क्या आप खुद का बिजनेस खड़ा करना चाहते हैं? सरकार की ये लोन योजनाएं आपकी मदद करेंगी!
सारांश
Key Takeaways
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के माध्यम से छोटे व्यवसायों को लोन मिलता है।
- सीजीटीएमएसई योजना से बिना गारंटी लोन की सुविधा है।
- सब्सिडी की मदद से ब्याज दर में कमी आ सकती है।
- डिजिटल लोन प्रक्रिया से लोन जल्दी मंजूर होता है।
- फंड ऑफ फंड्स योजना से एमएसएमई को निवेश मिलता है।
नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये देश की जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देते हैं और 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। इस क्षेत्र का सशक्त होना भारत के आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है, परंतु आसान और सस्ते कर्ज तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार ने एमएसएमई के लिए कई बिजनेस लोन योजनाएं लागू की हैं, जिनका उद्देश्य उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) 2015 में शुरू की गई थी। इस योजना के तहत गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि छोटे व्यवसायों को 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है। मुद्रा लोन को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: शिशु के तहत 50 हजार रुपये तक, किशोर के तहत 50,001 रुपये से 5 लाख रुपये तक, और तरुण के तहत 5 लाख से 10 लाख रुपये तक का लोन प्राप्त किया जा सकता है। ये लोन बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, एनबीएफसी और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों द्वारा दिए जाते हैं।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) प्रधानमंत्री रोजगार योजना और ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम के विलय से बना है। इसका लक्ष्य युवाओं और पारंपरिक कारीगरों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए 25 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध है, जिसमें 15 से 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी दी जाती है।
क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) योजना को एमएसएमई मंत्रालय और सिडबी (एसआईडीबीआई) ने मिलकर स्थापित किया है। इस योजना के तहत 2 करोड़ रुपये तक का लोन बिना किसी कोलैटरल या थर्ड पार्टी गारंटी के प्रदान किया जाता है। 5 लाख रुपये तक के लोन पर 85 प्रतिशत तक की गारंटी कवरेज उपलब्ध है, जबकि बड़े लोन पर यह 75 प्रतिशत तक होती है।
क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी स्कीम (सीएलसीएसएस) विशेष रूप से उन एमएसएमई के लिए है जो नई और आधुनिक तकनीक अपनाना चाहते हैं। इस योजना के तहत 1 करोड़ रुपये तक के लोन पर 15 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स अपनी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा सकती हैं।
इन सभी के अतिरिक्त, एमएसएमई में इक्विटी की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने फंड ऑफ फंड्स योजना की शुरुआत की है। इस स्कीम का कुल फंड साइज 50 हजार करोड़ रुपये है, जिसके माध्यम से ग्रोथ की संभावना रखने वाले एमएसएमई को वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी के जरिए निवेश उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे शेयर बाजार में लिस्ट हो सकें और निजी निवेश को आकर्षित कर सकें।
सिडबी (एसआईडीबीआई) की मेक इन इंडिया लोन फॉर एंटरप्राइजेज (स्माइल यानी एसएमआईएलई) योजना के तहत एमएसएमई को सॉफ्ट लोन प्रदान किया जाता है, जिसका उद्देश्य छोटे उद्यमों को आधुनिक तकनीक अपनाने और विस्तार में सहायता करना है। इस योजना के अंतर्गत मशीनरी के लिए न्यूनतम 10 लाख रुपये और अन्य आवश्यकताओं के लिए 25 लाख रुपये तक का लोन मिलता है, जिसकी चुकाने की अवधि 10 साल तक हो सकती है।
सरकार ने '59 मिनट में एमएसएमई लोन' योजना के अंतर्गत लोन अप्रूवल प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। इस स्कीम में 1 लाख से 5 करोड़ रुपये तक का लोन मिलता है और ब्याज दर 8.5 प्रतिशत से शुरू होती है। आईटी और जीएसटी कंप्लायंट व्यवसाय इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण लोन जल्दी मंजूर और जारी होता है।
सरकार की ये लोन योजनाएं एमएसएमई को बिना गारंटी कर्ज, क्रेडिट गारंटी, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और नए व्यवसाय की शुरुआत में सहायता करती हैं। इन योजनाओं का सही उपयोग करके उद्यमी न केवल अपने कारोबार को सशक्त कर सकते हैं, बल्कि रोजगार सृजन और देश की आर्थिक वृद्धि में भी योगदान कर सकते हैं।