क्या यूनिवर्सिटी और कॉलेज योगी सरकार के जीरो पावर्टी अभियान को 'धार' देंगे?

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क्या यूनिवर्सिटी और कॉलेज योगी सरकार के जीरो पावर्टी अभियान को 'धार' देंगे?

सारांश

योगी सरकार का नया कदम, जीरो पावर्टी अभियान, प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को साथ लाने जा रहा है। इससे निर्धन परिवारों के विकास में मदद मिलेगी और छात्रों को सामाजिक कार्यों में शामिल किया जाएगा। क्या यह पहल सच में प्रदेश की गरीबी कम कर पाएगी?

Key Takeaways

  • योगी सरकार का जीरो पावर्टी अभियान प्रदेश की गरीबी कम करने का प्रयास है।
  • विश्वविद्यालय और कॉलेज निर्धन परिवारों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
  • छात्रों को वालंटियर्स के रूप में काम करने का अवसर मिलेगा।
  • कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता के लिए माइक्रो-प्लानिंग की जाएगी।
  • सभी पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का 100 प्रतिशत कवरेज

लखनऊ, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। योगी सरकार प्रदेश को गरीबी मुक्त बनाने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसके तहत जीरो पावर्टी अभियान को प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से जोड़ा जाएगा। इस संबंध में संस्थानों के साथ एमओयू साइन किया जाएगा।

ये विश्वविद्यालय और कॉलेज जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित निर्धन परिवारों के समग्र विकास के लिए 10 से 15 ग्राम पंचायतों को गोद लेंगे। इन संस्थानों के एनएसएस, एनसीसी, एमएसडब्ल्यू समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र जीरो पावर्टी परिवार के सदस्यों को आजीविका, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण से संबंधित कार्यों में वालंटियर्स के रूप में शामिल करेंगे। इसका आरम्भ पायलट प्रोजेक्ट के तहत सबसे पहले राजधानी लखनऊ से किया जाएगा, और सफल परिणामों के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

प्रमुख सचिव नियोजन एवं जीरो पावर्टी अभियान के नोडल अधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत के चिन्हित परिवारों को विश्वविद्यालय और कॉलेज के छात्रों द्वारा आजीविका संवर्धन, कौशल विकास, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सर्वे किया जाएगा। इसे प्रभावी रूप से लागू करने के लिए संस्थानों के स्तर पर नोडल शिक्षक की तैनाती की जाएगी, जो पूरे अभियान की निगरानी करेंगे और ग्राम पंचायतों में चल रहे कार्यक्रमों का मार्गदर्शन करेंगे।

युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के एनएसएस, एनसीसी और एमएसडब्ल्यू (सोशल वर्क) समेत विभिन्न कोर्स में अध्ययनरत छात्रों को भी जोड़ा जाएगा। ये छात्र गांवों में जाकर जीरो पावर्टी परिवारों के सदस्यों की जरूरतों का आकलन करेंगे।

प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया कि कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए माइक्रो-प्लानिंग की जाएगी। युवाओं को स्किलिंग, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट लिंकेज से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, जीरो पावर्टी परिवार के युवाओं को आवेदन प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान की जाएगी ताकि पात्र परिवार किसी भी योजना से वंचित न रहें। इसके साथ ही, योग्य लाभार्थियों की नियमित मेंटरिंग और प्रगति की ट्रैकिंग भी की जाएगी।

इसके अलावा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का 100 प्रतिशत कवरेज मिले। इसे प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन के साथ विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का समन्वय किया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी स्तर पर एमओयू और त्रैमासिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि कार्यों की प्रगति का आकलन किया जा सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें।

Point of View

इससे संबंधित चुनौतियों का समाधान करना भी आवश्यक होगा। यदि यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो यह निश्चित रूप से प्रदेश में गरीबी के स्तर को कम करने में सहायक हो सकती है।
NationPress
18/01/2026

Frequently Asked Questions

जीरो पावर्टी अभियान क्या है?
जीरो पावर्टी अभियान का उद्देश्य निर्धन परिवारों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है।
इस योजना में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की क्या भूमिका होगी?
विश्वविद्यालय और कॉलेज निर्धन परिवारों के विकास के लिए ग्राम पंचायतों को गोद लेंगे और छात्र वालंटियर्स के रूप में काम करेंगे।
इस पहल से युवाओं को क्या लाभ होगा?
युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलेंगे।
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