दीपावली 2025 से 2026: निफ्टी ~4% फिसला, फार्मा 24% और मेटल 23% की बढ़त के साथ टॉप गेनर
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी50 दीपावली 2025 से दीपावली 2026 के बीच करीब 4 प्रतिशत गिर गया, जबकि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स इसी अवधि में करीब 5 प्रतिशत नीचे आया। वैश्विक अस्थिरता को इस गिरावट का प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि, बीते एक सप्ताह में दोनों सूचकांकों में करीब 8.5 प्रतिशत की रिकवरी ने समग्र तस्वीर को कुछ हद तक सुधारा है।
सेक्टोरल प्रदर्शन: विजेता और पराजित
निफ्टी फार्मा इस अवधि में करीब 24 प्रतिशत के रिटर्न के साथ सभी सूचकांकों में शीर्ष प्रदर्शनकर्ता रहा। इसके ठीक पीछे निफ्टी मेटल ने करीब 23 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की। निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी मीडिया भी सर्वाधिक बढ़त दर्ज करने वाले सूचकांकों में शामिल रहे।
दूसरी ओर, निफ्टी एफएमसीजी करीब 18 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमज़ोर प्रदर्शन करने वाला सूचकांक साबित हुआ। निफ्टी आईटी, निफ्टी पीएसयू और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज भी सबसे अधिक गिरने वाले सूचकांकों में शामिल रहे।
निफ्टी50 के टॉप गेनर और लूज़र
निफ्टी50 में BSE का शेयर करीब 53 प्रतिशत के रिटर्न के साथ सर्वाधिक लाभ देने वाला स्टॉक रहा। श्रीराम फाइनेंस, टाइटन, अदाणी पोर्ट्स और टेक महिंद्रा ने 25 प्रतिशत से 40 प्रतिशत के बीच रिटर्न देकर टॉप गेनर्स की सूची में जगह बनाई।
इसके विपरीत, ITC करीब 31 प्रतिशत की गिरावट के साथ सूचकांक में सबसे बड़ा लूज़र रहा। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, HDFC लाइफ इंश्योरेंस और मैक्स हेल्थकेयर भी सर्वाधिक गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे।
मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र: परंपरा और इतिहास
BSE और NSE ने 8 नवंबर को दोपहर 2:20 बजे से 3:30 बजे IST तक विशेष मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र का आयोजन किया। यह सत्र नए हिंदू वित्तीय वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और निवेशकों के लिए सांकेतिक रूप से महत्वपूर्ण होता है।
आँकड़ों के अनुसार, पिछले 10 मुहूर्त ट्रेडिंग सत्रों में से आठ बार भारतीय बाज़ार तेजी के साथ बंद हुए हैं। 2016 और 2017 में निफ्टी और सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुए थे, परंतु तब से लगातार आठ सत्रों में दोनों सूचकांक बढ़त के साथ बंद रहे। उल्लेखनीय है कि इन सत्रों में तेजी आमतौर पर 1 प्रतिशत से कम रही।
वैश्विक संदर्भ और आगे की राह
यह गिरावट ऐसे समय में आई जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर नीति और डॉलर की मजबूती ने उभरते बाज़ारों पर दबाव बनाए रखा। गौरतलब है कि आईटी और एफएमसीजी जैसे घरेलू उपभोग व निर्यात से जुड़े क्षेत्रों पर इस दबाव का असर सबसे अधिक दिखा, जबकि फार्मा और मेटल ने वैश्विक माँग व निर्यात के बल पर मजबूती बनाए रखी।
बाज़ार विश्लेषकों की नज़र अब अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों, घरेलू तिमाही नतीजों और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा पर टिकी है, जो निकट भविष्य में बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।