भदोही का नाम 'संत रविदास नगर' होने पर अयोध्या के संतों ने CM योगी का किया आभार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने भदोही जिले का नाम पुनः 'संत रविदास नगर' करने का निर्णय लिया है, जिसका अयोध्या के संत समाज ने खुलकर स्वागत किया है। संतों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस फैसले से सनातन परंपरा और महापुरुषों के प्रति सम्मान का भाव प्रकट होता है। 5 अक्टूबर 2026 को अयोध्या से संत समाज की यह प्रतिक्रिया सामने आई।
संतों ने बताया ऐतिहासिक कदम
आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने इस निर्णय को ऐतिहासिक और प्रशंसनीय करार दिया। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी ने सनातन धर्म और समाज के लिए अतुलनीय योगदान दिया है और उनका जीवन समरसता तथा भक्ति का प्रतीक रहा है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह 'बहुत ही उत्तम कार्य' किया है।
गौरतलब है कि संत रविदास नगर नाम पहले भी इस जिले को दिया जा चुका था और यह निर्णय उसी ऐतिहासिक पहचान की पुनर्स्थापना के रूप में देखा जा रहा है।
हनुमानगढ़ी मंदिर के पुजारी ने जताया आभार
हनुमानगढ़ी मंदिर के पुजारी राजू दास ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सीएम योगी स्वयं एक साधु और महात्मा हैं, इसलिए वे सनातन संस्कृति के उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत रहते हैं। राजू दास ने कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्यभर में जीर्ण-शीर्ण मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया है, चाहे वे किसी भी सम्प्रदाय, मत, पंथ या परंपरा से जुड़े हों।
समाजवादी पार्टी पर तीखी प्रतिक्रिया
राजू दास ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी हमेशा से सनातन संस्कृति और हिंदुत्व की विरोधी रही है। उनका कहना था कि 'हिंदुओं को इस पार्टी पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए।'
राजू दास ने अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाने की ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी पार्टी के नेताओं का अब साधु-संतों की शरण में आना और भागवत कथा में शामिल होना राजनीतिक प्रचार से अधिक कुछ नहीं है। यह टिप्पणी राजू दास की निजी राय है।
सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश
संतों का मानना है कि भदोही को संत रविदास नगर का नाम देना सामाजिक समरसता और आस्था दोनों का सम्मान है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में नामकरण से जुड़े सांस्कृतिक और राजनीतिक सवाल अक्सर चर्चा में रहते हैं। आने वाले दिनों में इस निर्णय को लेकर विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएँ सामने आने की संभावना है।