क्या भारत ने ऑटो मैन्युफैक्चरिंग में मजबूत प्रगति की है, निर्यात के बड़े अवसर मौजूद हैं?
सारांश
Key Takeaways
- भारत ने ऑटो मैन्युफैक्चरिंग में मजबूत प्रगति की है।
- निर्यात के लिए कई अवसर उपलब्ध हैं।
- नीति आयोग ने नई रिपोर्ट जारी की है।
- मोटर वाहन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ रही है।
- गुणवत्ता मानकों में सुधार की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने ऑटो कंपोनेंट, मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है और इस क्षेत्र में निर्यात के लिए कई अवसर उपलब्ध हैं। यह जानकारी नीति आयोग द्वारा मंगलवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में दी गई।
नीति आयोग ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) के लिए 'ट्रेड वॉच क्वार्टरली' का नवीनतम संस्करण नई दिल्ली में पेश किया है। इस त्रैमासिक अंक का मुख्य विषय भारत का मोटर वाहन निर्यात है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत ने ऑटो कलपुर्जों के साथ-साथ मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर निर्माण में भी महत्वपूर्ण विकास किया है। यह देश की बढ़ती विनिर्माण क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता का परिचायक है। वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में बढ़ते एकीकरण और विकसित एवं उभरते बाजारों में व्यापक निर्यात उपस्थिति के साथ, मोटर वाहन क्षेत्र निरंतर विस्तार पा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने मोटर वाहन निर्यात के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन 2.2 ट्रिलियन डॉलर के बढ़ते वैश्विक ऑटोमोटिव निर्यात बाजार में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अभी भी पर्याप्त अवसर मौजूद हैं।
इस रिपोर्ट में भारत के निर्यात और हितधारकों के साथ परामर्श पर आधारित विश्लेषण में प्रतिस्पर्धात्मकता, वैश्विक स्थिति, द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करने और उच्च मांग वाले क्षेत्रों की ओर उत्पादन को निर्देशित करने के लिए नीतिगत उपायों का सुझाव दिया गया है।
इसमें गुणवत्ता मानक और प्रमाणन प्रणालियों में सुधार, नवीन प्रौद्योगिकी को अपनाने और बाजार विविधीकरण के साथ-साथ वैश्विक ऑटोमोटिव आपूर्ति श्रृंखलाओं में संबंधों को बढ़ावा देने का भी सुझाव दिया गया है।
नीति आयोग के सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी ने कहा कि ट्रेड वॉच क्वार्टरली का नवीनतम संस्करण बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत के व्यापार प्रदर्शन का व्यापक और आंकड़ों पर आधारित मूल्यांकन प्रदान करता है। इसमें भारत के ऑटोमोटिव निर्यात की संरचना और प्रतिस्पर्धात्मकता पर विशेष ध्यान दिया गया है।
डॉ. विरमानी ने भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने पर जोर दिया और कहा कि यह विशेष रूप से ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक विकास और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण होगा।