भदोही नामकरण पर सपा का स्वागत, विधायक मेहरोत्रा बोले — नाम बदलने से नहीं मिलेगा दलितों को हक
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 4 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए भदोही जिले का नाम बदलकर संत रविदास नगर करने की भाजपा सरकार की घोषणा का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कड़ा सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक हैं, परंतु केवल जिले का नाम बदल देने से दलितों, पिछड़ों और वंचितों को उनका वास्तविक हक और सम्मान नहीं मिलेगा।
मुख्य बयान और आरोप
मेहरोत्रा ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी संत रविदास का गहरा सम्मान करती है और उनके नाम पर जिले का नामकरण उचित कदम है। हालाँकि, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार से सीधे सवाल किया कि दलित, वंचित एवं पिछड़े वर्ग को नौकरी, रोज़गार और शिक्षा देने के लिए क्या ठोस प्रयास किए गए हैं। उनके अनुसार, सपा लंबे समय से पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) समाज के अधिकारों के लिए संघर्षरत है, जबकि भाजपा सरकार उसी की नीतियों को लागू कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने को लेकर दिए गए बयान समेत भाजपा के तमाम कदम जनता का ध्यान महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, अपराध और स्वास्थ्य-शिक्षा जैसे असली मुद्दों से भटकाने की रणनीति हैं।
चुनावी समीकरण और गठबंधन की स्थिति
मेहरोत्रा ने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार बनेगी और 2029 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन केंद्र में सत्ता में आएगा। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत उत्तर प्रदेश में सपा को 37 सीटें और कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं।
उन्होंने यह भी बताया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच बातचीत चल रही है और जल्द ही सीटों के बंटवारे को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। हालाँकि, उन्होंने कांग्रेस को चेतावनी भी दी कि सीटों की माँग से पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ मध्य सीट पर गठबंधन धर्म तोड़ने का जवाब देना होगा, जब उनके खिलाफ कांग्रेस ने प्रत्याशी उतार दिया था।
अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा
मेहरोत्रा ने बताया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को अयोध्या जाएंगे, जहाँ वे विशिष्ट व्यक्तियों के अलावा संत समाज, साधु और महात्माओं से भी भेंट करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की रणनीतिक पहुँच का हिस्सा माना जा रहा है।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
फर्जी फॉर्म-7 जमा किए जाने के मुद्दे पर मेहरोत्रा ने चुनाव आयोग से ज़िम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की माँग की और आरोप लगाया कि भाजपा जिस तरह आयोग का बचाव कर रही है, उससे गड़बड़ी स्पष्ट होती है। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष पहले से सवाल उठाता रहा है।
आगे की राह
सपा-कांग्रेस गठबंधन की रूपरेखा और सीटों का बँटवारा अभी तय होना बाकी है। मेहरोत्रा के अनुसार, जिस सीट पर जिस दल का उम्मीदवार बेहतर स्थिति में हो, उसे वहाँ से चुनाव लड़ना चाहिए — यानी गठबंधन का आधार जीत की संभावना होनी चाहिए, न कि केवल सीटों की संख्या। शीर्ष नेताओं के बीच जारी बातचीत से जल्द ही कोई ठोस तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।