भदोही का नाम फिर होगा 'संत रविदासनगर भदोही', योगी कैबिनेट ने 9 अक्टूबर को दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले को एक बार फिर संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 9 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में संपन्न कैबिनेट बैठक में जिले का नाम 'संत रविदासनगर भदोही' किए जाने के प्रस्ताव पर सरकार की मुहर लग गई। यह निर्णय संत रविदास के सामाजिक सुधार में योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ भदोही की ऐतिहासिक पहचान को भी बरकरार रखता है।
नामकरण का राजनीतिक इतिहास
वर्ष 1997 में मायावती के नेतृत्व वाली सरकार ने इस जिले का नाम 'संत रविदास नगर' रखा था। इसके बाद वर्ष 2014 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार ने जिले के नाम से संत रविदास का नाम हटाकर उसे केवल 'भदोही' कर दिया था। अब योगी सरकार ने इस नाम में संत रविदास को पुनः स्थान देने का निर्णय लिया है। यह तीसरी बार है जब इस जिले के नामकरण का मसला राजनीतिक केंद्र में आया है।
कैबिनेट का फैसला और कानूनी आधार
कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि जिले का नया नाम 'संत रविदासनगर भदोही' होगा, जिसमें संत रविदास के सम्मान और भदोही की स्थानीय पहचान — दोनों को एक साथ समेटा गया है। प्रदेश सरकार के अनुसार यह निर्णय उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की संशोधित धारा 6(2) के तहत लिया गया है, जो राज्य सरकार को अधिसूचना जारी कर किसी राजस्व क्षेत्र का नामकरण करने का अधिकार देती है। सरकार ने यह भी बताया कि यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के 11 सितंबर 1953 के संबंधित परिपत्र के अनुरूप है।
सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ
संत रविदास दलित समाज की आस्था और सामाजिक चेतना के प्रमुख प्रतीक हैं। उनकी शिक्षाएँ जाति-आधारित भेदभाव के विरुद्ध सामाजिक समरसता की नींव रखती हैं। वहीं, भदोही की ऐतिहासिक पहचान भार राज से जुड़ी मानी जाती है, जिसे राजभर समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखता है। नए नाम में इन दोनों पहचानों को शामिल करना सरकार की व्यापक सामाजिक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस फैसले को दलित समाज और राजभर समाज — दोनों को एक साथ साधने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में दलित और पिछड़े वर्गों का संयुक्त वोट बैंक राजनीतिक दृष्टि से निर्णायक माना जाता है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) सामाजिक न्याय के प्रतीकों को अपनी राजनीतिक छवि से जोड़ने की रणनीति पर सक्रिय है।
आगे की प्रक्रिया
कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्य सरकार आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगी, जिसके बाद जिले का नाम सरकारी रिकॉर्ड, राजस्व दस्तावेजों और प्रशासनिक पत्राचार में बदला जाएगा। यह कदम संत रविदास की विरासत को राज्य की आधिकारिक पहचान में स्थायी रूप से दर्ज करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।