क्या भारत में औद्योगिक विकास दर जुलाई में चार महीनों के उच्चतम स्तर 3.5 प्रतिशत पर रही?

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क्या भारत में औद्योगिक विकास दर जुलाई में चार महीनों के उच्चतम स्तर 3.5 प्रतिशत पर रही?

सारांश

भारत में औद्योगिक विकास दर जुलाई में 3.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो चार महीनों का उच्चतम स्तर है। यह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के मजबूत प्रदर्शन का परिणाम है। क्या यह आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत है?

Key Takeaways

  • जुलाई में औद्योगिक विकास दर 3.5 प्रतिशत पर पहुंच गई।
  • मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र ने 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
  • बिजली उत्पादन में 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • खनन क्षेत्र में 7.2 प्रतिशत की कमी आई।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारत में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार पर औद्योगिक विकास दर जुलाई में चार महीनों के उच्चतम स्तर 3.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इसका मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन है। यह जानकारी सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा गुरुवार को साझा की गई।

इससे पहले, देश में औद्योगिक विकास दर जून में केवल 1.5 प्रतिशत थी।

आंकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र ने सालाना आधार पर जुलाई में 5.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र युवाओं को गुणवत्तापूर्ण रोजगार प्रदान करता है, जो विश्वविद्यालयों और इंजीनियरिंग संस्थानों से निकलते हैं।

जुलाई में बिजली उत्पादन में 0.6 प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखने को मिली। हालांकि, खनन क्षेत्र में भारी बारिश के कारण (-) 7.2 प्रतिशत की गिरावट आई।

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 23 उद्योग समूहों में से 14 ने पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में सकारात्मक वृद्धि का प्रदर्शन किया है।

जुलाई में 'मैन्युफैक्चर ऑफ बेसिक मेटल' उद्योग समूह ने 12.7 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की, जिसमें स्टील उत्पाद शामिल हैं। 'मैन्युफैक्चर ऑफ इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट' में 15.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर्स, कंट्रोल पैनल और ट्रांसफार्मर शामिल हैं। 'मैन्युफैक्चर ऑफ अदर नॉनमिटेलिक मिनरल प्रोडक्ट्स' में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें सीमेंट शामिल है।

उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़े दर्शाते हैं कि पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन जुलाई में 5 प्रतिशत की मजबूती के साथ बढ़ा। इसमें कारखानों में उपयोग होने वाली मशीनें शामिल हैं। यह क्षेत्र वास्तविक निवेश को दर्शाता है, जिसका भविष्य में रोजगार सृजन और आय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स गुड्स जैसे रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और टीवी सेट का उत्पादन इस महीने 7.7 प्रतिशत बढ़ा, जो इन उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

राजमार्गों, रेलवे और बंदरगाहों पर चल रही बड़ी सरकारी परियोजनाओं के चलते इन्फ्रास्ट्रक्चर और निर्माण क्षेत्र में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि भारत में औद्योगिक विकास दर का बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है। यह न केवल रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करता है, बल्कि यह देश की आर्थिक स्थिरता का भी संकेत है। हमें उम्मीद है कि यह वृद्धि भविष्य में भी जारी रहेगी।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

भारत में औद्योगिक विकास दर कैसे मापी जाती है?
भारत में औद्योगिक विकास दर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आधार पर मापी जाती है, जो विभिन्न उद्योगों के उत्पादन स्तर को दर्शाता है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव है?
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है, क्योंकि यह उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार प्रदान करता है और आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
क्या बिजली उत्पादन में वृद्धि भारत की औद्योगिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है?
हां, बिजली उत्पादन में वृद्धि औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बिना मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाएं सुचारू रूप से नहीं चल सकतीं।
खनन क्षेत्र में गिरावट का असर औद्योगिक विकास पर क्या है?
खनन क्षेत्र में गिरावट से औद्योगिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि यह आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति को प्रभावित करता है।
भारत में औद्योगिक विकास दर में वृद्धि के क्या कारण हैं?
औद्योगिक विकास दर में वृद्धि के कारणों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन, सरकारी परियोजनाएं और बढ़ती मांग शामिल हैं।