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क्या अनौपचारिक चीनी प्रतिबंध भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को नुकसान पहुँचा रहे हैं?

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क्या अनौपचारिक चीनी प्रतिबंध भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को नुकसान पहुँचा रहे हैं?

सारांश

क्या चीन के अनौपचारिक व्यापार प्रतिबंध भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को प्रभावित कर रहे हैं? जानिए इस विषय पर आईसीईए की चेतावनी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।

मुख्य बातें

चीन के अनौपचारिक प्रतिबंधों का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव है।
भारत को चीन पर निर्भरता को कम करने की आवश्यकता है।
स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी हो रही है।
उपकरणों के स्थानीय उत्पादन की लागत अधिक है।
सरकार को तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 18 जुलाई (राष्ट्र प्रेस) प्रमुख उद्योग संगठन इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने कहा है कि चीन द्वारा पूंजीगत उपकरणों, महत्वपूर्ण खनिजों और कुशल तकनीकी कर्मियों पर लगाए गए अनौपचारिक व्यापार प्रतिबंध भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (जीवीसी) में भारत के गहन एकीकरण को बाधित कर सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को भेजे गए पत्र में, आईसीईए ने यह बताया कि इस क्षेत्र में चीनी सरकार द्वारा योजनाबद्ध और क्रमिक तरीके से तीन विशेष चोकप्वाइंट्स का प्रबंधन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने और बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की क्षमता को कम करना है।

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र पिछले एक दशक में मजबूत वृद्धि दर्ज कर चुका है, जो दूरदर्शी नीतिगत हस्तक्षेपों, निजी क्षेत्र के निवेश और भारत की ओर जीवीसी के स्थानांतरण से प्रेरित है।

इस वृद्धि में सबसे आगे स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग है, जिसका उत्पादन वित्त वर्ष 25 में 64 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें निर्यात का योगदान 38 प्रतिशत बढ़कर 24.1 अरब डॉलर हो गया है।

बढ़ते स्मार्टफोन निर्यात के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स वित्त वर्ष 25 में इंजीनियरिंग सामान और पेट्रोलियम के बाद देश के तीसरे सबसे बड़े निर्यात के रूप में उभरा है।

चीन उच्च क्षमता वाले उपकरणों और विशिष्ट मशीनरी का प्रमुख वैश्विक स्रोत बना हुआ है, जो तीन दशकों के औद्योगिक क्लस्टरिंग और गहन जीवीसी के एकीकरण का परिणाम है।

आईसीईए ने अपने पत्र में कहा, "स्मार्टफोन सहित इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए, इसने पूंजीगत उपकरणों के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भरता पैदा कर दी है।"

उद्योग संगठन ने आरोप लगाया कि एक साल से अधिक समय से चीन भारत को भारी-भरकम बोरिंग मशीनों और सौर उपकरणों सहित कई क्षेत्रों में उपकरणों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रहा है और अब पिछले 8 महीनों में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

आईसीईए ने कहा, "इन व्यवधानों के कारण परिचालन अक्षमताएँ उत्पन्न हो रही हैं, पैमाने पर उत्पादन प्रभावित हो रहा है और उत्पादन लागत बढ़ रही है, क्योंकि इन उपकरणों का स्थानीय स्तर पर या जापान या कोरिया के सहयोग से उत्पादन करना चीनी आयात की तुलना में 3-4 गुना अधिक महंगा है।"

आईसीईए ने अपने पत्र में कहा, "हाल ही में, उन्होंने चीनी, ताइवानी और भारतीय कंपनियों में कार्यरत चीनी मूल के पेशेवरों से कहा है कि वे अपने कार्य-स्थल के बीच में ही तुरंत चीन लौट आएं। ऐसे पेशेवरों की संख्या सैकड़ों में है।"

उद्योग संगठन ने कहा कि वह पूंजीगत उपकरणों, महत्वपूर्ण खनिजों और कुशल तकनीकी कर्मियों पर अनौपचारिक चीनी प्रतिबंधों के प्रभाव को दूर करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा करने हेतु सरकार के साथ एक तत्काल बैठक की मांग कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश की आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर हो सकता है। सरकार को इस मामले में तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन के व्यापार प्रतिबंधों का भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स पर क्या असर होगा?
ये प्रतिबंध भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जिससे उत्पादन में बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
भारत के लिए स्मार्टफोन निर्यात का महत्व क्या है?
स्मार्टफोन निर्यात भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान देता है।
राष्ट्र प्रेस
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