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फाइनेंशियल प्लानर्स में एआई क्रांति: 10 में से 8 अगले 12 महीनों में अपनाएंगे तकनीक — FPSB रिपोर्ट

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फाइनेंशियल प्लानर्स में एआई क्रांति: 10 में से 8 अगले 12 महीनों में अपनाएंगे तकनीक — FPSB रिपोर्ट

सारांश

FPSB इंडिया के वैश्विक सर्वेक्षण का बड़ा खुलासा — फाइनेंशियल प्लानिंग में एआई की रफ़्तार एक साल में 10 में से 6 से बढ़कर 8 हो गई है। 37 देशों के 8,000 पेशेवरों के जवाब बताते हैं कि यह तकनीक दक्षता और पहुँच दोनों बदल रही है, पर मानवीय विवेक की माँग और बढ़ा रही है।

मुख्य बातें

10 में से 8 फाइनेंशियल प्लानर कंपनियाँ एआई का उपयोग कर रही हैं या अगले 12 महीनों में करने की योजना बना रही हैं; पिछले वर्ष यह आँकड़ा 10 में से 6 था।
सर्वेक्षण भारत सहित 37 देशों के 8,000 से अधिक फाइनेंशियल प्लानर्स पर आधारित है और इसे FPSB इंडिया ने जारी किया।
93% ने कामकाज की दक्षता में सुधार महसूस किया; 52% ने परिचालन दक्षता और 49% ने अधिक ग्राहकों को सेवाएँ देने की क्षमता में वृद्धि बताई।
ग्राहक-सेवा में आत्मविश्वास: 83% (2025 में 78% ) को लगता है एआई बेहतर सेवा देने में मदद करेगा; सेवा-गुणवत्ता पर 75% सकारात्मक (2025 में 60% )।
70% का मानना है एआई वंचित वर्गों तक वित्तीय नियोजन पहुँचाने में मदद करेगा; 68% को सेवा-लागत घटने की उम्मीद।

एआई और फाइनेंशियल प्लानिंग के बीच का रिश्ता तेज़ी से गहरा हो रहा है — फाइनेंशियल प्लानिंग स्टैंडर्ड्स बोर्ड (FPSB) इंडिया की 10 अक्टूबर 2026 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल प्लानिंग क्षेत्र की 10 में से 8 कंपनियाँ पहले से एआई का उपयोग कर रही हैं या अगले 12 महीनों के भीतर इसे अपनाने की तैयारी में हैं। गौरतलब है कि पिछले वर्ष यह आँकड़ा केवल 10 में से 6 था, जो इस पेशे में एआई की बढ़ती स्वीकार्यता का स्पष्ट संकेत है।

सर्वेक्षण का दायरा और पद्धति

यह रिपोर्ट भारत सहित 37 देशों के 8,000 से अधिक फाइनेंशियल प्लानर्स पर किए गए वैश्विक सर्वेक्षण पर आधारित है। इसे FPSB इंडिया ने जारी किया है, जो वित्तीय नियोजन पेशेवरों के लिए मानक तय करने वाली प्रमुख संस्था है। सर्वेक्षण की व्यापकता इसे भारतीय संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक बनाती है।

मुख्य निष्कर्ष: दक्षता और पहुँच में सुधार

रिपोर्ट के अनुसार, एआई अपनाने वाले पेशेवरों में से 93 प्रतिशत ने कामकाज की दक्षता में सुधार महसूस किया। 52 प्रतिशत ने परिचालन दक्षता बढ़ने की बात कही, जबकि 49 प्रतिशत ने कहा कि वे अब अधिक ग्राहकों को सेवाएँ देने में सक्षम हैं।

ग्राहक-सेवा के मोर्चे पर भी आँकड़े उत्साहजनक हैं। 83 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि एआई उन्हें ग्राहकों को बेहतर सेवाएँ देने में मदद करेगा — 2025 में यह आँकड़ा 78 प्रतिशत था। वहीं, 75 प्रतिशत को उम्मीद है कि एआई वित्तीय नियोजन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाएगा, जो 2025 के 60 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।

वंचित वर्गों तक पहुँच और लागत में कमी की उम्मीद

रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि करीब 70 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना था कि एआई उन वर्गों तक वित्तीय नियोजन की पहुँच बेहतर बना सकता है, जिन्हें अब तक पर्याप्त सेवाएँ नहीं मिल पाती थीं। 68 प्रतिशत को उम्मीद है कि इससे सेवाओं की लागत कम करने में भी मदद मिलेगी।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मध्यम वर्ग की बढ़ती आबादी वित्तीय नियोजन सेवाओं की माँग तेज़ी से बढ़ा रही है, लेकिन पेशेवर सलाहकारों की सीमित संख्या इस माँग को पूरा करने में चुनौती बनी हुई है।

