विकसित करना चाहिए।
असफलता को अवसर मानने की सीख
तावड़े ने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे असफलताओं को सीखने की प्रक्रिया का अभिन्न अंग मानें। उनके अनुसार, किसी भी सार्थक प्रयास में ऐसे क्षण आते हैं जब पहला समाधान कारगर नहीं होता। ऐसे अनुभव बाधा नहीं, बल्कि बेहतर समझ और आगे का मार्ग प्रशस्त करने के अवसर हैं।
गौरतलब है कि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी स्नातक की सबसे स्थायी संपत्ति कोई विशेष प्रोग्रामिंग भाषा या सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि निरंतर सीखने और जटिल समस्याओं को नए संदर्भों में सुलझाने की क्षमता होगी।
नवाचार की व्यापक परिभाषा
तावड़े ने नवाचार को केवल नए स्टार्टअप तक सीमित न रखते हुए इसकी व्यापक परिभाषा दी। उनके अनुसार, एक नई शोध पद्धति, किसी मौजूदा प्रौद्योगिकी का नया अनुप्रयोग, सार्वजनिक प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने वाला उपकरण, या जटिल समस्याओं का नया दृष्टिकोण — ये सभी नवाचार के वैध रूप हैं।
उन्होंने छात्रों के भावी करियर पथ के बारे में कहा कि यह हमेशा एक सीधी रेखा में नहीं चलेगा — अनुसंधान से उद्योग, उद्यमिता से लोक नीति तक की यात्रा संभव है, और भविष्य की उपलब्धियाँ प्रायः विभिन्न विशेषज्ञताओं के मेल से ही उभरती हैं।
राष्ट्र सेवा का संदेश
समारोह के समापन में तावड़े ने छात्रों से 'ज्ञान को विनम्रता से, कौशल को राष्ट्र सेवा से और सफलता को मूल्यों से जोड़ने' का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की सर्वोच्च सफलता किसी व्यक्ति को अपने समय के भागीदार से समाज में एक सार्थक योगदानकर्ता में रूपांतरित करने में निहित है।
आईआईआईटी भागलपुर के स्नातक अब अपनी-अपनी राहों पर अग्रसर होंगे, लेकिन संस्थान से मिले मूल्य और दृष्टिकोण उनकी पेशेवर पहचान का हिस्सा बने रहेंगे — यह देखना बाकी है कि ये प्रतिभाएँ बिहार और देश की विकास-गाथा में कितनी बड़ी भूमिका निभाती हैं।