क्या भारतीय बाजारों को घरेलू निवेशकों का सहारा मिला है, म्यूचुअल फंड ने निवेश को कैसे बढ़ाया?
सारांश
Key Takeaways
- म्यूचुअल फंड्स का निवेश 20.6 प्रतिशत बढ़ा है।
- बीमा कंपनियों की संपत्ति 12.6 प्रतिशत बढ़ी है।
- पेंशन फंड की संपत्तियों में 66 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
- वैकल्पिक निवेश फंडों की संपत्ति में 37 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
- विदेशी निवेशकों की स्थिति कमजोर बनी हुई है।
मुंबई, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2025 में देश के प्रमुख घरेलू संस्थागत निवेशकों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी संपत्तियों में 12 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि की। इस बात से यह स्पष्ट है कि विदेशी निवेशकों की गति धीमी होने के बावजूद भारतीय इक्विटी और डेट मार्केट्स को घरेलू स्तर पर लगातार मजबूत समर्थन मिल रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, इस वृद्धि में म्यूचुअल फंड्स ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। म्यूचुअल फंड की शेयरों में निवेश की गई संपत्ति 20.6 प्रतिशत बढ़कर 52.25 लाख करोड़ रुपए हो गई, जो कि एक वर्ष पहले 43.34 लाख करोड़ रुपए थी। इक्विटी और डेट को मिलाकर म्यूचुअल फंड की कुल संपत्ति 23.34 प्रतिशत बढ़कर 73.21 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
आंकड़ों के अनुसार, म्यूचुअल फंड्स ने वर्ष 2025 में लगभग 4.88 लाख करोड़ रुपए के भारतीय शेयर खरीदे, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 4.3 लाख करोड़ रुपए था।
बीमा कंपनियों और घरेलू पेंशन फंडों की इक्विटी संपत्तियों में भी वृद्धि हुई, जिसमें बीमा कंपनियों की इक्विटी संपत्ति 12.6 प्रतिशत बढ़कर 26.81 लाख करोड़ रुपए हो गई। वहीं, पेंशन फंड की इक्विटी संपत्तियों में 66 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि देखी गई और यह 4.38 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इन दोनों ने मिलकर साल भर में 1.4 लाख करोड़ रुपए से अधिक के भारतीय शेयर खरीदे।
इक्विटी और डेट को मिलाकर बीमा और पेंशन फंड की कुल संपत्ति में क्रमशः 12 प्रतिशत और 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह वृद्धि लगातार निवेश और नियमों में दी गई ढील के कारण हुई। पेंशन नियामक ने दूसरे और तीसरे स्तर की परिसंपत्तियों के लिए इक्विटी लिमिट को बढ़ाने की अनुमति दी, वहीं बीमा नियामक ने सीमित दायरे में इक्विटी निवेश की छूट दी।
वैकल्पिक निवेश फंडों और बैंकों की इक्विटी परिसंपत्तियों में भी तेज वृद्धि देखी गई। वैकल्पिक निवेश फंड की इक्विटी संपत्ति 37 प्रतिशत और बैंकों की 33 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, इक्विटी और डेट मिलाकर इनकी कुल संपत्ति में क्रमशः 23 प्रतिशत और 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैकल्पिक निवेश फंड में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि हाई-नेट-वर्थ वाले निवेशक और परिवार आधारित निवेश समूह बेहतर मुनाफे के लिए सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं।
इसके विपरीत, विदेशी निवेशकों की स्थिति कमजोर रही। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की इक्विटी संपत्ति में केवल 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 74.26 लाख करोड़ रुपए तक पहुंची। इक्विटी और डेट निवेश को मिलाकर उनकी कुल संपत्ति केवल 4.8 प्रतिशत बढ़कर 81.4 लाख करोड़ रुपए हुई।
वर्ष 2025 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगभग 1.66 लाख करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जिसका कारण शेयरों के उच्च मूल्यांकन, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और भारतीय सामानों पर लगाए गए टैरिफ में बढ़ोतरी रहा।