26 सितंबर 2026
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आईआईआईटी भागलपुर दीक्षांत समारोह: विनोद तावड़े ने कहा — तकनीक को राष्ट्र सेवा से जोड़े नई पीढ़ी

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आईआईआईटी भागलपुर दीक्षांत समारोह: विनोद तावड़े ने कहा — तकनीक को राष्ट्र सेवा से जोड़े नई पीढ़ी

सारांश

BJP महासचिव विनोद तावड़े ने आईआईआईटी भागलपुर के दीक्षांत समारोह में स्नातकों को संदेश दिया कि डिग्री यात्रा का अंत नहीं। विक्रमशिला की ज्ञान-विरासत की याद दिलाते हुए उन्होंने AI, अंतःविषयक दृष्टिकोण और राष्ट्र सेवा को जोड़ने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

BJP महासचिव विनोद तावड़े ने 26 सितंबर 2026 को आईआईआईटी भागलपुर के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
तावड़े ने विक्रमशिला की ऐतिहासिक ज्ञान-परंपरा से जोड़ते हुए संस्थान को उसकी आधुनिक उत्तराधिकारी बताया।
उन्होंने AI-आधारित कृषि पहचान , सौर कोल्ड स्टोरेज और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में संस्थान के कार्यों को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
स्नातकों को निरंतर सीखने की क्षमता को सबसे बड़ी संपत्ति बताया — किसी विशेष भाषा या सॉफ्टवेयर को नहीं।
तावड़े ने 'ज्ञान को विनम्रता से, कौशल को राष्ट्र सेवा से और सफलता को मूल्यों से' जोड़ने का आग्रह किया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े ने 26 सितंबर 2026 को आईआईआईटी भागलपुर के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए स्नातक छात्रों से आह्वान किया कि वे प्रौद्योगिकी, नवाचार और ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज प्रदान की गई डिग्रियाँ शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि एक नई बौद्धिक और व्यावसायिक यात्रा का प्रस्थान बिंदु हैं।

विरासत और आधुनिकता का संगम

तावड़े ने भागलपुर की ज्ञान-परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों पूर्व विक्रमशिला ज्ञान-सृजन और प्रसार का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र था। उनके अनुसार, आईआईआईटी भागलपुर आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के युग में उसी विरासत को नए आयाम दे रहा है।

उन्होंने कहा कि बिहार जैसे क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ की चुनौतियाँ महज पाठ्यपुस्तकीय अभ्यास नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याएँ हैं। उन्होंने कृषि में AI-आधारित कीट व रोग पहचान, सौर ऊर्जा-चालित कोल्ड स्टोरेज और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रों में संस्थान के चल रहे कार्यों का उदाहरण देते हुए शिक्षा और समाज के बीच की खाई पाटने की ज़रूरत पर बल दिया।

AI और अंतःविषयक दृष्टिकोण पर जोर

तावड़े ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने सूचना, अनुसंधान और डेटा विश्लेषण की गति को असाधारण रूप से बढ़ा दिया है। ऐसे में शिक्षा का वास्तविक मूल्य सूचना-संग्रह में नहीं, बल्कि उसे समझने, संदर्भित करने और सार्थक निष्कर्ष निकालने की क्षमता में है।

उन्होंने कहा कि भविष्य के महत्वपूर्ण नवाचार विषयों के संगम से उभरेंगे — जैसे AI और स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर और भू-राजनीति, जलवायु और प्रौद्योगिकी, तथा कृषि और डेटा। इसलिए छात्रों को अपने तकनीकी क्षेत्र में गहन विशेषज्ञता के साथ-साथ एक व्यापक और अंतःविषयक दृष्टिकोण भी विकसित करना चाहिए।

असफलता को अवसर मानने की सीख

तावड़े ने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे असफलताओं को सीखने की प्रक्रिया का अभिन्न अंग मानें। उनके अनुसार, किसी भी सार्थक प्रयास में ऐसे क्षण आते हैं जब पहला समाधान कारगर नहीं होता। ऐसे अनुभव बाधा नहीं, बल्कि बेहतर समझ और आगे का मार्ग प्रशस्त करने के अवसर हैं।

गौरतलब है कि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी स्नातक की सबसे स्थायी संपत्ति कोई विशेष प्रोग्रामिंग भाषा या सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि निरंतर सीखने और जटिल समस्याओं को नए संदर्भों में सुलझाने की क्षमता होगी।

