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पश्चिम बंगाल में एसआईआर: सभी ज्यूडिशियल ऑफिसरों की छुट्टियाँ रद्द की गईं

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पश्चिम बंगाल में एसआईआर: सभी ज्यूडिशियल ऑफिसरों की छुट्टियाँ रद्द की गईं

सारांश

पश्चिम बंगाल में ज्यूडिशियल ऑफिसरों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, हाई कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। यह निर्णय लाखों लंबित मामलों को निपटाने के लिए उठाया गया है।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, सभी ज्यूडिशियल ऑफिसरों की छुट्टियाँ रद्द की गईं।
विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाएगा।
लाखों लंबित मामलों का त्वरित निपटारा करना है।
जिला स्तर पर समितियाँ गठित की गईं हैं।
निर्देशों की लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।

नई दिल्ली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट के २४ फरवरी २०२६ के आदेश के उपरांत, कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं।

इस आदेश के अनुसार, राज्य के सभी सिविल जज (सीनियर डिवीजन), चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, एवं सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट स्तर के ज्यूडिशियल ऑफिसरों को अगले आदेश तक किसी भी प्रकार की छुट्टी लेने से मना किया गया है, सिवाय मेडिकल इमरजेंसी के। इसमें डेपुटेशन पर तैनात अधिकारी भी शामिल हैं।

जो अधिकारी वर्तमान में छुट्टी पर हैं, उन्हें २५ फरवरी २०२६ दोपहर तक अपने-अपने कोर्ट और ऑफिस लौटने की आवश्यकता होगी। पहले से स्वीकृत सभी छुट्टियां अब रद्द मानी जाएंगी। ट्रांसफर ऑर्डर प्राप्त अधिकारियों को बिना ट्रांजिट लीव लिए नए जॉइनिंग निर्देशों का पालन करना होगा। कुछ अधिकारियों को पहले निर्धारित समय से पहले ड्यूटी पर लौटकर चार्ज संभालने का भी निर्देश दिया गया है।

प्रोबेशनर अधिकारियों को छोड़कर, पश्चिम बंगाल ज्यूडिशियल एकेडमी एवं राज्य के बाहर चल रहे सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इन निर्देशों की किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी।

यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में लिया गया है, जिसमें पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के एसआईआर अभियान के दौरान लाखों विवादित मामलों (विशेष रूप से लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाली श्रेणी) को निपटाने के लिए ज्यूडिशियल ऑफिसरों की तैनाती का उल्लेख किया गया था। राज्य में लगभग ४५ लाख से अधिक ऐसे मामले लंबित हैं, जिन्हें शीघ्र निपटाने के लिए यह कदम उठाया गया है। हाई कोर्ट ने जिला स्तर पर समितियाँ भी गठित की हैं, ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से चले और समय पर पूरी हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया क्या है?
एसआईआर प्रक्रिया एक विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य विवादित मामलों का शीघ्र समाधान करना है।
ज्यूडिशियल ऑफिसरों की छुट्टियाँ क्यों रद्द की गईं?
छुट्टियाँ रद्द करने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत लिया गया है, ताकि लंबित मामलों का त्वरित निपटारा किया जा सके।
क्या सभी ज्यूडिशियल ऑफिसर इस आदेश के दायरे में आते हैं?
हाँ, सभी सिविल जज, चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, एवं अन्य संबंधित अधिकारी इस आदेश के तहत आते हैं।
क्या प्रोबेशनर अधिकारियों पर भी यह आदेश लागू होता है?
नहीं, प्रोबेशनर अधिकारियों को इस आदेश से बाहर रखा गया है।
इस निर्णय का प्रभाव क्या होगा?
यह निर्णय न्याय प्रणाली में तेजी लाएगा और लंबित मामलों के समाधान में मदद करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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