दक्षिण भारत के मंदिरों में अक्षय तृतीया पर विशेष पूजा: चंदन लेपन और पायसम का भोग
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। 19 अप्रैल को पूरे देश में अक्षय तृतीया का पवित्र पर्व मनाया जाएगा, जिसे वर्ष का सबसे शुभ 'स्वयं सिद्ध मुहूर्त' माना जाता है। इस दिन किया गया हर कार्य फलदायी होता है, विशेषकर दक्षिण भारत में इसे नई शुरुआत के अवसर के रूप में देखा जाता है। आज के दिन नए व्यापार, गृह प्रवेश या विवाह के लिए विशेष महत्व है। दक्षिण भारत के मंदिरों में अक्षय तृतीया के अवसर पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं और भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की पूजा चंदन से की जाती है। आज हम दक्षिण भारत के मंदिरों में होने वाले विशिष्ट अनुष्ठानों के बारे में चर्चा करेंगे।
आंध्र प्रदेश के सिंहाचलम मंदिर में अक्षय तृतीया का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यहाँ भगवान विष्णु के 'वराह नरसिंह' अवतार की पूजा की जाती है और साल में सिर्फ एक दिन, यानी अक्षय तृतीया के दिन ही, प्रतिमा से चंदन हटाया जाता है। साल भर प्रतिदिन प्रतिमा पर चंदन का लेपन किया जाता है और आज भगवान भक्तों को दर्शन देते हैं।
तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर में भी भगवान विष्णु का दिव्य श्रृंगार होता है और विशेष भोग अर्पित किया जाता है। आज के दिन भक्त भगवान विष्णु के दर्शन कर धन-धान्य की कामना करते हैं।
कांचीपुरम के वरदराज पेरुमल मंदिर में अक्षय तृतीया के दिन सोने और चांदी की छिपकलियों का दर्शन करना शुभ माना जाता है, जो मां लक्ष्मी और कुबेर का प्रतीक हैं। इस दिन भगवान विष्णु को अर्पित करने के लिए विशेष मीठे भात और केसरी भात का भोग भी लगाया जाता है, जिसे पायसम भी कहा जाता है।
तमिलनाडु का श्री अक्षयपुरीश्वरर मंदिर भी अक्षय तृतीया से संबंधित है क्योंकि यहीं भगवान शिव ने कुबेर को धन का देवता बनने का आशीर्वाद दिया था। इस दिन भगवान शिव को ठंडी जलधारा अर्पित की जाती है और कुबेर से धन व समृद्धि का वरदान मांगा जाता है।
तमिलनाडु का रामनाथस्वामी मंदिर भी खास है। 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस मंदिर में अक्षय तृतीया के दिन मंदिर के 22 पवित्र कुंडों के जल से स्नान किया जाता है और भगवान शिव तथा मां पार्वती की पूजा की जाती है। यह माना जाता है कि इससे पारिवारिक विवाद और दांपत्य जीवन खुशहाल बना रहता है। इसके अलावा, अक्षय तृतीया के दिन दक्षिण भारत के अन्य कुबेर और भगवान विष्णु के मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना होती है। लगभग हर मंदिर में भगवान को चंदन अर्पित किया जाता है और पीले वस्त्र पहनाए जाते हैं।