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क्या माइक्रोसॉफ्ट से लेकर एनवीडिया तक, दिग्गज कंपनियों ने भारत में एआई में बड़ा निवेश करने की योजना बनाई है?

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क्या माइक्रोसॉफ्ट से लेकर एनवीडिया तक, दिग्गज कंपनियों ने भारत में एआई में बड़ा निवेश करने की योजना बनाई है?

सारांश

भारत में एआई की दुनिया में बड़ी हलचल है, बड़ी टेक कंपनियों ने भारी निवेश की घोषणाएं की हैं। जानें कौन-कौन सी कंपनियों ने क्या-क्या योजनाएं बनाई हैं और इससे भारत की टेक्नोलॉजी क्षेत्र में क्या बदलाव आएगा।

मुख्य बातें

भारत में एआई में बड़े निवेश की घोषणाएं हो रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत को तकनीकी महाशक्ति मान रही हैं।
रिलायंस और अदाणी जैसे बड़े समूह भारी निवेश कर रहे हैं।

नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। दुनिया की प्रमुख तकनीकी कंपनियों ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रोजेक्ट्स में सैकड़ों अरब डॉलर का निवेश करने का आश्वासन दिया है। यह ऐलान उस समय हुआ जब भारत में एक महत्वपूर्ण एआई समिट का आयोजन किया गया, जिसमें दुनिया के प्रमुख लीडर्स और शीर्ष उद्योग विशेषज्ञ शामिल हुए।

यह निवेश प्रतिबद्धताएं उस समय बढ़ी हैं, जब विश्वभर की सरकारें और कंपनियां अपनी एआई क्षमताओं को तेजी से विकसित करने की दिशा में प्रयासरत हैं।

अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अल्फाबेट जैसी वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां इस वर्ष एआई से संबंधित पूंजीगत खर्च पर लगभग 700 अरब डॉलर तक खर्च करने की योजना बना रही हैं।

भारत में बड़े औद्योगिक समूहों ने भी महत्त्वपूर्ण निवेश योजनाओं का ऐलान किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कथित तौर पर डेटा सेंटर और संबंधित अवसंरचना पर 110 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है।

अदाणी ग्रुप ने अगले दस वर्षों में एआई आधारित डेटा सेंटर में 100 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना पेश की है।

सम्मेलन के दौरान कई अमेरिकी कंपनियों ने भी बड़े निवेश की घोषणाएँ कीं। माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि वह इस दशक के अंत तक ग्लोबल साउथ देशों में एआई प्रोजेक्ट्स पर 50 अरब डॉलर का निवेश करने की दिशा में अग्रसर है।

ओपनएआई और चिप निर्माता एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज (एएमडी) ने भारत में एआई क्षमताओं को मजबूती प्रदान करने के लिए टाटा ग्रुप के साथ सहयोग की घोषणा की है।

अमेरिका की एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकस्टोन ने बताया कि उसने भारतीय एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी नेयसा में 600 मिलियन डॉलर की इक्विटी फंडिंग राउंड में भाग लिया है।

इस आयोजन ने भारत की वैश्विक टेक्नोलॉजी महाशक्ति बनने की आकांक्षा को उजागर किया। देश ने अपनी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त बनाने के लिए 18 अरब डॉलर के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है।

इस बीच, अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है, जिसका लक्ष्य टैरिफ कम करना और आर्थिक सहयोग बढ़ाना है।

सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने 'पैक्स सिलिका' समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह अमेरिका के नेतृत्व में शुरू की गई पहल है, जिसका उद्देश्य सिलिकॉन आधारित तकनीकों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना है।

कार्यक्रम में एआई क्षेत्र के कई प्रमुख वैश्विक नेता शामिल हुए, जिनमें ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन, अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई, एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमोदेई और गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हासाबिस शामिल थे।

चिप निर्माता दिग्गज एनवीडिया ने भी घोषणा की है कि वह भारत में वेंचर कैपिटल फर्मों के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत कर रही है, ताकि देश के उभरते टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में भी इसे आगे बढ़ाएगा।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में एआई में कौन-कौन सी कंपनियाँ निवेश कर रही हैं?
भारत में माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, अमेजन, मेटा, और अल्फाबेट जैसी कंपनियाँ एआई प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रही हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का एआई में निवेश कितना है?
रिलायंस इंडस्ट्रीज डेटा सेंटर और संबंधित ढांचे पर 110 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है।
अदाणी ग्रुप का एआई में निवेश क्या है?
अदाणी ग्रुप ने अगले दस वर्षों में एआई आधारित डेटा सेंटर में 100 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है।
राष्ट्र प्रेस
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