पश्चिम बंगाल में 73 रिटर्निंग अधिकारियों को भारत निर्वाचन आयोग ने किया बर्खास्त

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पश्चिम बंगाल में 73 रिटर्निंग अधिकारियों को भारत निर्वाचन आयोग ने किया बर्खास्त

सारांश

कोलकाता में चुनावों की तैयारियों के बीच, भारत निर्वाचन आयोग ने 73 रिटर्निंग अधिकारियों को हटाकर राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। जानिए इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • चुनाव आयोग ने 73 आरओ को हटाया।
  • पश्चिम बंगाल में चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे।
  • राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस ने आयोग के खिलाफ विरोध किया है।
  • कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।
  • अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

कोलकाता, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सोमवार शाम को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल से 73 रिटर्निंग अधिकारियों (आरओ) को हटा दिया है। राज्य में अगले महीने 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होने वाले हैं।

इस घटनाक्रम ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव का एक नया मोर्चा खोल दिया है। तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार पहले से ही आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। यह विरोध उन अधिकारियों के तबादले को लेकर है, जिसमें पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, पूर्व गृह सचिव जागदीश प्रसाद मीणा, पूर्व कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे, और कोलकाता पुलिस के पूर्व कमिश्नर सुप्रतिम सरकार जैसे नाम शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और प्रत्येक सीट के लिए आमतौर पर एक रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया जाता है। 73 आरओ को हटाने के साथ, राज्य में कुल आरओ का लगभग 26 प्रतिशत बदल दिया गया है। आयोग ने इस संबंध में सोमवार रात को एक अधिसूचना जारी की।

इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। याचिका में राज्य कैडर के कई शीर्ष अधिकारियों के तबादले के ईसीआई के फैसले को चुनौती दी गई है। प्रारंभिक सुनवाई सोमवार को हुई।

सुनवाई के दौरान, ईसीआई के वकील ने कलकत्ता हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच को बताया कि हर राज्य में जमीनी जरूरतों के हिसाब से अधिकारियों के तबादले भिन्न होते हैं। उन्होंने दलील दी कि आयोग के पास असीमित अधिकार नहीं हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्णय लेने का अधिकार है कि मतदान प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त हो।

उन्होंने कोर्ट के सामने उन अधिकारियों का विवरण भी प्रस्तुत किया, जिनका तबादला किया गया है, जिन्हें बदला गया है, या जिन्हें चुनाव वाले अन्य राज्यों में डेपुटेशन पर भेजा गया है।

मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए निर्धारित की है।

Point of View

राजनीतिक प्रतिरोध इसे और भी जटिल बनाता है।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत निर्वाचन आयोग ने 73 रिटर्निंग अधिकारियों को क्यों हटाया?
चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए।
पश्चिम बंगाल में चुनाव कब हो रहे हैं?
23 और 29 अप्रैल 2023 को दो चरणों में।
क्या इस निर्णय ने राजनीतिक तनाव को बढ़ाया है?
हाँ, यह निर्णय तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार के बीच तनाव को बढ़ाता है।
क्या कलकत्ता हाई कोर्ट में कोई याचिका दायर की गई है?
जी हाँ, एक जनहित याचिका दायर की गई है जो अधिकारियों के तबादले को चुनौती देती है।
अगली सुनवाई कब होगी?
अगली सुनवाई बुधवार को होगी।
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