भदोही में CM योगी ने किया इंडिया कारपेट एक्सपो का शुभारंभ, ₹6,100 करोड़ निर्यात और 5 लाख रोज़गार का दावा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 अक्टूबर 2026 को भदोही (संत रविदास नगर) के कारपेट एक्सपो मार्ट में इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जो कारीगर और हस्तशिल्पी कभी रोज़ी-रोटी के लिए पलायन को मजबूर थे, आज उन्हें अपनी ही मिट्टी में हुनर दिखाने का मंच मिल रहा है। भदोही का हस्तनिर्मित कालीन अब वैश्विक बाज़ार में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।
एक्सपो का विस्तार और वैश्विक भागीदारी
यह एक्सपो 4 से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें 227 से अधिक प्रदर्शनकर्ता और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी खरीदार भाग ले रहे हैं। विशेष रूप से, ब्रिक्स देशों के 106 खरीदार इस संस्करण में शामिल हैं — जो भारत के कालीन उद्योग की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री योगी ने फीता काटकर एक्सपो का उद्घाटन किया और स्टॉलों पर जाकर कारीगरों व हस्तशिल्पियों के उत्पाद देखे।
कालीन उद्योग की आर्थिक ताकत
मुख्यमंत्री ने बताया कि संत रविदास नगर और सिल्क क्लस्टर से सालाना ₹6,100 करोड़ का निर्यात हो रहा है। देश के कुल कालीन निर्यात में संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी के सिल्क क्लस्टर की संयुक्त हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है। अकेले संत रविदास नगर में 2,500 एमएसएमई यूनिट हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर ₹10,000 करोड़ है। इस उद्योग से 5 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार प्राप्त है।
उन्होंने यह भी बताया कि भदोही में निर्मित 90 प्रतिशत कालीन अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन सहित कई देशों को निर्यात किए जाते हैं। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन को जीआई (GI) टैग भी प्राप्त है। गौरतलब है कि देश के नए संसद भवन में बिछाया गया कालीन भी संत रविदास नगर में ही तैयार किया गया है।
2017 से पहले और बाद का फ़र्क
मुख्यमंत्री योगी ने 2017 से पूर्व की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय दंगों, कर्फ्यू और माफिया के वर्चस्व के कारण प्रदेश में कारोबार का माहौल नहीं था — न कारीगरों को काम मिलता था और न देशी-विदेशी खरीदार आते थे। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में उपद्रव और कर्फ्यू की स्थिति नहीं है तथा व्यापार और सुरक्षा का वातावरण बेहतर हुआ है। सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत भदोही के कालीन को शामिल कर कारीगरों को तकनीक, डिजाइन और बाज़ार से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में लगभग 14,000 कारखाने थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 35,000 से अधिक हो गई है। प्रदेश में देश के 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का निर्माण हो रहा है।
कनेक्टिविटी और बुनियादी ढाँचा
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ कालीन उद्योग को मिल रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे का विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में विस्तार होने पर संत रविदास नगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट महज़ छह घंटे में पहुँचा जा सकेगा। इसके अलावा, वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैंड वाटरवे और लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कार्गो सुविधा भी उपलब्ध है। लखनऊ और हरदोई के बीच 1,000 एकड़ में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है।
निवेश और रोज़गार का बड़ा दावा
योगी ने बताया कि प्रदेश को ₹50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से ₹15 लाख करोड़ की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और ₹7.5 लाख करोड़ के उद्योग शीघ्र धरातल पर उतरने वाले हैं। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं और प्रत्येक यूनिट को ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड पर काम जारी है और 12 निजी औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, प्रत्येक जनपद में सरदार वल्लभभाई पटेल एंप्लॉयमेंट एंड स्किलिंग ज़ोन स्थापित करने की तैयारी है, जहाँ उद्योगों की मांग के अनुसार कुशल मानव-शक्ति तैयार की जाएगी।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहा है। 25 से 29 सितंबर 2026 के बीच ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 6 लाख से अधिक आगंतुक आए, 1.5 लाख से अधिक बी2बी बैठकें हुईं और 2,400 से अधिक प्रदर्शनकर्ताओं व 650 से अधिक विदेशी खरीदारों ने भाग लिया।