क्या दिसंबर तिमाही में बड़ी कंपनियों के नतीजे कमजोर रहेंगे, आगे सुधार की उम्मीद?

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क्या दिसंबर तिमाही में बड़ी कंपनियों के नतीजे कमजोर रहेंगे, आगे सुधार की उम्मीद?

सारांश

दिसंबर तिमाही के नतीजे दर्शाते हैं कि भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन कमजोर रहा है, लेकिन आगे बेहतर संभावनाएं हैं। नए श्रम कानूनों और एआई की बढ़ती मांग से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ा है, लेकिन उम्मीद है कि आगे सुधार होगा।

Key Takeaways

  • बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन कमजोर रहा है।
  • नए श्रम कानूनों का मुनाफे पर असर पड़ा है।
  • एआई के कारण नई संभावनाएं खुल रही हैं।
  • बैंकिंग सेक्टर में अस्थायी बदलाव हो रहे हैं।
  • 2026 में आर्थिक ग्रोथ की उम्मीद है।

मुंबई, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। चालू वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही के प्रारंभिक परिणामों में भारतीय कॉर्पोरेट क्षेत्र की बड़ी कंपनियों (इंडिया इंक) का प्रदर्शन कुछ कमजोर दिखाई दे रहा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, नए श्रम कानूनों से जुड़े एकमुश्त शुल्कों (वन-टाइम चार्जेज) और अन्य बदलावों के कारण कंपनियों के मुनाफे पर प्रभाव पड़ा है।

अब तक निफ्टी50 की करीब 10 कंपनियों ने अपने नतीजे घोषित किए हैं, जिनमें ज्यादातर आईटी कंपनियां और कुछ बैंक शामिल हैं। विश्लेषकों का कहना है कि नतीजों में कोई बड़ा सरप्राइज नहीं मिला। अधिकतर कंपनियों के परिणाम मिले-जुले रहे या उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे।

कंपनियों की कमाई पर सबसे बड़ा असर नए श्रम कानून के लागू होने से पड़ा है। यह कानून नवंबर से लागू हुआ है, जिसमें वेतन, काम की जगह की सुरक्षा और सोशल सिक्योरिटी से जुड़े कई बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों को लागू करने में कंपनियों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ा।

टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों को नए नियमों के चलते नियमों के कार्यान्वयन से संबंधित एकमुश्त शुल्क के रूप में 4,373 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा, जिसके चलते इन कंपनियों के मुनाफे में इस तिमाही में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली।

हालांकि, थोड़े समय के लिए मुनाफे पर दबाव जरूर है, लेकिन आईटी कंपनियों के लिए मांग के हालात बेहतर होते दिख रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब सिर्फ प्रयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कंपनियों के कामकाज में सीधे इस्तेमाल होने लगा है, जिससे नए प्रोजेक्ट और भर्ती के मौके बढ़ रहे हैं।

कई बड़ी आईटी कंपनियों ने पूरे साल के लिए अपनी कमाई का अनुमान बढ़ाया है या उसमें बदलाव किया है। दूसरी कंपनियों के मैनेजमेंट ने भी कहा है कि एआई के कारण आगे अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है।

बैंकिंग सेक्टर की बात करें तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कुछ फैसलों, जैसे प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग और खेती से जुड़े कर्ज में बदलाव का असर बैंकों की कमाई पर पड़ा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह असर केवल थोड़े समय के लिए है।

विश्लेषकों के अनुसार, नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (एनबीएफसी), ऑटो कंपनियां और नॉन-फेरस मेटल कंपनियां इस रिजल्ट सीजन में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

अब तक जिन कंपनियों ने अपने तिमाही नतीजे जारी किए हैं, उनमें टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, विप्रो, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक शामिल हैं।

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 भारत के लिए 'गोल्डीलॉक्स ईयर' साबित हो सकता है। इसमें अच्छी आर्थिक ग्रोथ, ब्याज दरों में कमी, रुपए की स्थिरता और वैश्विक जोखिमों में कमी से शेयर बाजार को फायदा मिल सकता है। खासतौर पर मेटल्स, बैंकिंग-फाइनेंस, कैपिटल गुड्स और डिफेंस सेक्टर आगे बढ़ सकते हैं।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी की कमाई करीब 16 फीसदी बढ़ सकती है। रिपोर्ट में 2026 के लिए करीब 11 फीसदी रिटर्न की उम्मीद जताई गई है और साल के अंत तक निफ्टी का लक्ष्य 28,720 बताया गया है।

Point of View

हम इस महत्वपूर्ण आर्थिक स्थिति पर नजर बनाए रखेंगे। भारतीय कंपनियों की कमजोर प्रदर्शन के बावजूद, हम विश्वास करते हैं कि आने वाले समय में सुधार संभव है। इस बदलाव को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
NationPress
20/01/2026

Frequently Asked Questions

नए श्रम कानूनों का कंपनियों पर क्या असर पड़ा है?
नए श्रम कानूनों के कारण कंपनियों को एकमुश्त शुल्कों का सामना करना पड़ा है, जिससे उनके मुनाफे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
क्या आईटी कंपनियों की भविष्य में ग्रोथ की उम्मीद है?
हां, आईटी कंपनियों ने एआई के कारण अपने कमाई के अनुमानों में वृद्धि की है, जिससे बेहतर ग्रोथ की उम्मीद है।
बैंकिंग सेक्टर की स्थिति कैसी है?
बैंकिंग सेक्टर पर आरबीआई के कुछ फैसलों का असर पड़ा है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह असर अस्थायी है।
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