4 अक्टूबर 2026
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भदोही नामकरण पर सपा का स्वागत, विधायक मेहरोत्रा बोले — नाम बदलने से नहीं मिलेगा दलितों को हक

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भदोही नामकरण पर सपा का स्वागत, विधायक मेहरोत्रा बोले — नाम बदलने से नहीं मिलेगा दलितों को हक

सारांश

भदोही का नाम संत रविदास नगर रखे जाने पर सपा ने स्वागत तो किया, मगर सीधा सवाल भी दाग दिया — नाम बदलना काफी नहीं, दलितों को रोज़गार और शिक्षा चाहिए। साथ ही 2027 में सपा सरकार और 2029 में इंडिया गठबंधन की केंद्र सरकार बनाने का दावा।

मुख्य बातें

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भदोही का नाम संत रविदास नगर रखे जाने का स्वागत किया, लेकिन कहा कि केवल नामकरण से दलितों को हक नहीं मिलेगा।
मेहरोत्रा ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह महंगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार जैसे असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटका रही है।
सपा ने दावा किया कि 2027 UP विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा सरकार बनेगी और 2029 लोकसभा में इंडिया गठबंधन सत्ता में आएगा।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को अयोध्या जाएंगे और संत समाज से मुलाकात करेंगे।
2024 लोकसभा में सपा को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं; सपा-कांग्रेस के बीच 2027 के लिए सीट बँटवारे की बातचीत जारी।
मेहरोत्रा ने फर्जी फॉर्म-7 मामले पर मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की माँग की।

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 4 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए भदोही जिले का नाम बदलकर संत रविदास नगर करने की भाजपा सरकार की घोषणा का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कड़ा सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक हैं, परंतु केवल जिले का नाम बदल देने से दलितों, पिछड़ों और वंचितों को उनका वास्तविक हक और सम्मान नहीं मिलेगा।

मुख्य बयान और आरोप

मेहरोत्रा ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी संत रविदास का गहरा सम्मान करती है और उनके नाम पर जिले का नामकरण उचित कदम है। हालाँकि, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार से सीधे सवाल किया कि दलित, वंचित एवं पिछड़े वर्ग को नौकरी, रोज़गार और शिक्षा देने के लिए क्या ठोस प्रयास किए गए हैं। उनके अनुसार, सपा लंबे समय से पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) समाज के अधिकारों के लिए संघर्षरत है, जबकि भाजपा सरकार उसी की नीतियों को लागू कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने को लेकर दिए गए बयान समेत भाजपा के तमाम कदम जनता का ध्यान महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, अपराध और स्वास्थ्य-शिक्षा जैसे असली मुद्दों से भटकाने की रणनीति हैं।

चुनावी समीकरण और गठबंधन की स्थिति

मेहरोत्रा ने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार बनेगी और 2029 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन केंद्र में सत्ता में आएगा। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत उत्तर प्रदेश में सपा को 37 सीटें और कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं।

उन्होंने यह भी बताया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच बातचीत चल रही है और जल्द ही सीटों के बंटवारे को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। हालाँकि, उन्होंने कांग्रेस को चेतावनी भी दी कि सीटों की माँग से पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ मध्य सीट पर गठबंधन धर्म तोड़ने का जवाब देना होगा, जब उनके खिलाफ कांग्रेस ने प्रत्याशी उतार दिया था।

अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा

मेहरोत्रा ने बताया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को अयोध्या जाएंगे, जहाँ वे विशिष्ट व्यक्तियों के अलावा संत समाज, साधु और महात्माओं से भी भेंट करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की रणनीतिक पहुँच का हिस्सा माना जा रहा है।

चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप

फर्जी फॉर्म-7 जमा किए जाने के मुद्दे पर मेहरोत्रा ने चुनाव आयोग से ज़िम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की माँग की और आरोप लगाया कि भाजपा जिस तरह आयोग का बचाव कर रही है, उससे गड़बड़ी स्पष्ट होती है। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष पहले से सवाल उठाता रहा है।

आगे की राह

सपा-कांग्रेस गठबंधन की रूपरेखा और सीटों का बँटवारा अभी तय होना बाकी है। मेहरोत्रा के अनुसार, जिस सीट पर जिस दल का उम्मीदवार बेहतर स्थिति में हो, उसे वहाँ से चुनाव लड़ना चाहिए — यानी गठबंधन का आधार जीत की संभावना होनी चाहिए, न कि केवल सीटों की संख्या। शीर्ष नेताओं के बीच जारी बातचीत से जल्द ही कोई ठोस तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सपा का यह बयान एक चिरपरिचित राजनीतिक पैटर्न को उजागर करता है — जहाँ विपक्ष सत्तापक्ष की घोषणा का श्रेय नकारते हुए उसी घोषणा का स्वागत करता है। असली सवाल यह है कि पीडीए समाज की शिक्षा, रोज़गार और स्वास्थ्य से जुड़ी ठोस माँगों पर न भाजपा के पास कोई नया रोडमैप है, न सपा के पास। 2027 के चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बँटवारे की अनिश्चितता और 2017 की कड़वाहट बताती है कि इंडिया गठबंधन की एकजुटता कागज़ पर ज़्यादा, ज़मीन पर कम है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भदोही का नाम संत रविदास नगर क्यों रखा जा रहा है?
भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का नाम बदलकर संत रविदास नगर करने की घोषणा की है, जो सामाजिक न्याय और दलित समुदाय की आस्था के प्रतीक संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम पर है। यह नामकरण राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं।
सपा ने भदोही नामकरण का स्वागत करते हुए भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने नामकरण का स्वागत किया, लेकिन कहा कि नाम बदलने से दलितों, पिछड़ों और वंचितों को नौकरी, रोज़गार और शिक्षा नहीं मिलेगी। उन्होंने भाजपा पर महंगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप भी लगाया।
2027 उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए सपा-कांग्रेस गठबंधन की क्या स्थिति है?
सपा विधायक के अनुसार अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के बीच बातचीत जारी है और जल्द सीट बँटवारे की स्थिति स्पष्ट होगी। हालाँकि, मेहरोत्रा ने कांग्रेस को 2017 की लखनऊ मध्य सीट पर गठबंधन धर्म तोड़ने की याद दिलाते हुए चेताया कि पहले भरोसा साबित करना होगा।
अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा कब है और इसका क्या महत्व है?
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को अयोध्या जाएंगे, जहाँ वे विशिष्ट लोगों के साथ-साथ संत समाज, साधु और महात्माओं से मिलेंगे। यह दौरा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की व्यापक जनसंपर्क रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सपा विधायक ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
रविदास मेहरोत्रा ने फर्जी फॉर्म-7 जमा किए जाने के मुद्दे पर चुनाव आयोग से कार्रवाई की माँग की और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भाजपा जिस तरह आयोग का बचाव कर रही है, उससे गड़बड़ी का संदेह गहरा होता है।
राष्ट्र प्रेस
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