क्या चीन के आयात ने इंडोनेशिया की स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को संकट में डाल दिया है?
सारांश
Key Takeaways
- चीन का आयात इंडोनेशिया के कुल आयात का 35.5 प्रतिशत है।
- स्थानीय एमएसएमई उत्पादन बंद कर रहे हैं।
- चीन की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता सरकारी औद्योगिक योजनाओं पर निर्भर है।
- कई चीनी सामान बिना उचित प्रमाणन के इंडोनेशिया में प्रवेश करते हैं।
- एंटी-डंपिंग शुल्क का प्रवर्तन कमजोर है।
नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। चीन से बढ़ते सस्ते आयात के चलते इंडोनेशिया की स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और एमएसएमई को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जो आगे चलकर देश की औद्योगिक क्षमता पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। यह बात एक रिपोर्ट में स्पष्ट की गई है।
हाल के व्यापारिक आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि इंडोनेशिया के कुल आयात में चीन का हिस्सा अब एक तिहाई से अधिक हो चुका है, जो व्यापारिक संबंधों में बढ़ते असंतुलन को दर्शाता है।
फाइनेंशियल पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में चीन से आयात लगभग 6.37 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो इंडोनेशिया के कुल आयात का लगभग 35.5 प्रतिशत है।
इंडोनेशिया के विभिन्न हिस्सों जैसे सुराबाया के पारंपरिक बाजारों से लेकर जकार्ता के ऑनलाइन स्टोर तक, कई लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) उत्पादन बंद कर रहे हैं और चीन में निर्मित सामानों की बिक्री की ओर बढ़ रहे हैं।
ये उद्यम इंडोनेशिया के लगभग 90 से 95 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देने का काम करते हैं, और मैन्युफैक्चरिंग से केवल बिक्री की ओर उनका यह कदम इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
इंडोनेशिया के एमएसएमई मंत्री, ममन अब्दुर्रहमान ने चेतावनी दी है कि बड़ी संख्या में उद्यमी स्थानीय उत्पादन बंद कर रहे हैं क्योंकि वे चीनी आयात की कम कीमतों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं।
इसके बजाय, कई उद्यमी तैयार माल आयात करके अपना जीवन यापन कर रहे हैं, जिससे इंडोनेशिया की घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाएं कमजोर हो रही हैं।
चीन की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता दशकों से चली आ रही सरकारी औद्योगिक योजना, बड़े पैमाने के कारखानों और आपस में जुड़े आपूर्ति नेटवर्क पर निर्भर है।
इससे चीनी उत्पादकों को अधिकांश इंडोनेशियाई कंपनियों, विशेषकर छोटे व्यवसायों की तुलना में तेजी से और सस्ते में सामान बनाने की सुविधा मिलती है।
व्यापार और नियामक नियमों के कमजोर प्रवर्तन से समस्या और भी गंभीर हो जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन से आयातित कई सामान उचित लेबलिंग, प्रमाणन या हलाल एवं गुणवत्ता मानकों के अनुपालन के बिना इंडोनेशिया में प्रवेश करते हैं।
हालांकि, स्थानीय उत्पादकों को कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है और उत्पादन धीमा हो जाता है।
कुछ मामलों में, चीनी वस्त्र और परिधान अवैध रूप से देश में प्रवेश करते हैं और बाद में उन्हें स्थानीय रूप से निर्मित दिखाने के लिए रीब्रांड किया जाता है।
इंडोनेशिया ने कुछ उत्पादों पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने का प्रयास किया है, लेकिन प्रवर्तन में निरंतरता नहीं रही है।