4 अक्टूबर 2026
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सीएम योगी का ऐलान: संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी बनेंगे सिल्क क्लस्टर

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सीएम योगी का ऐलान: संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी बनेंगे सिल्क क्लस्टर

सारांश

सीएम योगी ने भदोही में इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण में संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी को सिल्क क्लस्टर बनाने का ऐलान किया। वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान जल्द लागू होगा और CEPC में महिला उद्यमियों के लिए आरक्षण का भरोसा भी दिया गया।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 अक्टूबर 2026 को संत रविदास नगर , मिर्जापुर और वाराणसी को सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित करने की घोषणा की।
वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान शीघ्र लागू किए जाने का भरोसा दिया गया।
इंडिया कारपेट एक्सपो का स्वर्ण जयंती (50वाँ) संस्करण इस बार भदोही में आयोजित हुआ — यह योगी की लगातार दूसरी उपस्थिति रही।
उद्यमी पीयूष कुमार बरनवाल ने कहा कि हस्तनिर्मित कालीन उत्पादन में भारत विश्व में नंबर वन है; उद्योग-विशिष्ट नीति की माँग की।
CEPC को महिला उद्यमियों के लिए स्थान आरक्षित करने और भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
ODOP की तर्ज पर कालीन उद्योग के लिए अलग नीति बनाने का सुझाव, मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 अक्टूबर 2026 को भदोही में आयोजित इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण में घोषणा की कि संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी को सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान भी शीघ्र लागू किया जाएगा। यह घोषणा कालीन उद्योग के निर्यातकों, विक्रेताओं और प्रमुख उद्यमियों के साथ सीधे संवाद के दौरान की गई।

मुख्य घटनाक्रम

इंडिया कारपेट एक्सपो का यह स्वर्ण जयंती यानी 50वाँ संस्करण भदोही में आयोजित हुआ — जो अपने आप में एक ऐतिहासिक अवसर था। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों की हर बात ध्यान से सुनी और उठाए गए मुद्दों पर सरकार की ओर से संज्ञान लेने का भरोसा दिया। गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार कालीन उद्योग को प्रोत्साहित करने इस आयोजन में पहुँचे।

उद्यमियों ने रखे अपने सुझाव

मिर्जापुर के कालीन कारोबारी अनिल कुमार ने बेहतर कनेक्टिविटी और प्राचीन शहर से जुड़े कालीन व्यवसाय के विषयों पर अपनी बात रखी तथा योगी सरकार के कार्यों की सराहना की। इम्तियाज अहमद ने कहा कि ओडीओपी (ODOP) योजना की तर्ज पर कालीन उद्योग के लिए अलग नीति बनाई जाए, जिससे रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह तीसरी बार है जब उन्हें मुख्यमंत्री का आशीर्वाद मिला है।

पीयूष कुमार बरनवाल ने कहा कि हस्तनिर्मित कालीन उत्पादन में भारत विश्व में नंबर वन है। चूँकि कालीन तैयार होने में अधिक समय लगता है, इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि इसे सामान्य मैन्युफैक्चरिंग श्रेणी से अलग रखते हुए उद्योग की विशिष्ट ज़रूरतों को ध्यान में रखकर नीति बनाई जाए। सीएम योगी ने इसे 'अच्छा सुझाव' बताते हुए कहा कि उन बुनकरों का अभिनंदन है जिन्होंने अपने पूर्वजों की धरोहर को जीवित रखा है।

महिला उद्यमियों की भागीदारी पर ज़ोर

आदर्श पूर्णिमा ने रेखांकित किया कि कालीन उद्योग में बड़ी संख्या में महिला उद्यमी और कामगार हैं, लेकिन कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) का मौजूदा ढाँचा महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दे पाया है। उन्होंने ऐसे प्रावधानों की माँग की जिससे महिलाओं की भागीदारी बढ़े और उनका मनोबल मज़बूत हो।

इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए हैं, और अब महिलाएँ सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं, बल्कि अपने लिए कानून भी बनाएँगी। उन्होंने CEPC को महिला उद्यमियों के लिए स्थान आरक्षित करने और उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पहले यह एक्सपो दिल्ली में आयोजित होता था और भदोही में इसका आयोजन एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार पूर्वाँचल क्षेत्र के पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक पहचान दिलाने पर ज़ोर दे रही है। वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान के जल्द लागू होने से इस क्षेत्र के बुनकरों और निर्यातकों को बेहतर बुनियादी ढाँचा और बाज़ार तक पहुँच मिलने की उम्मीद है।

आगे क्या होगा

सिल्क क्लस्टर के रूप में तीनों जिलों के विकास की विस्तृत रूपरेखा अभी सामने आनी बाकी है। कालीन उद्योग से जुड़े उद्यमियों की नज़र अब इस बात पर है कि सरकार CEPC में महिला आरक्षण और उद्योग-विशिष्ट नीति पर कितनी जल्दी ठोस कदम उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में निर्यात नीति और कनेक्टिविटी सुधार साथ-साथ चले, तो पूर्वाँचल का कालीन उद्योग वैश्विक बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी और बढ़ा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — तीनों जिलों को क्लस्टर घोषित करना और उन्हें वास्तविक बुनियादी ढाँचा, निर्यात नीति व वित्तीय सहायता देना दो अलग बातें हैं। CEPC में महिला आरक्षण का निर्देश सही दिशा में है, मगर जब तक इसे संरचनागत बदलाव में नहीं बदला जाता, यह भी केवल मंच से कही गई बात रहेगी। वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान की 'जल्द' की समयसीमा अस्पष्ट है — उद्यमियों को ठोस तारीखों और बजट आवंटन का इंतज़ार रहेगा।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी को सिल्क क्लस्टर क्यों बनाया जाएगा?
ये तीनों जिले पारंपरिक रूप से कालीन और हस्तशिल्प उद्योग के केंद्र हैं। सीएम योगी ने 4 अक्टूबर 2026 को इंडिया कारपेट एक्सपो में कहा कि इन्हें सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित कर क्षेत्रीय उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाएगा।
वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान क्या है?
यह पूर्वाँचल के वाराणसी और विंध्य क्षेत्र के एकीकृत विकास के लिए तैयार किया जा रहा एक क्षेत्रीय योजना दस्तावेज़ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे शीघ्र लागू किया जाएगा, हालाँकि अभी कोई सटीक तारीख या बजट आवंटन सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इंडिया कारपेट एक्सपो का स्वर्ण जयंती संस्करण कहाँ हुआ?
इंडिया कारपेट एक्सपो का 50वाँ यानी स्वर्ण जयंती संस्करण भदोही (संत रविदास नगर) में आयोजित किया गया। पहले यह एक्सपो दिल्ली में लगता था; भदोही में आयोजन को क्षेत्रीय उद्योग की बढ़ती पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
CEPC में महिला उद्यमियों की भागीदारी पर क्या कहा गया?
उद्यमी आदर्श पूर्णिमा ने कहा कि कालीन उद्योग में बड़ी संख्या में महिलाएँ काम करती हैं, लेकिन CEPC का ढाँचा उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देता। सीएम योगी ने CEPC को महिला उद्यमियों के लिए स्थान आरक्षित करने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
कालीन उद्योग के लिए अलग नीति की माँग क्यों उठी?
उद्यमी पीयूष कुमार बरनवाल ने बताया कि हस्तनिर्मित कालीन तैयार होने में सामान्य मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों से अधिक समय लगता है, इसलिए इसे अलग श्रेणी में रखकर उद्योग की विशेष ज़रूरतों के अनुसार नीति बनाने की ज़रूरत है। इम्तियाज अहमद ने ODOP की तर्ज पर नीति बनाने का सुझाव दिया, जिस पर मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेने का आश्वासन दिया।
राष्ट्र प्रेस
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