31 जुलाई 2026
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मायावती की माँग: कांशीराम नगर समेत महापुरुषों के नाम वाले जिलों के पुराने नाम 9 अक्टूबर तक बहाल करे यूपी सरकार

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मायावती की माँग: कांशीराम नगर समेत महापुरुषों के नाम वाले जिलों के पुराने नाम 9 अक्टूबर तक बहाल करे यूपी सरकार

सारांश

भदोही को संत रविदास नगर नाम मिलने के बाद BSP प्रमुख मायावती ने दाँव बढ़ाया — कांशीराम नगर समेत सभी बदले गए जिलों के मूल नाम 9 अक्टूबर तक बहाल करने की माँग। यह माँग 2027 चुनाव से पहले दलित-पिछड़ा राजनीति की नई परीक्षा है।

मुख्य बातें

BSP प्रमुख मायावती ने 31 जुलाई को एक्स पर पोस्ट कर यूपी सरकार से महापुरुषों के नाम वाले जिलों के मूल नाम बहाल करने की माँग की।
यूपी सरकार ने हाल ही में भदोही का नाम पुनः संत रविदास नगर किया, जिसका BSP ने स्वागत किया।
मायावती ने मान्यवर कांशीराम नगर (कासगंज), छत्रपति शाहूजी महाराज नगर और भीम नगर के मूल नाम बहाल करने की माँग की।
इन जिलों के नाम समाजवादी पार्टी (SP) की सरकार ने बदले थे, जिसे मायावती ने 'जातिवादी सोच' करार दिया।
मायावती ने 9 अक्टूबर — कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस — तक यह कार्य पूरा करने की अपील की।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 31 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार से माँग की कि भदोही को पुनः संत रविदास नगर नाम दिए जाने की तर्ज पर, BSP शासनकाल में महापुरुषों के नाम पर बनाए गए अन्य जिलों के मूल नाम भी बहाल किए जाएँ। उन्होंने यह कार्य मान्यवर कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस 9 अक्टूबर तक या उसी दिन पूरा करने की अपील की।

मायावती ने क्या कहा

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यूपी की वर्तमान सरकार ने भदोही को पुनः संत रविदास नगर जिले का दर्जा देकर सराहनीय कदम उठाया है, जिसके लिए BSP राज्य सरकार की आभारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जिला मूलतः BSP सरकार ने बनाया था और बाद में समाजवादी पार्टी (SP) की सरकार ने इसका नाम बदल दिया था।

उनके अनुसार, SP ने यह कदम 'संकीर्ण जातिवादी मानसिकता' के तहत उठाया था, जिसे जनता कभी नहीं भूलेगी। मायावती ने कहा कि इस तरह के नाम परिवर्तन दलित और पिछड़े वर्गों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हैं।

BSP शासन में बने जिले और बदले गए नाम

मायावती ने बताया कि उत्तर प्रदेश में BSP की चारों सरकारों के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जनहित में अनेक नए जिले, तहसीलें, विकास खंड तथा पुलिस ज़ोन व रेंज बनाए गए। इनमें से कई जिलों के नाम दलित एवं अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) के महान संतों, गुरुओं और महापुरुषों के नाम पर रखे गए।

इसी क्रम में संत रविदास नगर, छत्रपति शाहूजी महाराज नगर और भीम नगर जैसे जिले अस्तित्व में आए। SP सरकार ने इन सभी के नाम बदल दिए, जिसे मायावती ने 'पीडीए-विरोधी रवैया' करार दिया।

कांशीराम नगर की विशेष माँग

मायावती ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि ब्रज क्षेत्र में कासगंज के समुचित विकास के लिए BSP सरकार ने उसे जिला मुख्यालय का दर्जा देते हुए मान्यवर कांशीराम के नाम पर नया जिला बनाया था। SP सरकार ने इसका नाम बदलकर कासगंज कर दिया, जिसे मायावती ने दलित-पिछड़ा विरोधी कदम बताया।

उन्होंने माँग की कि यूपी सरकार 9 अक्टूबर — कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस — से पहले या उसी दिन इन सभी जिलों के मूल नाम बहाल करे, तो BSP इसके लिए आभारी रहेगी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट शुरू हो चुकी है और दलित-पिछड़ा वोट बैंक को लेकर सभी दलों में सक्रियता बढ़ रही है। गौरतलब है कि जिलों के नाम बदलने और बहाल करने का मुद्दा उत्तर प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक संघर्ष का केंद्र रहा है। BSP, SP और भारतीय जनता पार्टी (BJP) तीनों ही इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन तलाशती रही हैं।

मायावती की यह माँग आगामी हफ्तों में यूपी सरकार के रुख की परीक्षा लेगी — विशेष रूप से तब, जब 9 अक्टूबर की समयसीमा राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इससे SP के साथ प्रतिस्पर्धा में भी एक नया मोर्चा खुलेगा। 2027 से पहले यह नाम-राजनीति का खेल तीनों दलों के लिए जोखिम और अवसर दोनों है — और मायावती ने पहली चाल चल दी है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने यूपी सरकार से क्या माँग की है?
मायावती ने माँग की है कि BSP शासनकाल में महापुरुषों के नाम पर बनाए गए जिलों — जैसे कांशीराम नगर, छत्रपति शाहूजी महाराज नगर और भीम नगर — के मूल नाम 9 अक्टूबर तक बहाल किए जाएँ। यह माँग उन्होंने भदोही को पुनः संत रविदास नगर नाम दिए जाने के बाद उठाई।
संत रविदास नगर का नाम क्यों और कब बदला गया था?
BSP सरकार ने भदोही को राज्य मुख्यालय का दर्जा देते हुए संत रविदास नगर नाम से नया जिला बनाया था। बाद में समाजवादी पार्टी (SP) की सरकार ने इसका नाम बदलकर भदोही कर दिया, जिसे मायावती ने जातिवादी सोच का परिणाम बताया। हाल ही में यूपी की वर्तमान सरकार ने इसे पुनः संत रविदास नगर कर दिया।
कांशीराम नगर जिला कहाँ है और इसे क्यों बनाया गया था?
कांशीराम नगर ब्रज क्षेत्र में कासगंज इलाके में स्थित है। BSP सरकार ने इस क्षेत्र के समुचित विकास के लिए कासगंज को जिला मुख्यालय का दर्जा देते हुए मान्यवर कांशीराम के नाम पर यह जिला बनाया था। SP सरकार ने बाद में इसका नाम बदलकर कासगंज कर दिया।
9 अक्टूबर की समयसीमा क्यों दी गई है?
9 अक्टूबर BSP के संस्थापक मान्यवर कांशीराम का परिनिर्वाण दिवस है। मायावती ने माँग की है कि इस दिन तक या इसी दिन जिलों के मूल नाम बहाल किए जाएँ, ताकि यह कदम कांशीराम को सच्ची श्रद्धांजलि बन सके।
BSP शासन में उत्तर प्रदेश में कौन-कौन से नए जिले बने थे?
BSP की चारों सरकारों के दौरान उत्तर प्रदेश में अनेक नए जिले बनाए गए, जिनमें संत रविदास नगर, छत्रपति शाहूजी महाराज नगर, भीम नगर और कांशीराम नगर प्रमुख हैं। ये नाम दलित व OBC समाज के महान संतों और महापुरुषों पर रखे गए थे।
राष्ट्र प्रेस
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