ग्राहक भी कर रहे हैं एआई का इस्तेमाल

रिपोर्ट के अनुसार, 33 प्रतिशत फाइनेंशियल प्लानर्स ने बताया कि उनके ग्राहक सामान्य वित्तीय जानकारी और शिक्षा के लिए पहले से ही एआई का उपयोग कर रहे हैं। वहीं, 25 प्रतिशत ने कहा कि उनके ग्राहक पेशेवर सलाह की पुष्टि करने या उससे तुलना करने के लिए एआई का सहारा ले रहे हैं।

यह प्रवृत्ति यह संकेत देती है कि एआई केवल पेशेवरों का नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं का भी एक सक्रिय वित्तीय उपकरण बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों की राय: तकनीक और मानवीय विवेक का संतुलन ज़रूरी

FPSB इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश विश्वनाथन ने कहा, 'एआई वित्तीय जानकारी तैयार करने, उस तक पहुँच बनाने और उसके इस्तेमाल के तरीके को तेज़ी से बदल रहा है। हालाँकि, यह तकनीक दक्षता बढ़ाने और वित्तीय नियोजन तक पहुँच का विस्तार करने के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है, लेकिन केवल जानकारी पर्याप्त नहीं है।'

विश्वनाथन ने आगे कहा, 'वित्तीय फैसलों के लिए संदर्भ, विवेक और किसी व्यक्ति के लक्ष्यों, प्राथमिकताओं तथा परिस्थितियों की समझ ज़रूरी है। जैसे-जैसे एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है, उपभोक्ताओं को जानकारी को उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों के संदर्भ में समझने और सोच-समझकर फैसले लेने में मदद करने वाले योग्य वित्तीय नियोजन पेशेवरों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।'

आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि भारतीय फाइनेंशियल प्लानर्स एआई को किस हद तक अपनी सेवाओं में एकीकृत करते हैं और नियामक संस्थाएँ इस बदलाव के साथ कदमताल मिलाने के लिए क्या कदम उठाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'अपनाने की योजना' और 'प्रभावी उपयोग' के बीच की खाई कितनी चौड़ी है। भारत में जहाँ वित्तीय साक्षरता और डेटा गोपनीयता के मानक अभी विकसित हो रहे हैं, वहाँ एआई-संचालित वित्तीय सलाह के लिए नियामक ढाँचे की अनुपस्थिति एक बड़ा जोखिम है। FPSB का यह तर्क कि मानवीय विवेक अपरिहार्य है, सही है — पर यह भी देखना होगा कि क्या कम आय वर्ग के ग्राहक एआई-सलाह पर निर्भर होकर बिना पर्याप्त पर्यवेक्षण के गलत वित्तीय निर्णय न ले लें।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FPSB इंडिया की एआई रिपोर्ट में मुख्य निष्कर्ष क्या हैं?
FPSB इंडिया की 10 अक्टूबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 8 फाइनेंशियल प्लानर कंपनियाँ एआई अपना रही हैं या अगले 12 महीनों में अपनाने की योजना बना रही हैं, जो पिछले वर्ष के 10 में से 6 से अधिक है। 93% पेशेवरों ने दक्षता में सुधार महसूस किया।
यह सर्वेक्षण कितने देशों और पेशेवरों पर आधारित है?
यह सर्वेक्षण भारत सहित 37 देशों के 8,000 से अधिक फाइनेंशियल प्लानर्स पर आधारित है। इसे FPSB इंडिया ने जारी किया है, जो वित्तीय नियोजन पेशेवरों के लिए वैश्विक मानक तय करने वाली संस्था है।
क्या एआई वित्तीय पेशेवरों की जगह ले लेगा?
FPSB इंडिया के CEO रमेश विश्वनाथन के अनुसार, एआई दक्षता बढ़ाने का साधन है, न कि पेशेवरों का विकल्प। उन्होंने कहा कि वित्तीय निर्णयों के लिए संदर्भ, विवेक और व्यक्तिगत परिस्थितियों की समझ ज़रूरी है, जो योग्य पेशेवर ही प्रदान कर सकते हैं।
एआई से वित्तीय सेवाओं की लागत पर क्या असर होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, 68% उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि एआई वित्तीय नियोजन सेवाओं की लागत कम करने में मदद करेगा। साथ ही, 70% का मानना है कि इससे वंचित वर्गों तक भी ये सेवाएँ पहुँच सकेंगी।
ग्राहक किस काम के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं?
रिपोर्ट बताती है कि 33% फाइनेंशियल प्लानर्स के ग्राहक सामान्य वित्तीय जानकारी और शिक्षा के लिए एआई का उपयोग पहले से कर रहे हैं, जबकि 25% ग्राहक पेशेवर सलाह की पुष्टि या तुलना के लिए एआई का सहारा ले रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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