8 नवंबर 2026
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अयोध्या दीपोत्सव सनातन संस्कृति का प्रतीक, योगी आदित्यनाथ धर्म के गौरव: स्वामी रामदेव

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अयोध्या दीपोत्सव सनातन संस्कृति का प्रतीक, योगी आदित्यनाथ धर्म के गौरव: स्वामी रामदेव

सारांश

स्वामी रामदेव ने अयोध्या दीपोत्सव को सनातन संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति बताया और योगी आदित्यनाथ को 'धर्म का गौरव' कहा। साथ ही, पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर परोक्ष निशाना साधते हुए उन्होंने देवताओं को विभाजित करने की प्रवृत्ति को सनातन विरोधी बताया।

मुख्य बातें

स्वामी रामदेव ने 8 नवंबर 2026 को हरिद्वार से अयोध्या दीपोत्सव को सनातन संस्कृति का प्रतीक बताया।
रामदेव ने योगी आदित्यनाथ को 'सनातन धर्म के गौरव' और नाथ संप्रदाय की परंपरा का संरक्षक बताया।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर परोक्ष टिप्पणी करते हुए कहा कि देवताओं को विभाजित करने वाले सनातन के सच्चे ज्ञाता नहीं हैं।
पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर उनके BJP संगठन निर्माण के प्रयासों को 'अभूतपूर्व' बताया।
विपक्ष को 'सड़कों पर अराजकता' और 'सत्ता परिवर्तन के दिवास्वप्न' छोड़ने की नसीहत दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना, कहा — सैनिकों के साथ दीपावली मनाना राष्ट्रीय एकता का प्रतीक।

योग गुरु स्वामी रामदेव ने 8 नवंबर 2026 को हरिद्वार से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि अयोध्या में दीपावली पर आयोजित भव्य दीपोत्सव सनातन संस्कृति की समृद्ध परंपराओं का जीवंत प्रतीक है और यह आयोजन पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। रामदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी गुलामी की निशानियों को मिटाकर स्वाभिमान, शौर्य और सामाजिक समरसता के नए प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ और नाथ संप्रदाय का गौरव

स्वामी रामदेव ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सनातन धर्म के गौरव हैं। उनके अनुसार, योगी न केवल साधुता की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं, बल्कि नाथ संप्रदाय और सिद्धों की विरासत को भी गरिमा प्रदान कर रहे हैं। रामदेव ने इस बात पर जोर दिया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सनातन परंपराओं को नई पहचान मिली है।

देवताओं के विभाजन पर रामदेव की चेतावनी

रामदेव ने परोक्ष रूप से पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ साधु-संत आजकल भगवान को भी विभाजित करने में लगे हैं। उन्होंने कहा, 'जो शिव-शक्ति या राम-कृष्ण में भेद देखता है और सीता-राम, राधा-कृष्ण में अंतर करता है, उसे वेद और सनातन के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं है।' उनके अनुसार राम, कृष्ण, हनुमान, शिव-शंकर सब एक ही चेतना के विभिन्न रूप हैं और उनका एकांगी या खंडित स्वरूप देखना उचित नहीं है।

लालकृष्ण आडवाणी को जन्मदिन की श्रद्धांजलि

पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन के अवसर पर रामदेव ने उनके योगदान को 'अभूतपूर्व' बताया। रामदेव ने कहा, 'आडवाणी ने हर प्रांत, जिले, तहसील और ब्लॉक स्तर तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठन को मजबूत बनाने के लिए अथक परिश्रम किया। उनके जीवन की पहली प्रेरणा है खानपान पर संयम, और दूसरी यह संकल्प कि अंतिम लक्ष्य सत्ता नहीं, बल्कि देश की महिमा को अमर रखना है।'

विपक्ष और राष्ट्रीय एकता पर बयान

रामदेव ने विपक्षी दलों को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा रखनी चाहिए और किसी भी देवता का अनादर 'अत्यंत अनुचित' है। उनके अनुसार, 'विपक्ष को सड़कों पर अराजकता फैलाना और सत्ता परिवर्तन के दिवास्वप्न देखना बंद कर देना चाहिए। देश लोकतंत्र और संविधान के सिद्धांतों पर चलेगा।'

प्रधानमंत्री और सनातन मूल्यों पर टिप्पणी

रामदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री होली, दीपावली, जन्माष्टमी, रामनवमी से लेकर गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस तक सभी राष्ट्रीय त्योहारों का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मोदी देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के साथ दीपावली मनाते हैं, जो राष्ट्रीय एकता और समर्पण का प्रतीक है। रामदेव के अनुसार, 'हमें ऐसे महान प्रधानमंत्री पर गर्व है।' आगे देखना होगा कि अयोध्या दीपोत्सव की यह धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को किस दिशा में ले जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

धीरेंद्र शास्त्री पर परोक्ष प्रहार, और विपक्ष को खुली नसीहत — जो इसे महज धार्मिक टिप्पणी नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक संदेश बनाता है। गौरतलब है कि रामदेव का हिंदुत्व के व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र में दीर्घकालिक प्रभाव है और उनकी हर टिप्पणी करोड़ों अनुयायियों तक पहुँचती है। यह उस बड़े विमर्श का हिस्सा है जिसमें सनातन के प्रतिनिधित्व को लेकर धार्मिक हस्तियों के बीच स्पष्ट मतभेद उभर रहे हैं। मुख्यधारा की कवरेज प्राय: इस आंतरिक प्रतिस्पर्धा को नज़रअंदाज़ करती है, जो दीर्घकालिक रूप से हिंदू सामाजिक एकजुटता के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कोई राजनीतिक घोषणा।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी रामदेव ने अयोध्या दीपोत्सव के बारे में क्या कहा?
रामदेव ने 8 नवंबर 2026 को हरिद्वार से कहा कि अयोध्या दीपोत्सव सनातन संस्कृति की समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है और पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देते हुए इसे स्वाभिमान और सामाजिक समरसता का उदाहरण बताया।
रामदेव ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर परोक्ष निशाना क्यों साधा?
रामदेव ने कहा कि कुछ साधु-संत आजकल भगवान को भी विभाजित कर रहे हैं, जो सनातन की दृष्टि से उचित नहीं है। उनके अनुसार राम, कृष्ण, शिव और हनुमान सब एक ही हैं और जो इनमें भेद करता है उसे वेद और सनातन का सच्चा ज्ञान नहीं है।
लालकृष्ण आडवाणी के बारे में रामदेव ने क्या कहा?
रामदेव ने आडवाणी के जन्मदिन पर उनके BJP संगठन-निर्माण के प्रयासों को 'अभूतपूर्व' बताया। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने ब्लॉक स्तर तक पार्टी को मजबूत किया और उनका जीवन संयम एवं राष्ट्र-समर्पण की प्रेरणा देता है।
रामदेव ने विपक्ष को क्या संदेश दिया?
रामदेव ने विपक्ष से सड़कों पर अराजकता फैलाना और सत्ता परिवर्तन के दिवास्वप्न देखना बंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश लोकतंत्र और संविधान के सिद्धांतों पर चलेगा।
रामदेव ने प्रधानमंत्री मोदी की क्यों प्रशंसा की?
रामदेव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी होली से दीपावली तक सभी राष्ट्रीय त्योहारों का गौरव बढ़ाते हैं और देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के साथ दीपावली मनाकर राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हैं। रामदेव ने उन्हें 'सनातन मूल्यों को जीने वाला महान प्रधानमंत्री' बताया।
राष्ट्र प्रेस
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