नवाचार की व्यापक परिभाषा

तावड़े ने नवाचार को केवल नए स्टार्टअप तक सीमित न रखते हुए इसकी व्यापक परिभाषा दी। उनके अनुसार, एक नई शोध पद्धति, किसी मौजूदा प्रौद्योगिकी का नया अनुप्रयोग, सार्वजनिक प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने वाला उपकरण, या जटिल समस्याओं का नया दृष्टिकोण — ये सभी नवाचार के वैध रूप हैं।

उन्होंने छात्रों के भावी करियर पथ के बारे में कहा कि यह हमेशा एक सीधी रेखा में नहीं चलेगा — अनुसंधान से उद्योग, उद्यमिता से लोक नीति तक की यात्रा संभव है, और भविष्य की उपलब्धियाँ प्रायः विभिन्न विशेषज्ञताओं के मेल से ही उभरती हैं।

राष्ट्र सेवा का संदेश

समारोह के समापन में तावड़े ने छात्रों से 'ज्ञान को विनम्रता से, कौशल को राष्ट्र सेवा से और सफलता को मूल्यों से जोड़ने' का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की सर्वोच्च सफलता किसी व्यक्ति को अपने समय के भागीदार से समाज में एक सार्थक योगदानकर्ता में रूपांतरित करने में निहित है।

आईआईआईटी भागलपुर के स्नातक अब अपनी-अपनी राहों पर अग्रसर होंगे, लेकिन संस्थान से मिले मूल्य और दृष्टिकोण उनकी पेशेवर पहचान का हिस्सा बने रहेंगे — यह देखना बाकी है कि ये प्रतिभाएँ बिहार और देश की विकास-गाथा में कितनी बड़ी भूमिका निभाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक सुचिंतित नीतिगत संदेश भी छिपा है — बिहार में तकनीकी संस्थानों को स्थानीय समस्याओं के समाधान-केंद्र के रूप में स्थापित करना। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और रोज़गार के बीच की खाई एक चुनावी मुद्दा बनती जा रही है। हालाँकि, AI और नवाचार की बात करना सहज है — असली परीक्षा यह है कि क्या आईआईआईटी भागलपुर जैसे संस्थान स्थानीय उद्योग और कृषि क्षेत्र से पर्याप्त साझेदारी बना पाते हैं, या ये प्रतिभाएँ बड़े महानगरों की ओर पलायन कर जाती हैं। भाषण प्रेरणादायक है, लेकिन संरचनागत बदलाव बिना नीतिगत प्रतिबद्धता के नहीं आते।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईआईटी भागलपुर का दीक्षांत समारोह 2026 कब हुआ?
आईआईआईटी भागलपुर का दीक्षांत समारोह 26 सितंबर 2026 को आयोजित हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में BJP के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े ने स्नातक छात्रों को संबोधित किया।
विनोद तावड़े ने आईआईआईटी भागलपुर के छात्रों को क्या संदेश दिया?
तावड़े ने छात्रों से आह्वान किया कि वे प्रौद्योगिकी और ज्ञान को समाज और राष्ट्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ें। उन्होंने 'ज्ञान को विनम्रता से, कौशल को राष्ट्र सेवा से और सफलता को मूल्यों से जोड़ने' का आग्रह किया।
आईआईआईटी भागलपुर बिहार की किन समस्याओं पर काम कर रहा है?
संस्थान कृषि में AI-आधारित कीट व रोग पहचान, सौर ऊर्जा-चालित कोल्ड स्टोरेज और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधान विकसित कर रहा है। तावड़े ने इन्हें शिक्षा और समाज की आवश्यकताओं के बीच सेतु के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
तावड़े ने भविष्य के नवाचार के लिए किन क्षेत्रों का उल्लेख किया?
उन्होंने AI और स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर और भू-राजनीति, जलवायु और प्रौद्योगिकी, तथा कृषि और डेटा के अभिसरण को भविष्य के प्रमुख नवाचार-क्षेत्र बताया। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में अंतःविषयक दृष्टिकोण ही आने वाले दशकों की सबसे बड़ी उपलब्धियाँ देगा।
विक्रमशिला का आईआईआईटी भागलपुर से क्या संबंध है?
तावड़े ने बताया कि भागलपुर क्षेत्र में सदियों पूर्व स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय ज्ञान-सृजन और प्रसार का एक वैश्विक केंद्र था। उनके अनुसार, आईआईआईटी भागलपुर आधुनिक युग में उसी ज्ञान-परंपरा को सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है।
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