महिलाओं के आरक्षण से राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव: एचडी कुमारस्वामी
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं के आरक्षण का कार्यान्वयन राजनीतिक बदलाव लाएगा।
- 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- महिला कार्यकर्ताओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।
- नेताओं को जमीनी हकीकत समझने की आवश्यकता है।
- कांग्रेस के आंतरिक झगड़े राज्य प्रशासन को प्रभावित कर रहे हैं।
बेंगलुरु, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मंगलवार को कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण का पूर्ण रूप से कार्यान्वयन राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की जा रही है।
बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए कुमारस्वामी ने बताया कि परिसीमन के बाद राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 42 होने की संभावना है, जिनमें से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। उनकी पार्टी राजनीति में महिला कार्यकर्ताओं की भागीदारी को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करेगी।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा भाजपा नेताओं की झूठे होने की आलोचना का जवाब देते हुए, कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे स्वयं आत्ममंथन करें कि असल में झूठे दावे कौन कर रहा है।
उन्होंने सिद्धारमैया पर आरोप लगाया कि वे अपने कार्यकाल के दौरान शुरू की गई परियोजनाओं का श्रेय ले रहे हैं। उदाहरण के लिए, उन्होंने सागरकट्टे गांव में पुल का हवाला दिया, जिसकी मंजूरी उनकी सरकार के समय ही मिली थी। इस परियोजना के लिए धनराशि भी स्वीकृत की गई थी, लेकिन अब इसे मौजूदा प्रशासन की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
गर्व से भरे योजना पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार 2 हजार रुपये की योजनाओं का महिमामंडन कर रही है, जबकि यह दावा किया जा रहा है कि लोग आराम से रह रहे हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि विधान सौध के वातानुकूलित कमरों में की गई नीतिगत घोषणाएं लोगों की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं कर सकतीं। इस पर उन्होंने कहा कि नेताओं को जमीनी हकीकत समझने के लिए गांवों का दौरा करना चाहिए।
कुमारस्वामी ने आगे कहा कि बीआर अंबेडकर की प्रतिमा पर केवल माला चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। नेताओं को उन समुदायों के सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना चाहिए जिनके लिए अंबेडकर ने संघर्ष किया था। उन्होंने इसे संविधान के निर्माता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि कांग्रेस के भीतर चल रहे आपसी झगड़ों के कारण राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव के बाद के घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की आपसी लड़ाई ने शासन-प्रशासन पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
उन्होंने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि वह कुछ समुदायों को खुश करने और उन समुदायों के नेताओं को निशाना बनाने का दोहरा रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। किसी भी समुदाय को दूसरे समुदाय की कीमत पर खुश नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने पिछले तीन वर्षों से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच चल रहे टकराव की ओर भी इशारा किया, जिसके कारण शासन-प्रशासन को नुकसान पहुंचा है।