क्या महिला की सुरक्षा संवैधानिक अधिकार है? हुबली पुलिस की कथित बर्बरता पर वृंदा आदिगे का बयान

Click to start listening
क्या महिला की सुरक्षा संवैधानिक अधिकार है? हुबली पुलिस की कथित बर्बरता पर वृंदा आदिगे का बयान

सारांश

हुबली में पुलिस द्वारा एक महिला कार्यकर्ता पर बर्बरता का आरोप लगा है। महिला अधिकार कार्यकर्ता वृंदा आदिगे ने इस घटना को अस्वीकार्य बताते हुए देश में महिलाओं के सुरक्षा अधिकारों की आवश्यकता पर जोर दिया है। जानें इस घटना के पीछे के तथ्य और वृंदा का नजरिया।

Key Takeaways

  • महिला सुरक्षा का संवैधानिक अधिकार होना चाहिए।
  • पुलिस को नागरिकों की सुरक्षा करनी चाहिए।
  • इस तरह की घटनाएँ मानवाधिकार का उल्लंघन हैं।
  • महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का भूमिका महत्वपूर्ण है।
  • सभी को इस मामले में जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

बेंगलुरु, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महिला अधिकार कार्यकर्ता वृंदा आदिगे ने बुधवार को कर्नाटक के हुबली शहर में पुलिस द्वारा भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता पर कथित हमले और उसके कपड़े उतारने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे अस्वीकृत और भयानक बताया है।

उन्होंने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि महिला किस राजनीतिक पार्टी की है, क्योंकि महत्वपूर्ण यह है कि वह इस देश की नागरिक है और उसे संवैधानिक अधिकारों के तहत सुरक्षा प्राप्त होनी चाहिए।

वृंदा आदिगे ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से चर्चा करते हुए कहा, "यह बिलकुल अस्वीकृत और भयानक है क्योंकि हम उन पुलिसवालों और पुलिसकर्मियों की बात कर रहे हैं जिन्हें कानून लागू करने की ट्रेनिंग दी गई है। वे खुद कानून नहीं बना सकते।"

उन्होंने आगे कहा, “पुलिस वाहन के अंदर नागरिकों के सामने एक महिला के कपड़े उतारना, उसके साथ बदसलूकी करना और उसे पीटना पूरी तरह गलत है। मैंने कहीं सुना कि उसने खुद अपने कपड़े उतारने की कोशिश की। ठीक है, लेकिन आप पुलिस हैं और आपको ऐसी स्थितियों को संभालने की ट्रेनिंग मिली है। महिला पुलिसकर्मियों ने उसके चारों ओर घेरा क्यों नहीं बनाया? वे वहां क्या कर रही थीं? वे सब बस देख रही थीं। यह दिखाता है कि भले ही उन्हें ट्रेनिंग मिली हो, वे महिलाओं की इज्जत की रक्षा करने के लिए तैयार नहीं हैं। वे घबरा गईं। तो उन्हें पुलिस के तौर पर किस तरह की ट्रेनिंग मिल रही है? क्या उन्हें नहीं पता कि एक महिला की देखभाल कैसे करनी है? आप हर तरह के बहाने बना सकते हैं, लेकिन उनमें से कोई भी इस व्यवहार को सही नहीं ठहराता।”

वृंदा आदिगे ने बताया कि ऐसी स्थितियों में आम लोग भी अक्सर ज्यादा जिम्मेदारी से काम करते हैं। आम नागरिक के तौर पर, कभी-कभी हम ऐसी घटनाएं देखते हैं जहां कोई महिला, जिसे शायद मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हों, खुद को निर्वस्त्र करने की कोशिश करती है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में, दो या तीन लोग तुरंत उसकी गरिमा की रक्षा के लिए आगे आते हैं। तो पुलिस क्या कर रही थी? यहां जो हुआ वह मानवाधिकार और महिलाओं के अधिकारों दोनों का उल्लंघन है।

पुलिस कमिश्नर के डिटेल्स इकट्ठा करने वाले बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "पूरी जानकारी बाद में इकट्ठा की जा सकती है। पहले, जो भी लोग वहां मौजूद थे, उन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए। फिर जांच की जाए। किसी नागरिक के साथ इस तरह से बुरा बर्ताव करने का कोई बहाना नहीं हो सकता। संवैधानिक गारंटी को पुलिस को बनाए रखना चाहिए और उनकी रक्षा करनी चाहिए। वे बिल्कुल भी बहाने नहीं बना सकते।"

Point of View

यह घटना स्पष्ट रूप से महिलाओं के अधिकारों और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। पुलिस की जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों की सुरक्षा करें और ऐसी घटनाओं को रोकें। इस मामले में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
NationPress
08/01/2026

Frequently Asked Questions

हुबली पुलिस द्वारा कौन सी घटना हुई?
हुबली में पुलिस ने भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता पर कथित तौर पर हमला किया और उसके कपड़े उतार दिए।
वृंदा आदिगे ने इस घटना पर क्या कहा?
वृंदा आदिगे ने इसे अस्वीकार्य और भयानक बताया और कहा कि पुलिस को ऐसी स्थितियों को संभालने की ट्रेनिंग मिली है।
क्या यह घटना मानवाधिकार का उल्लंघन है?
हाँ, यह घटना मानवाधिकार और महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन है।
Nation Press