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क्या कर व्यवस्था पर एशिया में सबसे ज्यादा विश्वास है, भारत सबसे आगे?

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क्या कर व्यवस्था पर एशिया में सबसे ज्यादा विश्वास है, भारत सबसे आगे?

सारांश

भारत में कर व्यवस्था पर विश्वास सबसे अधिक है, जहां नागरिक जिम्मेदारी के रूप में टैक्स को देखते हैं। एसीसीए और ओईसीडी की रिपोर्ट से पता चलता है कि भारतीयों की नैतिक भावना और सरकारी प्रणाली पर भरोसा मजबूत है। रिपोर्ट में 29 देशों के सर्वेक्षण के परिणाम शामिल हैं।

मुख्य बातें

भारत में 45% लोग मानते हैं कि कर जनहित कार्यों में खर्च होता है।
41% नागरिकों के लिए कर देना बोझ नहीं, बल्कि योगदान है।
68% लोग टैक्स चोरी को गलत मानते हैं।
80% भारतीय टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए अतिरिक्त कर देने को तैयार हैं।

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दुनिया में कर (टैक्स) व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास सबसे अधिक एशिया में देखा गया है। इस संदर्भ में भारत विशेष रूप से अग्रणी है, जहां नागरिकों में कर चुकाने की नैतिक भावना और सरकारी वित्त व्यवस्था पर भरोसा मजबूत है। सोमवार को एसीसीए, आईएफएसी, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड (सीए एएनजेड) और ओईसीडी द्वारा संयुक्त रूप से जारी एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत के लगभग 45 प्रतिशत नागरिक मानते हैं कि सरकार द्वारा इकट्ठा किया गया कर जनहित के कार्यों में व्यय होता है। जबकि 41 प्रतिशत ने बताया कि कर देना उनके लिए कोई बोझ नहीं, बल्कि अपने समाज और देश के प्रति योगदान है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत में टैक्स को नागरिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 68 प्रतिशत लोग किसी भी स्थिति में टैक्स चोरी को सही नहीं ठहराएंगे, चाहे उन्हें ऐसा करने का अवसर ही क्यों न मिले। यह भारतीयों के उच्च नैतिक मूल्यों को दर्शाता है।

सर्वे में यह भी सामने आया कि भारतीय पर्यावरण और समाज के दीर्घकालिक विकास के लिए टैक्स देने के लिए तैयार हैं।

लगभग 80 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि वे टिकाऊ विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए थोड़ा या ज्यादा अतिरिक्त कर देने के लिए भी तैयार हैं। यह दर्शाता है कि लोग कर नीति को देश और समाज के भविष्य से जोड़कर देखते हैं।

एसीसीए के भारत निदेशक मोहम्मद साजिद खान ने कहा कि भारत के परिणाम पूरे एशिया के रुझान को दिखाते हैं। एशिया में लोग कर व्यवस्था को न्यायपूर्ण, पारदर्शी और जनकल्याण से संबंधित मानते हैं। भारत में लोगों की अतिरिक्त टैक्स देने की इच्छा यह दर्शाती है कि कर नीति और समाज के लक्ष्य एक दिशा में बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट में शामिल 29 देशों के सर्वेक्षण में पाया गया कि एशिया के लोग अपने टैक्स सिस्टम को अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक निष्पक्ष और उपयोगी मानते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में तो लगभग 65 प्रतिशत लोगों ने टैक्स को समाज के लिए योगदान माना है, न कि एक खर्च।

एसीसीए की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेलेन ब्रांड ओबीई ने कहा कि एशिया में कर व्यवस्था पर जनता का भरोसा पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है। इस भरोसे को बनाए रखने के लिए सरकारों को लगातार ईमानदारी और पारदर्शिता दिखानी होगी।

ओईसीडी के कर नीति और प्रशासन केंद्र की निदेशक मनल कोर्विन ने कहा कि यह एशिया में कर नैतिकता पर शुरू किए गए नए अध्ययन का पहला चरण है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हम सरकारों के साथ मिलकर इन परिणामों पर चर्चा करेंगे ताकि पूरे एशिया में टैक्स सिस्टम में विश्वास के कारकों और विश्वास बढ़ाने के सर्वोत्तम तरीकों की पहचान की जा सके। इससे सरकारों को अधिक निष्पक्ष, अधिक उत्तरदायी और अधिक सुसंगत टैक्स सिस्टम तैयार करने में मदद मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत में कर नीति और नागरिकों की नैतिक जिम्मेदारी के बीच एक मजबूत संबंध है। यह रिपोर्ट न केवल भारत, बल्कि पूरे एशिया के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जिससे यह संकेत मिलता है कि लोग अपने समाज और देश के लिए प्रतिबद्ध हैं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में कर व्यवस्था पर विश्वास क्यों है?
भारत में लोग कर चुकाने को नैतिक जिम्मेदारी मानते हैं और सरकारी वित्त व्यवस्था पर भरोसा करते हैं।
क्या भारतीय टैक्स चोरी को स्वीकार करते हैं?
68 प्रतिशत भारतीय किसी भी हालात में टैक्स चोरी को सही नहीं ठहराते।
भारत के लोग टैक्स क्यों देते हैं?
भारतीय नागरिक टैक्स को समाज और देश के विकास के लिए योगदान मानते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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